शुरुआत में ही काले कपड़ों वाले शख्स की नीली ऊर्जा देखकर लगा कि वह जीत जाएगा, लेकिन सफेद कुर्ते वाले ने एक ही वार में उसे गिरा दिया। जानिटर का माइटि फिस्ट में यह मोड़ बहुत शानदार था। जब वह जमीन पर गिरा और मुंह से खून निकला, तब लगा कि कहानी में गहराई है। फिर उसने लाल गोली खाकर जो ताकत हासिल की, वह दृश्य रोंगटे खड़े करने वाला था।
काले लिबास में बैठे उस बूढ़े आदमी की मुस्कान में एक अलग ही रहस्य था। जब युद्ध हो रहा था, तो वह बस मुस्कुरा रहे थे, जैसे उन्हें पहले से पता हो कि अंत क्या होगा। जानिटर का माइटि फिस्ट के इस दृश्य में उनकी मौजूदगी ने माहौल को और भी गंभीर बना दिया। उनकी आंखों में एक चमक थी जो बता रही थी कि असली खेल तो अब शुरू हुआ है।
जब हारा हुआ योद्धा जमीन पर पड़ा था और उसने अपनी हथेली में लाल गोली देखी, तो लगा कि अब कुछ बड़ा होने वाला है। उसने उसे निगला और उसके बाद उसका शरीर लाल रोशनी से जलने लगा। जानिटर का माइटि फिस्ट में यह दृश्य प्रभाव कमाल का था। उसकी आंखें लाल हो गईं और चेहरे पर एक खूंखार भाव आ गया, जो दर्शकों को बांधे रखने के लिए काफी था।
भले ही वह सादे धूसर कपड़ों में था, लेकिन उसकी मुट्ठियों में जो दम था, वह किसी के पास नहीं था। उसने बिना किसी दिखावे के अपने दुश्मन को धराशायी कर दिया। जानिटर का माइटि फिस्ट में यह संदेश बहुत अच्छे से दिया गया है कि असली ताकत कपड़ों में नहीं, हुनर में होती है। उसका शांत खड़ा रहना और फिर अचानक वार करना, एक्शन का बेहतरीन नमूना था।
युद्ध के मैदान में खड़ी वह लड़की, जिसके बाल लटों में बंधे थे, उसका चेहरा सब कुछ बता रहा था। वह डरी हुई थी लेकिन वहीं खड़ी रही। जानिटर का माइटि फिस्ट में उसकी प्रतिक्रिया बहुत स्वाभाविक लगा। जब काले कपड़ों वाला शख्स लाल ताकत से उठा, तो उसकी आंखों में डर और हैरानी दोनों साफ दिख रहे थे, जो कहानी को भावपूर्ण बनाता है।
काले कोट वाले शख्स का अहंकार जब टूटा और वह जमीन पर गिरा, तो लगा कि कहानी खत्म हो गई। लेकिन फिर उसने जो लाल शक्ति चुनी, वह उसकी हार नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत थी। जानिटर का माइटि फिस्ट में यह किरदार बहुत जटिल है। उसका बार-बार उठना और गुस्से में चिल्लाना दर्शाता है कि वह हार मानने वालों में से नहीं है, चाहे उसे कितनी भी चोट क्यों न लगे।
इस लड़ाई का मंच किसी प्राचीन मंदिर जैसा लग रहा था, जिसने पूरे दृश्य को एक ऐतिहासिक अहसास दिया। पीछे दिख रहे स्तंभ और नक्काशीदार दीवारें जानिटर का माइटि फिस्ट के माहौल को और भी गहरा कर रही थीं। जब ये पात्र लड़ रहे थे, तो ऐसा लग रहा था जैसे हम किसी पुरानी किताब के पन्नों को जीवित होते हुए देख रहे हों। मंच सज्जा पर बहुत मेहनत साफ झलक रही है।
वह सफेद कुर्ता पहने युवक जो कुर्सी पर बैठा था, उसने पूरे युद्ध के दौरान कुछ खास नहीं कहा, बस मुस्कुराता रहा। जानिटर का माइटि फिस्ट में उसकी यह चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। ऐसा लग रहा था कि वह सब जानता है और बस तमाशबीन बना हुआ है। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक थी जो बता रही थी कि वह कोई साधारण पात्र नहीं है।
जब उस हारे हुए योद्धा ने अपनी हथेली में चमकती हुई लाल गोली देखी और उसे निगल लिया, तो स्क्रीन पर एक अलग ही ऊर्जा आ गई। जानिटर का माइटि फिस्ट में यह जादुई तत्व कहानी को आगे बढ़ाता है। उस गोली को निगलते ही उसके शरीर में जो बदलाव आए और लाल धुआं निकला, वह दृश्य रूप से बहुत शानदार था और दर्शकों को अगले दृश्य के लिए तैयार करता है।
दोनों योद्धाओं के बीच जब पहली बार टकराव हुआ, तो नीली और लाल ऊर्जा का मिलन देखने लायक था। जानिटर का माइटि फिस्ट में एक्शन दृश्यों की कोरियोग्राफी बहुत तेज और सटीक है। कोणों ने इस लड़ाई को और भी नाटकीय बना दिया है। जब एक गिरता है और दूसरा खड़ा रहता है, तो उस पल की तनावपूर्ण खामोशी सबसे बेहतरीन थी।