जब वो मास्क पहने आदमी बैट लेकर आया, तो लगा कि अब सब खत्म हो गया। लेकिन उसकी आंखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी चमक थी। संगीत की रानी में ऐसे ट्विस्ट देखकर दिल धड़कने लगता है। वो सूट वाला आदमी कितना घबराया हुआ था, और फिर भी बात करने की कोशिश कर रहा था। ये डायलॉग और एक्सप्रेशन का खेल कमाल का है।
जब उसने सूट वाले के हाथ टेबल पर रखवाए, तो मेरी भी सांस अटक गई। ऐसा लगा कि अब उंगलियां टूट जाएंगी। लेकिन फिर वो औरत आ गई और सब बदल गया। संगीत की रानी में ऐसे सीन्स देखकर लगता है कि हर पल कुछ नया होने वाला है। डर और सस्पेंस का ऐसा मिश्रण कहीं नहीं मिलता।
उस औरत की चीख सुनकर लगता है जैसे वो खुद दर्द महसूस कर रही हो। उसका डर इतना असली था कि मैं भी घबरा गई। संगीत की रानी में ऐसे इमोशनल मोमेंट्स ही तो कहानी को जिंदा रखते हैं। वो सूट वाला आदमी भी कितना बेचारा था, सब उसे पकड़कर रखे थे।
वो आदमी जो बिजनेस सूट में था, उसकी हालत देखकर तरस आ गया। कागजात हाथ में लिए खड़ा था और फिर अचानक सब कुछ बदल गया। संगीत की रानी में ऐसे किरदार ही तो कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उसकी आंखों में सवाल थे, लेकिन जवाब कोई नहीं दे रहा था।
वो मास्क वाले आदमी कुछ बोल नहीं रहे थे, बस आंखों से सब कुछ कह रहे थे। उनकी चुप्पी सबसे ज्यादा डरावनी थी। संगीत की रानी में ऐसे साइलेंट मोमेंट्स ही तो असली डर पैदा करते हैं। जब वो बैट लेकर आया, तो लगा कि अब कुछ भी हो सकता है।