PreviousLater
Close

भेड़ियों से घिरी

बेला, एक करियर-उन्मुख महिला, अपनी शादी को परफेक्ट समझती थी – जब तक एक दुर्घटना ने उसे एक विकृत सच नहीं बता दिया: उसका पति वाइल्डर और उसका भाई क्रॉस ने एक रहस्यमयी ज्योतिष यंत्र से आत्माओं की अदला-बदली कर ली थी। एक जादूगर ने दावा किया कि इसका एकमात्र उपाय बेला का उनमें से एक के साथ सोना है...
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

धोखे का खेल

इस दृश्य में जो मोड़ आया है वो रोंगटे खड़े कर देने वाला है। हरे लिबास वाले शख्स को लगा था कि सब ठीक हो जाएगा, लेकिन नीली शीशी ने सब बदल दिया। भेड़ियों से घिरी की कहानी में ऐसा मोड़ उम्मीद नहीं था। सफेद कमीज़ वाला शख्स और काली पोशाक वाली महिला की साजिश बहुत गहरी लग रही है। नेटशॉर्ट मंच पर रोमांचक पल देखने को मिलते रहें।

दर्दनाक अंत

सफेद पोशाक वाली महिला की आंखों में जो डर था, वो साफ़ दिख रहा था। जब हरे लिबास वाला ज़मीन पर गिरा, तो लगा जैसे समय थम गया हो। भेड़ियों से घिरी श्रृंखला में भावनाओं को जिस तरह दिखाया गया है वो काबिले तारीफ है। हर किरदार की चुप्पी में एक शोर था। ऐसे नाटक देखकर ही असली मनोरंजन मिलता है।

महल जैसा घर

आलीशान कमरे और बाहर का नज़ारा बहुत खूबसूरत था, लेकिन अंदर चल रहा खेल खतरनाक था। कांच की शीशी में क्या था, ये जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। भेड़ियों से घिरी की मंच सज्जा ने कहानी की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। रोशनी और छाया का खेल भी कमाल का था। नेटशॉर्ट मंच पर गुणवत्ता देखकर खुशी हुई।

विश्वास की मौत

कागज़ पर दस्तखत करते वक्त उसे क्या लगा होगा? दोस्त ने ही दुश्मन का रूप ले लिया। सफेद कमीज़ वाले की मुस्कान में जहर था। भेड़ियों से घिरी में दिखाया गया ये धोखा दिल दहला देने वाला है। काली पोशाक वाली महिला भी उतनी ही खतरनाक साबित हुई। कहानी में ऐसा उतार चढ़ाव ही असली मज़ा है।

रफ़्तार पकड़ती कहानी

शुरू में शांति थी, फिर कागज़ आए, और अंत में मौत का मंज़र। हर पल के साथ तनाव बढ़ता गया। भेड़ियों से घिरी की पटकथा बहुत मज़बूत है। दर्शक को बांधे रखने की कला इन लोगों को अच्छे से आती है। नेटशॉर्ट मंच पर ऐसे कार्यक्रम देखना सुकून देता है। अगली कड़ी कब आएगी, इसका इंतज़ार रहेगा।

नीली शीशी का राज़

वो छोटी सी नीली शीशी सब कुछ बदल गई। हरे लिबास वाले ने बिना सोचे समझे पी लिया, यही उसकी गलती थी। भेड़ियों से घिरी में ऐसे सामान का इस्तेमाल कहानी को आगे बढ़ाने के लिए किया गया है। दृश्य प्रभाव भी बहुत असली लगे। ऐसे रहस्य से भरे पल देखकर रोमांच बढ़ जाता है।

दो महिलाओं का खेल

एक महिला सफेद में घबराई हुई, तो दूसरी काले में शांत। दोनों के बीच का अंतर बहुत गहरा था। भेड़ियों से घिरी में महिला किरदारों को बहुत मज़बूती से दिखाया गया है। काली पोशाक वाली की मुस्कान में एक राज़ छिपा था। नेटशॉर्ट मंच पर ऐसे किरदार देखना अच्छा लगता है।

बेचारा हरा लिबास

उसे लगा था कि वो जीत गया है, लेकिन हकीकत कुछ और थी। दर्द में तड़पता हुआ वो शख्स किसी को भी रुला सकता है। भेड़ियों से घिरी में अभिनय इतना असली लगा कि लगा सब सच हो रहा है। अभिनेता ने दर्द को बहुत अच्छे से व्यक्त किया। ऐसे पल बार बार देखने को मन करता है।

जीत किसकी हुई

सफेद कमीज़ वाला और काली पोशाक वाली एक साथ खड़े हो गए। उनकी जीत साफ़ दिख रही थी। भेड़ियों से घिरी में सत्ता संतुलन बहुत दिलचस्प तरीके से दिखाए गए हैं। क्या ये अंत है या नई शुरुआत? नेटशॉर्ट मंच पर ऐसे सवाल पूछने को मिलते हैं। कहानी में गहराई होनी चाहिए।

बेहतरीन अनुभव

पूरा सीन एक फिल्म से कम नहीं था। संवाद नहीं थे फिर भी सब कुछ कहा गया। भेड़ियों से घिरी ने साबित कर दिया कि बिना शोर मचाए भी नाटक बनाया जा सकता है। नेटशॉर्ट मंच का इंतज़ाम भी बहुत सरल है। ऐसी सामग्री के लिए मैं हमेशा तैयार रहता हूं। सबको देखना चाहिए।