जब वो काले कोट वाला शख्स अपनी ताकत से लोहे की जंजीरें तोड़ता है, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जानिटोर का मैटी फिस्ट में एक्शन का जो स्तर दिखाया गया है, वो सच में लाजवाब है। सूट वाले विलेन की घबराहट और हीरो का गुस्सा, दोनों का संतुलन बहुत अच्छा बना है। ये दृश्य बताता है कि असली ताकत हथियारों में नहीं, इंसान के हौसले में होती है।
सूट पहने हुए उस आदमी का चेहरा देखने लायक था जब उसके गुंडे एक-एक करके गिर रहे थे। जानिटोर का मैटी फिस्ट की कहानी में ये मोड़ बहुत दमदार है जहां हीरो अपनी साथी को बचाने के लिए टूट पड़ता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन देखना सुकून देता है क्योंकि यहाँ डायलॉग कम और एक्शन ज्यादा होता है, जो दर्शकों को बांधे रखता है।
जमीन पर गिरी हुई उस लड़की की आंखों में दर्द और उम्मीद दोनों साफ दिख रहे थे। जानिटोर का मैटी फिस्ट में भावनात्मक पलों को बहुत खूबसूरती से पिरोया गया है। हीरो का उसे बचाने के लिए आगे आना और फिर विलेन से पंगा लेना, ये सब कुछ बहुत तेजी से होता है। ऐसे सीन देखकर लगता है कि न्याय की जीत जरूर होती है, बस थोड़ा इंतजार करना पड़ता है।
वो नीला चश्मा पहनकर विलेन जो स्कैन करता है, वो टेक्नोलॉजी का कमाल लगता है। जानिटोर का मैटी फिस्ट में पुराने जमाने के मार्शल आर्ट्स और भविष्य की टेक्नोलॉजी का मिश्रण बहुत अनोखा है। हीरो जब उस टेक्नोलॉजी को भी मात दे देता है, तो मजा दोगुना हो जाता है। ये शो साबित करता है कि कहानी अगर मजबूत हो, तो कोई भी जादू काम कर सकता है।
चांदी वाले सूट पहने गुंडों का हीरो के सामने टिकना नामुमकिन था। जानिटोर का मैटी फिस्ट के एक्शन सीन्स में जो रफ्तार है, वो सांस रोक देती है। एक के बाद एक गुंडे गिरते जाते हैं और हीरो का जोश बढ़ता जाता है। ऐसे दृश्य देखकर मन में एक अलग ही उत्साह आता है कि बुराई का अंत अच्छाई के हाथों ही होना चाहिए।