शुरुआत में गुलाबी साड़ी वाली महिला बहुत मासूम लग रही थी, लेकिन जैसे-जैसे बात बढ़ी, उसके चेहरे के भाव बदलने लगे। वह बच्ची को ढाल बनाकर बचने की कोशिश कर रही थी, पर सच्चाई सामने आ ही गई। जब हथकड़ी लगी, तो उसकी आंखों में डर साफ दिख रहा था। यह दृश्य दिल दहला देने वाला था।
काली टोपी पहने युवक के चेहरे पर हैरानी और दर्द दोनों साफ झलक रहे थे। वह शायद इस धोखे का हिस्सा नहीं था, या फिर वह भी फंस चुका था। जब पुलिस आई, तो वह कुछ बोल नहीं पाया, बस खड़ा रहा। उसकी चुप्पी सब कुछ कह रही थी। बिना पते की माफ़ी मांगने का कोई मौका नहीं मिला उसे।
जब उस छोटी बच्ची ने अपनी मां को हथकड़ी में देखा, तो उसका रोना दिल को चीर गया। वह समझ नहीं पा रही थी कि अचानक सब कुछ कैसे बदल गया। उसकी मां उसे छोड़कर जा रही थी, और वह कुछ नहीं कर सकती थी। यह दृश्य देखकर आंखें नम हो गईं। बच्ची की मासूमियत सबसे बड़ी पीड़ा थी।
जब पुलिस ने हथकड़ी लगाई, तो उस धातु की आवाज़ ने पूरे माहौल को बदल दिया। गुलाबी साड़ी वाली महिला की सारी चालाकी धरी की धरी रह गई। सफेद सूट वाली महिला ने बिना एक शब्द कहे सब कुछ ठीक कर दिया। यह दृश्य इतना तीव्र था कि सांस रुक गई। बिना पते की माफ़ी अब बेमानी हो गई थी।
सफेद सूट वाली महिला ने शुरू से ही सब कुछ प्लान किया हुआ था। उसने कार्ड दिखाकर गुलाबी साड़ी वाली महिला को फंसाया, और फिर पुलिस को बुलाया। उसका चेहरा भावनाओं से रहित था, जैसे वह किसी नाटक की निर्देशक हो। उसकी चालाकी और ठंडक देखकर डर लग रहा था।