जब मॉनिटर सीधी लकीर दिखाता है, तो लगता है जैसे सब कुछ खत्म हो गया हो। माँ का रोना और चीखना बहुत ही दर्दनाक है। बिना पते की माफ़ी की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा तनावपूर्ण है। यह दृश्य दर्शकों को भी झकझोर देता है और रूला देता है।
हरे स्वेटर वाली माँ की आँखों में जो दर्द है, वह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। जब वह अपनी बेटी के पास जाती है, तो लगता है जैसे समय थम गया हो। बिना पते की माफ़ी की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा प्रभावशाली है। उसकी चीख और रोना हर किसी के दिल को छू लेता है।
पति और दूसरी महिला के साथ बेटी को ले जाते देखना बहुत दर्दनाक है। माँ का अकेलापन और टूटना साफ दिख रहा है। बिना पते की माफ़ी जैसे विषय पर यह दृश्य बहुत गहराई से बात करता है। अस्पताल के गलियारे में उसकी चीखें गूंज रही हैं, जो दर्शकों को भी झकझोर देती हैं।
बेटी के चेहरे पर चोटें और खून देखकर दिल दहल जाता है। वह इतनी मासूम है कि उसे कुछ समझ नहीं आ रहा। बिना पते की माफ़ी की कहानी में यह बच्ची सबसे ज्यादा दर्द झेल रही है। माँ का उसे सहलाना और रोना बहुत ही भावुक कर देने वाला है।
अस्पताल के नीले कमरे और मॉनिटर की आवाज़ ने एक डरावना माहौल बना दिया है। जब मॉनिटर सीधी लकीर दिखाता है, तो सांस रुक जाती है। बिना पते की माफ़ी जैसे नाटक में यह दृश्य सबसे ज्यादा तनावपूर्ण है। माँ की चीखें और बेटी की बेजान देह देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।