प्रयोगशाला में नीली शीशी देखकर ही रोंगटे खड़े हो गए। वैज्ञानिक की आंखों में डर साफ दिख रहा था। इस धारावाहिक प्यार सच में छूत की बीमारी में हर दृश्य में तनाव बना हुआ है। संदूक को सुरक्षित रखना और फिर रात के रास्ते पर गाड़ी ले जाना बहुत जोखिम भरा लग रहा था। पीछे आ रही गाड़ी का साया किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं लग रहा था। देखने वाला हर पल तनाव में रहता है। कहानी बहुत आगे बढ़ रही है।
समुद्र किनारे रात का सफर बहुत खूबसूरत लेकिन डरावना है। चालक के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही हैं। प्यार सच में छूत की बीमारी की कहानी में यह मोड़ बहुत अहम साबित होगा। पास वाली जगह पर बैठे साथी के पास वह सुरक्षित बस्ता है। पीछे दुश्मन हैं और आगे अनजान रास्ता। हर मोड़ पर नया खतरा मिल रहा है। दर्शक बंधा हुआ है। कथा बहुत गहरी है।
पीछे देखने वाले शीशे में दिखती वो गाड़ी किसी साये की तरह पीछा कर रही है। चालक की नजरें बार बार शीशे में जा रही हैं। प्यार सच में छूत की बीमारी के इस भाग में कार्रवाई की बौछार होने वाली है। हथियार लोड करने वाला शख्स किसी आम राहगीर जैसा नहीं लग रहा। कहानी में अब तेजी आएगी और सब कुछ बदल जाएगा। रोमांच बढ़ गया है। माहौल गरम है।
प्रयोगशाला की ठंडी रोशनी से लेकर राजमार्ग की पीली रोशनी तक का सफर बहुत गहरा है। दोनों वैज्ञानिकों के बीच चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। प्यार सच में छूत की बीमारी में संवाद से ज्यादा कार्रवाई बोल रही है। संदूक की कुंजी और उंगली के निशान जांचक ने तकनीक का डर दिखाया। अब बस धमाका होने का इंतजार है। माहौल गरम है। सब देख रहे हैं।
नीले तरल वाली शीशी किसी जानलेवा संक्रमण से कम नहीं लगती। उसे संभालने वाले हाथ कांप रहे थे या बस रोशनी का खेल था। प्यार सच में छूत की बीमारी की पटकथा में यह वस्तु ही मुख्य पात्र है। रात के सन्नाटे में गाड़ी की रफ्तार बढ़ती जा रही है। पीछे आ रहे खतरे को भांपना मुश्किल नहीं है। हर दृश्य में जान है। बहुत पसंद आ रहा है। मजा आ रहा है।
गाड़ी के अंदर का माहौल बाहर के अंधेरे से ज्यादा गहरा लग रहा है। चालक के हाथ बागडोर पर कसे हुए हैं और साथी चुपचाप बस्ता पकड़े है। प्यार सच में छूत की बीमारी में रिश्तों की परीक्षा भी इसी रास्ते पर होगी। पीछे वाली गाड़ी वाले बंदूक तान चुके हैं। अब बचने का रास्ता बहुत कम बचा है। देखने में मजा आ रहा है। कथा अच्छी है। डर लग रहा है।
बंदूक लोड करने की आवाज भी अगर आए तो कानों में शोर गूंज उठे। उस शख्स की नीयत साफ झलक रही है चेहरे से। प्यार सच में छूत की बीमारी में खलनायक का प्रवेश धमाकेदार हुआ है। सामने वाली गाड़ी वाले बेखबर नहीं हैं पर हालात बिगड़ते जा रहे हैं। रात का सफर अब मौत के मुंह में जाने जैसा लग रहा है। बहुत ही रोमांचक दृश्य है। डर लग रहा है।
सुरक्षित संदूक को खोलने और बंद करने का तरीका बहुत आधुनिक दिखाया गया है। प्रयोगशाला से निकलते ही कहानी में रफ्तार पकड़ गई है। प्यार सच में छूत की बीमारी में दृश्य प्रभाव बहुत दमदार हैं। समुद्र की लहरें और गाड़ी की रोशनी का मेल खूबसूरत है। पर खतरा पास आता जा रहा है। अब आगे क्या होगा यह जानना जरूरी है। उत्सुकता बढ़ी है।
चश्मे वाली वैज्ञानिक की नजरों में जिम्मेदारी का बोझ साफ दिख रहा था। उसने बस्ते को ऐसे पकड़ा जैसे दुनिया की कीमती चीज हो। प्यार सच में छूत की बीमारी में किरदारों की गहराई बहुत अच्छी है। चालक की आंखों में भी वही डर था जो दर्शक को महसूस हो रहा है। रात के रास्ते पर यह पीछा किसी रोमांचक कहानी से कम नहीं है। कहानी जम रही है।
अंत में जब पीछे वाली गाड़ी करीब आई तो सांसें रुक गईं। हथियारबंद शख्स का इरादा साफ खतरनाक लग रहा था। प्यार सच में छूत की बीमारी का अंत अब बहुत करीब आ गया है। प्रयोगशाला की सुरक्षा और बाहर का खतरा दोनों टकराने वाले हैं। यह श्रृंखला रात भर जागकर देखने लायक है। हर पल नया मोड़ ले रही है कहानी। बहुत बढ़िया लग रहा है।