उस लाल लोमड़ी की आँखों में जो चालाकी थी, वो किसी साधारण जानवर की नहीं लग रही थी। जब वो उस लड़की के पास खड़ी थी, तो लगा जैसे वो उसकी रक्षा कर रही हो। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे पशु साथी के पल बहुत ही प्यारे हैं। उस लोमड़ी की पूंछ से निकलती आग किसी जादू जैसी लग रही थी।
जब कमांडर ने अपना हाथ मुट्ठी में बंद किया, तो पूरे मंच पर एक अजीब सा तनाव छा गया। उसकी आँखों में जो गुस्सा था, वो किसी बड़े फैसले की ओर इशारा कर रहा था। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे पल बहुत ही तनावपूर्ण हैं। उसकी हर हरकत से लग रहा था कि अब कुछ बड़ा होने वाला है।
जब उस सफेद बालों वाले लड़के ने मुस्कुराते हुए भीड़ की ओर देखा, तो कुछ छात्र डर गए तो कुछ उत्सुक हो गए। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे रिएक्शन बहुत ही असली लगते हैं। हर किसी के चेहरे पर अलग-अलग भाव थे, जो इस बात का सबूत था कि अब कुछ बड़ा होने वाला है।
उस सूर्यास्त की रोशनी में जब पूरा मैदान सुनहरी रोशनी में नहाया हुआ था, तो माहौल बहुत ही खूबसूरत लग रहा था। लेकिन उस खूबसूरती के पीछे छिपा खतरा साफ दिख रहा था। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे विजुअल्स बहुत ही शानदार हैं। उस रोशनी में सब कुछ अलग ही लग रहा था।
वो लड़का जिसके बाल चांदी जैसे चमक रहे थे, उसकी मुस्कान के पीछे छिपा खतरा साफ दिख रहा था। जब उसके पीछे आग का शेर प्रकट हुआ, तो पूरी भीड़ सन्न रह गई। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे पल बार-बार दिल की धड़कन बढ़ा देते हैं। उसकी आँखों में जो चमक थी, वो किसी साधारण छात्र की नहीं लग रही थी।
जब कमांडर ने अपना हाथ उठाया, तो पूरी भीड़ में सन्नाटा छा गया। छात्रों के चेहरों पर डर और उत्सुकता का अजीब मिश्रण था। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ के इस सीन में हर किसी की सांसें रुकी हुई थीं। कोई कुछ बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा था, बस उस मंच की ओर देख रहा था जहाँ से कुछ भी हो सकता था।
उस लड़की की नीली आँखों में जो उदासी थी, वो शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। जब उसने उस सफेद बालों वाले लड़के की ओर देखा, तो लगा जैसे वो कुछ कहना चाहती हो लेकिन कह नहीं पा रही हो। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे इमोशनल पल बहुत गहराई से दिखाए गए हैं। उसकी खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी।
मंच के दोनों ओर खड़े उन कवचधारी योद्धाओं की आँखों में जो नारंगी चमक थी, वो किसी इंसान की नहीं लग रही थी। जब उन्होंने अपने भाले ऊपर उठाए, तो लगा जैसे वो हमला करने वाले हों। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे डरावने पल बहुत अच्छे से दिखाए गए हैं। उनकी खामोशी सबसे ज्यादा डरावनी थी।
उस बड़े फव्वारे के बीच में जो मूर्ति थी, उससे निकलती नीली रोशनी किसी जादू जैसी लग रही थी। जब कमांडर ने उसकी ओर इशारा किया, तो लगा जैसे वो किसी पुराने रहस्य को खोलने वाला हो। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे विजुअल्स बहुत ही शानदार हैं। उस फव्वारे के आसपास की हवा में कुछ अलग ही था।
काली वर्दी पहने उस कमांडर की आँखों में जो सख्ती थी, वो सीधे दिल पर वार करती है। जब उसने मंच से भीड़ को संबोधित किया, तो माहौल में एक अजीब सी गंभीरता छा गई। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ देखते हुए लगा कि यह सिर्फ एक भाषण नहीं, बल्कि किसी बड़े युद्ध की शुरुआत है। उसकी आवाज़ में जो दम था, उसने सबको चुप करा दिया।