इस पूरे ड्रामे में बच्ची का चेहरा सबसे ज्यादा दर्दनाक था। वह सब कुछ समझ रही थी लेकिन कुछ कह नहीं पा रही थी। बिना पते की माफ़ी शायद उस बच्ची के लिए भी था जो अपने माता-पिता के झगड़े देख रही थी। उसकी आँखों में डर और उलझन साफ दिखाई दे रही थी।
पुरुष का गुस्सा देखकर लगता है कि वह अपने दर्द को छुपा रहा है। लेकिन क्या गुस्से से सब कुछ ठीक हो जाता है? बिना पते की माफ़ी शायद उस गुस्से के पीछे छिपे दर्द का नाम था। महिला की मजबूरी और बच्ची का डर सब कुछ और भी जटिल बना देता है।
क्या कभी सोचा है कि माफ़ी मांगना कितना मुश्किल होता है? इस वीडियो में महिला शायद माफ़ी मांगने आई थी लेकिन उसे मौका नहीं मिला। बिना पते की माफ़ी शायद उसी की कहानी थी। पुरुष का रवैया और दूसरी महिला की चुप्पी सब कुछ और भी दर्दनाक बना देती है।
रिश्ते टूटते हैं तो कैसे टूटते हैं, यह इस वीडियो में साफ दिखाया गया है। एक छोटी सी गलतफहमी और सब कुछ खत्म। बिना पते की माफ़ी शायद उन टूटे रिश्तों का ही नाम था। महिला के आंसु और पुरुष का गुस्सा सब कुछ और भी जटिल बना देता है।
इस दृश्य में दर्द की जो गहराई दिखाई गई है वह दिल को झकझोर देती है। महिला के आंसु और पुरुष का गुस्सा सब कुछ कह जाता है। बिना पते की माफ़ी शायद उस दर्द का ही नाम था जो शब्दों में बयां नहीं हो पा रहा था। बच्ची का डरा हुआ चेहरा सब कुछ और भी दर्दनाक बना देता है।