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रणभूमि की रानी

अराजक गणराज्य काल में चन्द्रावती संघ की प्रमुख बबिता राठौड़ विश्वासघात का शिकार होकर भी साहस से उभरती है। राघव मेहता और सोनल चौहान की साज़िशों का सामना करते हुए वह अपने पिता वीरेंद्र सिंह राठौड़ से मिलती है। विक्रम राठौड़ और शत्रु शक्तियों के षड्यंत्रों का पर्दाफाश कर, वह राजेश्वरी देवी के साथ मिलकर चन्द्रावती संघ को पुनर्जीवित करती है और अंततः सेनापति बनकर राष्ट्र की रक्षा करती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

अंत की हंसी ने रूह कंपा दी

अंत में बूढ़ी महिला की हंसी ने रूह कंपा दी। उसे सब पता था। रणभूमि की रानी में तनाव बहुत बढ़िया है। उसके गले में मोती हिंसा के विपरीत लग रहे थे। यह दृश्य बताता है कि शक्ति किसके पास है। देखने का अनुभव शानदार रहा। हर पल में संदेह बना रहता है। काले कोट वाले का चेहरा देखने लायक था। रात का अंधेरा और चांदनी सही संतुलन बनाती है। यह कहानी आगे क्या होगी जानने को मन करता है। हर कोई इंतजार कर रहा था।

बंदूक वाली युवती का जज्बात

बंदूक वाली युवती की आंखों में आग है। चेहरे पर खून लेकिन हाथ स्थिर। रणभूमि की रानी में मजबूत महिला पात्र दिखाए गए हैं। उस चिट्ठी ने सब बदल दिया। उसका गुस्सा साफ दिख रहा था। रात का दृश्य और नदी का किनारा माहौल बनाता है। यह कहानी आगे क्या होगी जानने को मन करता है। भूरे कोट वाली लड़की बहुत बहादुर लग रही थी। उसकी पकड़ में डर नहीं था। नदी का पानी शांत था। हवा में सनसनी थी।

चिट्ठी ने बदली किस्मत

वह चिट्ठी मोड़ने वाला पल था। आदमी का चेहरा पढ़ते ही बदल गया। रणभूमि की रानी में राज हमेशा विस्फोटक होते हैं। रात का सेटिंग रहस्य जोड़ता है। काले कपड़े वाले व्यक्ति को झटका लगा। कागज के टुकड़े ने सबकी किस्मत बदल दी। ऐसा लग रहा था कि समय रुक गया है। मूंछों वाले का गुस्सा हवा हो गया। चिट्ठी पर लिखे शब्दों ने सब बदल दिया। सब चुप थे। सन्नाटा छा गया था।

चांदनी रात का खूबसूरत दृश्य

चांदनी रात का दृश्य खूबसूरत लेकिन घातक है। पथरीला रास्ता, नदी, परछाइयां। रणभूमि की रानी में रोशनी का उपयोग बेहतरीन है। आप स्क्रीन के जरिए ठंडी हवा महसूस कर सकते हैं। पात्रों की चुप्पी शोर से ज्यादा बोलती है। यह दृश्य सिनेमाई गुणवत्ता से भरा हुआ है। बादल और चांद का नज़ारा डरावना है। पत्थर की दीवार पुरानी लगती है। हवा चल रही थी। ठंडक महसूस हो रही थी।

अभिनय शीर्ष स्तर का

काले कपड़े वाले व्यक्ति को लगा वह नियंत्रण में है। कागज आते ही उसका गुस्सा चौंक में बदल गया। रणभूमि की रानी का अभिनय शीर्ष स्तर का है। मूंछें गुस्से से हिल रही थीं। उसकी आंखों में विश्वास टूट रहा था। यह संघर्ष केवल शब्दों का नहीं था। चेहरे के भाव बहुत गहरे थे। उसने कागज को ध्यान से पढ़ा। सबकी सांसें रुकी हुई थीं। माहौल गंभीर था। कोई नहीं बोला।

बूढ़ी महिला असली मालिक

जैसे ही सब खत्म लगा, वह हंसी। बूढ़ी महिला असली मालिक है। रणभूमि की रानी आपको अनुमान लगाते रखता है। वह हंसी मुझे सता रही है। उसकी आंखों में आंसू थे फिर भी हंसी। यह पागलपन या राहत थी। दर्शक के रूप में मैं हैरान रह गया। लाल कोट वाली महिला रहस्यमयी है। उसकी हंसी में दर्द छिपा था। अंत बहुत अप्रत्याशित था। सब हैरान थे। कोई समझ नहीं पाया।

सिपाही की चुप्पी

सिपाही भी हिला नहीं, बेहतर जानता था। यहां पदानुक्रम स्पष्ट है। रणभूमि की रानी के विवरण तेज हैं। वर्दी प्रामाणिक लगती है। नीली वर्दी वाले ने चुप रहना बेहतर समझा। पृष्ठभूमि में सैन्य उपस्थिति दबाव बढ़ाती है। यह छोटा विवरण कहानी को गहरा करता है। बंदूक की नली सीधी थी। कोई हिलना नहीं चाहता था। माहौल में तनाव था। सब देख रहे थे। कोई हिला नहीं।

आंखों में आंसू और हंसी

बूढ़ी महिला की आंखों में आंसू थे हंसी से पहले। जटिल भावनाएं। रणभूमि की रानी दुख को अच्छे से संभालता है। पारिवारिक नाटक खतरे के साथ मिला। उसका लाल कोट ध्यान खींचता है। गले के मोती उसकी हैसियत दिखाते हैं। हर अभिव्यक्ति में कहानी छिपी है। चेहरे की झुर्रियों में अनुभव दिखता है। वह सब कुछ झेल चुकी है। उसकी आंखें नम थीं। दर्द साफ था।

बदले की आग

खून के बावजूद बंदूक स्थिर पकड़ी। उसे न्याय या बदला चाहिए। रणभूमि की रानी के तनावपूर्ण दृश्य बेहतरीन हैं। हाथ नहीं कांप रहे थे। भूरे कोट वाली लड़की दृढ़ संकल्पित है। उसकी नजर में डर नहीं था। यह साहस की कहानी लगती है। चेहरे पर खून की बूंदें दिख रही थीं। उसने पीछे नहीं हटना चाहा। सबकी नजरें उस पर थीं। वह डटी रही। कोई आगे नहीं आया।

ऐतिहासिक नाटक सटीक

ऐतिहासिक नाटक सही तरीके से बना है। पोशाक, संवाद वितरण, चुप्पी। रणभूमि की रानी देखने लायक है। अंत आपको और चाहता है। देखने का अनुभव अच्छा है। रात का माहौल रहस्यमयी है। पात्रों के बीच की दूरी तनाव दिखाती है। पुराने जमाने की कहानी लगती है। संस्कृति और कपड़े सही हैं। यह दृश्य दिल पर असर करता है। सब कुछ सटीक था। बारीकियां ध्यान देने लायक हैं।