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सुनहरी आँखेंवां46एपिसोड

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सुनहरी आँखें

एक जीवित रहने का विशेषज्ञ विमान दुर्घटना के बाद सात साल के बच्चे के रूप में फिर से जन्म लेता है। उसे "बहु-आपदा पलायन" नामक जीवन-मरण के खेल में फँसना पड़ता है – वह अपने परिवार के साथ सब आपदाओं को पार कर ही असली दुनिया में लौट सकता है। उसमें सुनहरी आँखें जागती हैं – जो अतीत देख सकें और भविष्य जान सकें। साथ ही उसे हजारों मील दूर देखने और दूर की आवाज़ें सुनने की शक्ति भी मिलती है। हजारों फीट ऊपर उड़ान में वह हादसे की चेतावनी देता है, पर कोई नहीं मानता। जब दाहिना पंख फटता है, तब सब चौंक जाते हैं। एक
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इस एपिसोड की समीक्षा

बच्चे की शक्ति

इस धारावाहिक सुनहरी आँखें में वह पल जब लड़के की आँखें पीली चमकने लगती हैं सच में दिल दहला देता है। गुफा के अंदर मोमबत्तियों की रोशनी में रहस्य गहरा लग रहा था और हर कोने में डर था। वैज्ञानिक की घबराहट साफ़ दिख रही थी जब सैनिक ने उसे पकड़ लिया। हर कोई जानना चाहता है कि आखिर इस बच्चे में है क्या खास जो सब उसे पाना चाहते हैं। यह रहस्य बहुत गहरा है और जानलेवा भी हो सकता है।

गुफा का नज़ारा

मंदिर जैसे इस स्थान की रचना बहुत ही शानदार बनाई गई है। हजारों दीये जल रहे थे और बुद्ध की मूर्तियां हर तरफ थीं जो शांति देती थीं। सुनहरी आँखें कहानी में यह जगह किसी खजाने से कम नहीं लगती। जब लड़के ने रस्सी पकड़ कर छलांग लगाई तो सांस रुक गई। ऐसे साहसिक कार्य देखने का मज़ा ही अलग है और दिल की धड़कन बढ़ जाती है। सेट बहुत सुंदर है।

वैज्ञानिक का डर

सफेद कोट पहने उस बूढ़े व्यक्ति के चेहरे पर डर साफ़ झलक रहा था। सैनिक ने जब उसका गला पकड़ा तो वह कांपने लगा और मदद के लिए चिल्लाया। सुनहरी आँखें धारावाहिक में किरदारों के बीच का तनाव बहुत अच्छे से दिखाया गया है। लगता है वैज्ञानिक को इस बच्चे के बारे में कुछ ऐसा पता है जो वह किसी को नहीं बताना चाहता। राज बहुत हैं और खतरनाक हैं।

खतरनाक जाल

अचानक दीवारों से नुकले बाहर आने लगे तो सबकी हालत खराब हो गई। लड़का घायल हो गया फिर भी उसने हार नहीं मानी और लड़ता रहा। सुनहरी आँखें में ऐसे मोड़ बार बार देखने को मिलते हैं जो हैरान कर देते हैं। जब खून बह रहा था तब भी उसकी आँखों में चमक बनी रही। यह जिद्द ही उसे बाकियों से अलग बनाती है और जीत दिलाती है। बहुत रोमांचक है।

सैनिक की गलती

काले कपड़ों वाले सैनिक को लगा वह सब नियंत्रण कर सकता है पर वह गलत था। उसकी गोली भी उस बच्चे का कुछ नहीं बिगाड़ पाई और वह चूक गया। सुनहरी आँखें की कहानी में कमजोर दिखने वाला बच्चा ही असली ताकतवर है। जब वह हथियार उठाता है तो माहौल पूरी तरह बदल जाता है। देखने वाले हैरान रह जाते हैं और तालियां बजती हैं। सब डर गए।

रहस्यमयी चमक

लड़के की आँखों में जो सुनहरी रोशनी थी वह किसी जादू से कम नहीं लग रही थी। सुनहरी आँखें धारावाहिक का नाम भी शायद इसी वजह से रखा गया है। जब वह दर्द में था तब भी उसकी नज़रें नहीं चूकीं और दुश्मनों को देखा। ऐसा लग रहा था जैसे वह सब कुछ देख सकता है जो हम नहीं देख पाते। बहुत ही अनोखा विचार है जो पसंद आया। आँखें जादूई हैं।

भागने का रास्ता

ऊपर से रस्सी लटक रही थी और लड़के ने बिना सोचे समझे उसे पकड़ लिया। हवा में लटकते हुए उसने वार किया जो बहुत ही खतरनाक था। सुनहरी आँखें में ऐसे साहसिक दृश्य बहुत ही अच्छे लगते हैं। नीचे खड़े सैनिक बस देखते ही रह गए। यह बच्चा साधारण नहीं है बल्कि किसी शक्तिशाली योद्धा से कम नहीं है। सब डर गए और हैरान रह गए।

खून के निशान

जब लड़के के कान और मुंह से खून निकलने लगा तो दिल बहुत दुखी हुआ। पर उसने रुकना नहीं चाहा और आगे बढ़ता गया। सुनहरी आँखें में भावनाओं के साथ संघर्ष का अच्छा मिश्रण है। दर्द के बावजूद वह लड़ता रहा। यह दृश्य बताता है कि जीतने के लिए कितनी कुर्बानी देनी पड़ती है। बच्चे का अभिनय बहुत प्रभावशाली है। दिल छू गया।

बुद्ध की मूर्ति

पीछे बड़ी सी बुद्ध की मूर्ति थी जो सब कुछ शांत भाव से देख रही थी। सुनहरी आँखें के मंच सजावट पर बहुत मेहनत की गई है। इतनी बड़ी गुफा और उसके अंदर की हर छोटी चीज़ बारीकी से बनाई गई है। जब धुआं फैला तो माहौल और भी डरावना हो गया। ऐसे दृश्य बड़े पर्दे पर देखने जैसे लगते हैं। बहुत सुंदर है और भव्य लगता है।

अंत की उम्मीद

इस कड़ी के अंत में लड़के की आँखें फिर से चमक उठीं। सुनहरी आँखें कहानी आगे क्या मोड़ लेगी यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। वैज्ञानिक और सैनिक दोनों अब मुश्किल में हैं। बच्चे की शक्ति का असली रूप अभी बाकी है। अगला भाग देखने के लिए हम सब बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। जल्दी आना चाहिए और रोमांच बढ़ना चाहिए।