जब काले कपड़े वाला योद्धा नीली ऊर्जा से भर गया तो पूरा मैदान कांप उठा! उसकी आंखों में गुस्सा और ताकत दोनों साफ दिख रहे थे। सामने खड़ा साधारण कपड़ों वाला लड़का बिल्कुल शांत खड़ा था, मानो उसे पता हो कि क्या होने वाला है। जानिटर का शक्तिशाली मुक्का में ऐसे दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यह लड़ाई सिर्फ मुक्कों की नहीं, बल्कि दो अलग-अलग दुनियाओं के टकराव जैसी लग रही थी।
अचानक आसमान से एक विशाल सुनहरा अंडा गिरा और उसमें से एक शक्तिशाली आकृति निकली! यह दृश्य इतना अप्रत्याशित था कि दर्शक भी हैरान रह गए। काले कपड़े वाले योद्धा के चेहरे पर डर साफ झलक रहा था, जबकि वह लड़का अभी भी मुस्कुरा रहा था। जानिटर का शक्तिशाली मुक्का की कहानी में यह मोड़ सबसे रोमांचक था। ऐसा लग रहा था जैसे कोई प्राचीन शक्ति जाग उठी हो।
पीछे बैठे बूढ़े गुरु का चेहरा बिल्कुल शांत था, मानो वे सब कुछ जानते हों। उनकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वे इस लड़ाई के अंत को देख चुके हों। जब काले कपड़े वाला योद्धा घायल हुआ, तो गुरु ने बस एक बार सिर हिलाया। जानिटर का शक्तिशाली मुक्का में ऐसे पात्र कहानी को गहराई देते हैं। उनकी मौजूदगी ही एक अलग तरह का तनाव पैदा कर रही थी।
सफेद कपड़ों वाली लड़की की आंखों में चिंता साफ दिख रही थी। वह बार-बार उस लड़के की तरफ देख रही थी जो शांत खड़ा था। उसके हाथ कांप रहे थे, मानो वह कुछ कहना चाहती हो लेकिन डर रही हो। जानिटर का शक्तिशाली मुक्का में ऐसे भावनात्मक पल कहानी को और भी दिलचस्प बना देते हैं। उसकी चुप्पी में भी एक कहानी छिपी हुई थी।
काले कपड़े वाले योद्धा का गुस्सा इतना तीव्र था कि हवा में भी तनाव महसूस हो रहा था। उसने अपनी पूरी ताकत इकट्ठा की और एक जोरदार हमला किया। लेकिन सामने वाला लड़का बिल्कुल नहीं हिला। जानिटर का शक्तिशाली मुक्का में ऐसे दृश्य दिखाते हैं कि असली ताकत शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक होती है। उस योद्धा की नाकामी उसकी जल्दबाजी का नतीजा थी।