लैब में उनकी केमिस्ट्री देखकर दिल पिघल गया। वैज्ञानिक काम के बीच भी जो नज़ारे थे, वो कमाल के थे। माइक्रोस्कोप देखते वक्त जो नज़दीकियां बढ़ीं, वो बहुत प्यारी लगीं। इस शो प्यार सच में छूत की बीमारी ने विज्ञान और रोमांस का बेहतरीन संगम दिखाया है। चूहे वाला सीन थोड़ा डरावना था पर उसने उन्हें करीब ला दिया। मुझे यह जोड़ी बहुत पसंद आई और मैं आगे के एपिसोड देखने के लिए बेताब हूं। वैज्ञानिक पोशाक में वे दोनों बहुत सुंदर लग रहे थे।
भविष्य की प्रयोगशाला का सेट डिज़ाइन बहुत ही शानदार था। होलोग्राफिक स्क्रीन और नीली रोशनी ने माहौल बना दिया। जब लाइट चली गई तो कहानी में एक नया मोड़ आया। प्यार सच में छूत की बीमारी कहानी में विज्ञान के साथ भावनाओं को भी दिखाया गया है। सफेद चूहे ने डरा दिया पर उसी बहाने गले मिलना हुआ। ऐसे सीन देखकर लगता है कि प्यार किसी भी हालात में रास्ता बना लेता है। बहुत ही रोमांचक और भावुक कहानी है जो दर्शकों को बांधे रखती है।
लाल बालों वाली वैज्ञानिक का अभिनय बहुत स्वाभाविक लगा। चश्मे में उसकी आंखों का डर साफ दिख रहा था। जब वह डरकर उनके पास गई तो जो पल बना, वो यादगार था। प्यार सच में छूत की बीमारी में ऐसे ही छोटे छोटे पल बड़ी कहानी कहते हैं। अंधेरे में खड़े होकर एक दूसरे को सहारा देना बहुत सुंदर लगा। तकनीक के बीच इंसानी रिश्तों को दिखाना इस शो की खासियत है। मुझे यह लघु फिल्म बहुत पसंद आई और मैं इसे सभी को देखने की सलाह दूंगा।
टेस्ट ट्यूब और मशीनों के बीच भी रोमांस कैसे पलता है, यह देखना दिलचस्प था। सेंट्रीफ्यूज मशीन घूम रही थी और उनकी नज़रे मिल रही थीं। प्यार सच में छूत की बीमारी नाम ही काफी है बताने के लिए कि कहानी किस बारे में है। जब बिजली गई तो सन्नाटा और डर दोनों थे, पर साथ खड़े होना हिम्मत बढ़ाता है। चूहे का डर महिला वैज्ञानिक ने बहुत अच्छे से निभाया। यह शो विज्ञान प्रेमियों और रोमांस चाहने वालों दोनों के लिए बेस्ट है।
नीली रोशनी वाला लैब सेट देखकर ही समझ आ गया कि यह कोई आम कहानी नहीं है। दोनों वैज्ञानिकों के बीच की खामोशी भी बहुत कुछ कह रही थी। प्यार सच में छूत की बीमारी में दिखाया गया है कि मुसीबत में कौन साथ खड़ा होता है। चूहे के आते ही जो घबराहट हुई, वो असली लगी। उसने उनका हाथ थाम लिया और सुरक्षा महसूस हुई। ऐसे पल जीवन में भी बहुत मायने रखते हैं। मुझे यह शो बहुत गहरा लगा और मैं इसे बार बार देखना चाहूंगा।
कहानी की शुरुआत बहुत वैज्ञानिक अंदाज में हुई पर अंत भावनात्मक था। होलोग्राम पर वायरस का मॉडल देखकर हैरानी हुई। प्यार सच में छूत की बीमारी में विज्ञान के ठंडे माहौल में गर्माहट दिखाई गई है। जब वे दोनों अंधेरे में आमने सामने थे, तो हवा में कुछ अलग था। चूहे ने डराया पर प्यार ने सहारा दिया। यह शो छोटा जरूर है पर इसका असर बड़ा है। मैंने नेटशॉर्ट पर देखा और मुझे बहुत मजा आया। सभी को जरूर देखना चाहिए।
वैज्ञानिक कोट में वे दोनों बहुत प्रोफेशनल लग रहे थे। काम के प्रति समर्पण और एक दूसरे के प्रति लगा साफ दिख रहा था। प्यार सच में छूत की बीमारी कहानी में हर सीन में एक नया रंग है। माइक्रोस्कोप में जो जीवाणु दिखे, वो कहानी का हिस्सा लग रहे थे। जब लाइट गई तो असली परीक्षा शुरू हुई। डर के समय ही तो पता चलता है कि कौन अपना है। यह शो देखकर दिल को सुकून मिला और मैं आगे की कहानी जानना चाहता हूं।
इस शो का वातावरण बहुत ही रहस्यमयी बनाया गया है। लैब की सफाई और मशीनें सब कुछ आधुनिक लग रहा था। प्यार सच में छूत की बीमारी में तकनीक और इंसानियत का मिलन देखा जा सकता है। जब महिला वैज्ञानिक डर गई तो पुरुष वैज्ञानिक ने तुरंत सहारा दिया। यह छोटा सा पल बड़ा संदेश देता है। चूहे का सीन थोड़ा हास्यपूर्ण भी था पर डर भी लगा। मुझे यह जोड़ी बहुत जची और मैं इसे सबसे बेहतरीन शो मानता हूं।
कहानी में तनाव और रोमांस का संतुलन बहुत अच्छा है। शुरुआत में सब सामान्य था पर अंधेरा होते ही सब बदल गया। प्यार सच में छूत की बीमारी नाम के अनुसार ही कहानी आगे बढ़ती है। वैज्ञानिक उपकरणों के बीच भी दिल की धड़कनें तेज हो रही थीं। चूहे के कारण जो घबराहट हुई, उसने उन्हें करीब ला दिया। यह शो देखकर लगा कि प्यार किसी भी रूप में आ सकता है। मुझे यह कहानी बहुत पसंद आई और मैं इसे दोस्तों को सुझाऊंगा।
अंत में जब वे दोनों गले मिले तो पूरा माहौल बदल गया। डर के बाद राहत मिलना बहुत अच्छा लगा। प्यार सच में छूत की बीमारी में दिखाया गया है कि साथ खड़ा होना ही असली प्यार है। लैब की ठंडक में भी उनकी दोस्ती गर्म थी। चूहे का डर बहाना बना पर असलियत सामने आ गई। यह शो छोटा है पर इसमें बहुत कुछ है। मैंने इसे नेटशॉर्ट एप पर देखा और मुझे बहुत अच्छा लगा। सभी को यह शो देखना चाहिए।