PreviousLater
Close

रणभूमि की रानी

अराजक गणराज्य काल में चन्द्रावती संघ की प्रमुख बबिता राठौड़ विश्वासघात का शिकार होकर भी साहस से उभरती है। राघव मेहता और सोनल चौहान की साज़िशों का सामना करते हुए वह अपने पिता वीरेंद्र सिंह राठौड़ से मिलती है। विक्रम राठौड़ और शत्रु शक्तियों के षड्यंत्रों का पर्दाफाश कर, वह राजेश्वरी देवी के साथ मिलकर चन्द्रावती संघ को पुनर्जीवित करती है और अंततः सेनापति बनकर राष्ट्र की रक्षा करती है।
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

तलवार का खतरनाक खेल

तलवार की नोक पर खड़ा वह सिपाही देखकर रोंगटे खड़े हो गए। लाल जोड़े वाली दुल्हन की आंखों में डर साफ झलक रहा था। रणभूमि की रानी में ऐसे सीन देखकर दिल की धड़कन तेज हो जाती है। हर किरदार की एक्टिंग लाजवाब है। कहानी में क्या मोड़ होने वाला है यह जानने के लिए मैं बेचैन हूं। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का अनुभव बहुत रोमांचक रहा।

दादी का दर्दनाक रोना

उस दादी माँ का रोना दिल को छू गया। जब उसने अपनी पोती को गले लगाया तो लगा सब कुछ खत्म हो गया। वैसे ही जैसे रणभूमि की रानी में दिखाया गया है। परिवार की सुरक्षा के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया गया है। यह ड्रामा भावनाओं से भरपूर है। हर सीन में एक नया मोड़ आता है जो दर्शकों को बांधे रखता है। मुझे यह कहानी बहुत पसंद आई।

कार वाला रहस्य

कार में बैठे उस अधिकारी की चाल चलने का ढंग ही अलग था। उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी। रणभूमि की रानी के इस किरदार ने सबका ध्यान खींच लिया। वह कोट वाली लड़की भी कम नहीं थी जो बिना डरे आगे बढ़ी। इन दोनों के बीच क्या खेल चल रहा है यह देखना दिलचस्प होगा। कहानी की गहराई धीरे धीरे सामने आ रही है।

गेट पर आत्मविश्वास

सेना गेट के सामने खड़ी वह लड़की बहुत आत्मविश्वासी लग रही थी। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक थी। रणभूमि की रानी में ऐसे किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उसे देखकर लगा कि वह किसी कार्य पर है। बैकग्राउंड म्यूजिक भी बहुत सस्पेंस बनाए रखता है। हर कड़ी के बाद अगली कड़ी देखने का मन करता है।

खाने का तनाव

गरम बर्तन खाते हुए उस कमांडर का व्यवहार बहुत अजीब था। वह लड़की गुस्से में खड़ी थी और वह आराम से खा रहा था। रणभूमि की रानी में ऐसे तनावपूर्ण माहौल बहुत अच्छे से दिखाया गया है। शायद वह उसे सबक सिखाना चाहता था। सत्ता का संतुलन बहुत स्पष्ट है। संवाद भी बहुत तेज और प्रभावशाली हैं।

दुल्हन की चिंता

लाल साड़ी वाली दुल्हन की चिंता साफ दिख रही थी। जब तलवार उस सिपाही की गर्दन पर थी तो सबकी सांसें रुक गईं। रणभूमि की रानी में ऐसे भावनात्मक सीन्स बहुत हैं। वह अपने प्यार को बचाने के लिए कुछ भी कर सकती है। यह कहानी साहस और बलिदान की है। दर्शक हर पल किरदारों के साथ जुड़ जाते हैं।

खलनायक की नजर

विदेशी कपड़ों वाले उस खलनायक की नजरें बहुत खतरनाक थीं। वह किसी शिकारी की तरह देख रहा था। रणभूमि की रानी में विलेन का किरदार बहुत मजबूत है। उसकी मौजूदगी से ही खतरा महसूस होता है। मारपीट के दृश्य की तैयारी बहुत अच्छी लग रही है। लड़ाई सजावट भी बहुत वास्तविक है।

पुराने जमाने की कार

उस कार का पुराना तरीका देखकर लगा कि कहानी पुराने जमाने की है। फिर भी किरदारों के कपड़े बहुत शानदार हैं। रणभूमि की रानी में पोशाक डिजाइन पर खास ध्यान दिया गया है। हर लिबास किरदार की पहचान बताती है। दृश्य बहुत ही सुंदर हैं। सेटिंग भी बहुत असली लगती है।

दरवाजे वाली एंट्री

जब वह लड़की दरवाजे से अंदर आई तो रोशनी उसके पीछे थी। यह सीन बहुत फिल्मी था। रणभूमि की रानी में ऐसे दृश्य उपहार बहुत मिलते हैं। उसके प्रवेश से ही लग गया कि अब खेल बदलेगा। निर्देशन बहुत शानदार है। कैमरा कोण भी कहानी को बेहतर बताते हैं।

अंत का सस्पेंस

आखिर में वह कमांडर क्यों हंसा था जब वह लड़की चिल्ला रही थी। यह सस्पेंस बनाए रखता है। रणभूमि की रानी की हर कड़ी एक नया सवाल छोड़ जाती है। मैं अगला भाग कब आएगा इसका इंतजार कर रहा हूं। कहानी बहुत गहरी होती जा रही है। नेटशॉर्ट ऐप पर यह श्रृंखला जरूर देखें।