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माँ का दिल, बेटी की जिदवां44एपिसोड

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माँ का दिल, बेटी की जिद

मोली एक समझदार बच्ची है। वह अपनी माँ काव्या को चेहरे के दागों की वजह से पिता मोहन की तकलीफें देखती है। मोहन ने ज्योति और टीना को साथ रखा है। काव्या की मौत के बाद मोली शादी में घुसकर मर जाती है। फिर मोली एक साल पीछे जाकर जी उठती है। इस बार वह माँ की जान बचाती है, चेहरे का इलाज कराती है, और उन्हें बदमाश पति से छुड़वा देती है। फिर काव्या अपनी एम्ब्रॉयडरी कला से देश की पहली महिला उद्योगपति बन जाती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

कड़वा सच और मीठी मुस्कान

जब वह महिला कड़वे शब्दों से हमला करती है, तो लगता है कि सब खत्म हो गया, लेकिन माँ का दिल, बेटी की जिद वाली लड़की की मासूमियत ने सब बदल दिया। उसकी मुस्कान देखकर मन हल्का हो गया। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल मोमेंट्स देखना बहुत सुकून देता है। किरदारों की आँखों में छिपा दर्द साफ दिख रहा था।

सैनिक का रोमांटिक अंदाज

ऑफिस में सख्त चेहरा और फिर फूलों के साथ घर के बाहर खड़ा होना, यह कंट्रास्ट कमाल का था। सूरज शर्मा का किरदार बहुत गहराई से लिखा गया है। जब वह दरवाजा खटखटाता है, तो दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं। माँ का दिल, बेटी की जिद वाले सीन के बाद यह रोमांस बिल्कुल सही लगा। नेटशॉर्ट ऐप पर कहानी का फ्लो बहुत नेचुरल है।

बेटी की समझदारी

इतनी छोटी उम्र में बच्ची का माहौल को समझना और माँ को हिम्मत देना देखकर रूह कांप गई। माँ का दिल, बेटी की जिद वाली लाइन यहाँ बिल्कुल फिट बैठती है। उसकी आँखों में सवाल थे लेकिन चेहरे पर भरोसा। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे किरदार देखकर लगता है कि बच्चे कितने समझदार हो सकते हैं। सीन बहुत इमोशनल था।

दफ्तर की तनावपूर्ण हवा

सैनिक वर्दी में जब दफ्तर में घुसता है, तो माहौल में एक अलग ही गंभीरता आ जाती है। सूरज शर्मा का चेहरा पढ़ना मुश्किल था, क्या वह गुस्से में हैं या चिंतित? माँ का दिल, बेटी की जिद वाले प्लॉट के बीच यह मिलिट्री एंगल कहानी को नया मोड़ दे रहा है। नेटशॉर्ट ऐप पर सस्पेंस बनाए रखना आसान नहीं होता, लेकिन यहाँ बहुत अच्छे से किया गया है।

फूलों का इंतजार

हाथ में गुलदस्ता लिए खड़ा होना और फिर दरवाजे पर दस्तक देना, यह सीन कितना रोमांटिक है। सूरज शर्मा की घबराहट साफ दिख रही थी। माँ का दिल, बेटी की जिद वाली कहानी में यह पल बहुत खास लगा। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन्स देखकर लगता है कि प्यार की अभिव्यक्ति कितनी खूबसूरत हो सकती है। फूलों का रंग और उसकी बेचैनी लाजवाब थी।

कर्मचारी की बेरुखी

जब वह महिला दरवाजा बंद कर देती है या अनदेखा करती है, तो गुस्सा आता है। माँ का दिल, बेटी की जिद वाली लड़की को ऐसे माहौल में रहना पड़ रहा है, यह सोचकर दुख होता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे विलेन किरदार देखकर कहानी में और दिलचस्पी बढ़ जाती है। उसका घमंडी अंदाज और ऊपर से देखने वाला नजरिया बहुत अच्छे से दिखाया गया है।

वर्दी का रौब

सैनिक की वर्दी और उसका अंदाज देखकर ही लगता है कि वह किसी बड़े मकसद से आया है। सूरज शर्मा के साथ उसकी बातचीत में जो गंभीरता थी, वह कहानी के आगे के मोड़ का संकेत दे रही थी। माँ का दिल, बेटी की जिद वाले सीन के बाद यह मिलिट्री एंट्री बहुत धमाकेदार लगी। नेटशॉर्ट ऐप पर प्रोडक्शन वैल्यू भी काफी अच्छी लग रही है।

माँ की मजबूरी

लड़की के चेहरे पर जो चिंता थी, वह किसी माँ की मजबूरी को बयां कर रही थी। माँ का दिल, बेटी की जिद के बीच वह संघर्ष कर रही है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे रियलिस्टिक किरदार देखकर कहानी से जुड़ाव बढ़ जाता है। उसकी आँखों में आंसू थे लेकिन हिम्मत नहीं टूटी थी। यह सीन दिल को छू गया।

सूरज शर्मा का रहस्य

सूरज शर्मा दफ्तर में क्या सोच रहे थे? उनकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। माँ का दिल, बेटी की जिद वाली कहानी में उनका किरदार सबसे ज्यादा इंट्रिगिंग लग रहा है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे किरदार जो पहेली जैसे हों, वे हमेशा पसंद आते हैं। अगले एपिसोड का बेसब्री से इंतजार है कि वह आखिर क्या करने वाला है।

उम्मीद की किरण

सारे झगड़ों और तनाव के बीच, जब सूरज शर्मा फूलों के साथ आते हैं, तो लगता है कि सब ठीक हो जाएगा। माँ का दिल, बेटी की जिद वाली कहानी में यह उम्मीद का पल बहुत जरूरी था। नेटशॉर्ट ऐप पर कहानी का टोन बदलना बहुत अच्छे से किया गया है। अंधेरे के बाद उजाला वाला यह सीन बहुत सुकून देने वाला था।