बेटी की कब्र पर खड़ी माँ का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। बिना पते की माफ़ी में यह सीन सबसे ज्यादा इमोशनल है। उसकी आंखों में आंसू और चेहरे पर गुस्सा दोनों साफ दिख रहे थे। वह अपने दर्द को छिपा नहीं पा रही थी और सबके सामने रो पड़ी। यह माँ का प्यार और दर्द दोनों था।
जब वह घुटनों पर गिर गया, तो लगा जैसे उसकी दुनिया ही खत्म हो गई हो। बिना पते की माफ़ी में यह सीन सबसे ज्यादा दर्दनाक है। उसकी आंखों में पछतावा और डर दोनों साफ दिख रहे थे। वह माफ़ी मांग रहा था, लेकिन शायद अब बहुत देर हो चुकी थी। कभी-कभी माफ़ी मांगने से भी कुछ नहीं होता।
सबकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। बिना पते की माफ़ी में यह सीन सबसे ज्यादा रहस्यमयी है। कोई कुछ बोल नहीं रहा था, लेकिन सबकी आंखें सब कुछ कह रही थीं। शायद सब कुछ जानते थे लेकिन बोल नहीं सकते थे। यह चुप्पी सबसे ज्यादा डरावनी लग रही थी।
कब्रिस्तान और बारिश का यह सीन बहुत ही उदास कर देने वाला है। बिना पते की माफ़ी में यह माहौल सबसे ज्यादा इमोशनल है। कब्रों के बीच खड़े होकर यह झगड़ा जैसे मौत को भी रुला दे। हर किरदार का चेहरा उदास और टूटा हुआ लग रहा था। यह सीन दिल को छू लेता है और आंसू निकाल लेता है।
बेटी की कब्र पर खड़ी माँ का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उसने जो वीडियो दिखाया, वह किसी भी इंसान को हिला देगा। बिना पते की माफ़ी में यह सीन सबसे ज्यादा इमोशनल है। पति का बहाने बनाना और पत्नी का चुप रहना सब कुछ कह जाता है। कभी-कभी सच्चाई इतनी कड़वी होती है कि उसे स्वीकार करना नामुमकिन हो जाता है।