उस बड़े लोहे के फाटक के सामने खड़ी वृद्ध महिला की आंखों में एक अजीब सी चमक थी। लगता है इस परिवार का कोई बहुत बड़ा राज़ छिपा है जो अभी खुलने वाला है। युवक की घबराहट साफ़ दिख रही थी जब उसने बात सुनी। भेड़ियों से घिरी कहानी में ऐसा मोड़ पहले नहीं देखा था। शाही जीवन के पीछे का संघर्ष बहुत गहरा लग रहा है।
कमरे के अंदर का नज़ारा बाहर से बिल्कुल अलग और ज्यादा निजी था। जब वह बिना जूतों के चलकर आई तो माहौल में तनाव बढ़ गया। युवक का सामान पैक करना किसी जाने की तैयारी लग रहा था। भेड़ियों से घिरी में रिश्तों की यह उलझन दिलचस्प है। उनकी नज़रों में प्यार और डर दोनों साफ़ झलक रहे थे।
मोती की माला पहने उस औरत का रुतबा बहुत भारी और अमीर लग रहा था। शायद वह घर की मालकिन हैं जो सब कुछ नियंत्रित करती हैं। नौजवान लड़के पर उनका बहुत असर है जो चेहरे पर दिख रहा था। भेड़ियों से घिरी नाटक में सत्ता का खेल बहुत तेज़ है। हर संवाद के पीछे कोई मकसद छिपा हुआ लगता है।
वह काले रंग का सामान क्यों पैक कर रहा था क्या वह घर छोड़ना चाहता है। सुनहरे कमरे में बैठकर उसने गहरी सांस ली जो उसकी परेशानी बता रही थी। तभी वह सुंदरी आई और सब बदल गया। भेड़ियों से घिरी की पटकथा में यह रहस्य बना रहेगा। देखना होगा कि आखिर वह जाता है या रुकता है।
फव्वारे और बड़े घर का नज़ारा बहुत शाही था लेकिन चेहरों पर खुशी कम थी। काली पोशाक वाली लड़की चुपचाप सब देख रही थी। शायद वह भी इस खेल का हिस्सा है। भेड़ियों से घिरी में अमीरी के पीछे का सच दिखाया गया है। हर दृश्य में एक नया राज़ खुलता जा रहा है। यह कहानी बहुत गहरी है।
जब वह लड़की उसकी गोद में बैठ गई तो बातचीत का रुख बदल गया। यह सिर्फ प्यार नहीं लग रहा था बल्कि रोकने की कोशिश थी। उसकी आंखों में विनती साफ़ दिख रही थी। भेड़ियों से घिरी में भावनात्मक नाटक बहुत गहरा है। ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। कहानी में जान है।
सूरज ढलने का वक्त था जब वे तीनों फाटक पर खड़े थे। रोशनी उनके चेहरों पर अजीब सी छाया डाल रही थी। बूढ़ी महिला ने जो कहा उसने सबको चौंका दिया। भेड़ियों से घिरी की शुरुआत ही इतनी धमाकेदार है। आगे क्या होगा यह जानने की उत्सुकता बढ़ रही है। माहौल बहुत गंभीर है।
कमरे में सन्नाटा था बस सामान की आवाज़ आ रही थी। जब तक वह नहीं बोली तब तक कुछ समझ नहीं आया। उनकी शारीरिक भाषा सब कुछ कह रही थी। भेड़ियों से घिरी में बिना बोले बातें करना कला है। यह दृश्य बहुत ही तनावपूर्ण और खूबसूरत बनाया गया है। खामोशी बोल रही थी।
तीन लोगों के बीच का यह समीकरण बहुत पेचीदा लग रहा है। क्या वह लड़का उस बूढ़ी महिला का पोता है या कोई और। काली पोशाक वाली लड़की की चुप्पी भी सवाल खड़ी करती है। भेड़ियों से घिरी में रिश्तों की यह डोर उलझती जा रही है। हर किरदार का अपना एक मकसद लगता है।
लग रहा है यह किसी कहानी का अंत नहीं बल्कि नई शुरुआत है। सामान पैक करना जाने का संकेत था पर रुकना भी ज़रूरी था। उस सुनहरे कमरे में बहुत से राज़ दफन हैं। भेड़ियों से घिरी की यह कड़ी बहुत यादगार बन गई है। अगला हिस्सा कब आएगा इसका इंतज़ार रहेगा।