इस दृश्य में भावनाओं का बाढ़ सा आ गया है जब मुखौटा उतरा और असली चेहरा सामने आया तो रोंगटे खड़े हो गए। रणभूमि की रानी में ऐसे मोड़ देखकर दिल दहल जाता है। माँ और बेटी का मिलन बहुत ही दर्दनाक और सुंदर था। आंसू रोकना नामुमकिन हो गया इस सीन को देखकर। कलाकारों ने जान डाल दी है। हर पल दिल धड़क रहा था।
खलनायक का किरदार बहुत ही खतरनाक लग रहा था। चाकू की नोक पर जान थी लेकिन हिम्मत नहीं टूटी। रणभूमि की रानी की कहानी में ऐसा रहस्य पहले नहीं देखा। गांव का माहौल और खतरे का साया बहुत अच्छे से दिखाया गया है। हर पल तनाव बना हुआ था जो अंत में जाकर राहत में बदला। सबकी सांसें रुक गई थीं।
भूरे कोट वाली लड़की की आंखों में दर्द साफ दिख रहा था। उसने अपनी जान की परवाह नहीं की। रणभूमि की रानी में महिलाओं का साहस बार बार सामने आता है। बांह पर निशान देखकर पुरानी कहानी याद आ गई। यह निशान सब कुछ बता रहा था बिना कहे। बहुत गहराई है इस कार्यक्रम में। सच्चाई सामने आ गई।
कपड़ों की सजावट और मंच की सजावट बहुत शानदार है। पुराने जमाने का अहसास होता है देखकर। रणभूमि की रानी में हर बारीकी पर ध्यान दिया गया है। मखमली कोट पहनी औरत बहुत सख्त लग रही थी। लेकिन अंत में सच्चाई सामने आ ही गई। ऐसे निर्माण को देखकर मजा आ जाता है दर्शकों को। बहुत खूबसूरत लगा।
कहानी में कई सवाल खड़े हो गए हैं इस कड़ी में। क्यों छिपाया गया था चेहरा इतने दिनों तक। रणभूमि की रानी की कहानी में कई परतें हैं जो धीरे धीरे खुल रही हैं। गांव की मिट्टी और रिश्तों की डोर बहुत मजबूत दिखाई दी। अगली कड़ी कब आएगी इसका इंतजार है सबको। रहस्य बना हुआ है।
अभिनय इतना असली लगा कि लगा मैं वहीं मौजूद हूं। रोने वाले दृश्य में बहुत दम था जो दिल को छू गया। रणभूमि की रानी में भावनाओं को बहुत अच्छे से पिरोया गया है। गले मिलने वाला दृश्य बहुत यादगार बन गया है। ऐसे पल ही तो हम देखने के लिए बैठते हैं पर्दे के सामने। दिल खुश हो गया।
तनाव का माहौल शुरू से अंत तक बना रहा। छतरी का गिरना एक संकेत था खतरे का। रणभूमि की रानी में छोटी छोटी चीजें बड़ा मतलब रखती हैं। खलनायक के चेहरे के भाव भी बहुत खतरनाक थे। लेकिन अच्छाई की जीत हुई इस बार। ऐसे नाटक देखकर ही सुकून मिलता है आजकल। बहुत रोमांचक था।
रिश्तों की कीमत इस कार्यक्रम में बहुत अच्छे से दिखाई गई है। मां के लिए बेटी का संघर्ष देखकर आंखें नम हो गईं। रणभूमि की रानी में परिवार का बंधन सबसे ऊपर है। चोट का निशान देखकर पुराने दर्द की याद ताजा हो गई। यह कहानी सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि एक संदेश भी देती है। दिल को छू लिया।
कैमरे की पकड़ और रोशनी का इस्तेमाल बहुत कमाल का था। धुंधला माहौल और साफ चेहरे का अंतर अच्छा लगा। रणभूमि की रानी की तकनीकी टीम भी बहुत मेहनती है। जब कपड़ा हटा तो रोशनी चेहरे पर पड़ी बहुत सुंदर तरीके से। ऐसे दृश्य देखकर अनुभव और भी बेहतर हो जाता है। नजारा देखने लायक था।
अंत में जो शांति मिली वह पहले के तनाव के बाद जरूरी थी। दोनों का एक दूसरे को सहारा देना बहुत प्यारा लगा। रणभूमि की रानी में उम्मीद की किरण हमेशा बनी रहती है। यह दृश्य हमेशा याद रहेगा दर्शकों के दिलों में। ऐसे पल ही तो इस कार्यक्रम को खास बनाते हैं सबके लिए। बहुत प्यारा लगा।