इस शो के दृश्य देखकर मैं दंग रह गया। अंडे से ड्रैगन का निकलना और फिर वो आग का गोला, सब कुछ जादूई लग रहा था। खलनायक का अष्टभुज वाला रूप काफी डरावना था। मछली बनी ड्रैगन में ऐसे सीन देखना सच में दुर्लभ है। रंगों का इस्तेमाल और रोशनी ने इसे सिनेमाई बना दिया है। हर झलक एक चित्र जैसी लग रही थी।
एक्शन सीन्स की बात करें तो ड्रैगन और अष्टभुज राक्षस की लड़ाई देखते ही बनती थी। बिजली कड़कना और फिर वो बर्फ का जादू, सब कुछ बहुत तेजी से हुआ। मछली बनी ड्रैगन की कहानी में यह ट्विस्ट काफी रोमांचक था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि पानी के अंदर इतनी भयंकर लड़ाई होगी। सस्पेंस बना रहा।
मत्स्य कन्याओं को बचाने वाला सीन दिल को छू गया। जब वो जंजीरों से आजाद हुईं तो उनकी राहत साफ दिख रही थी। ड्रैगन का रवैया बहुत सुरक्षात्मक था। मछली बनी ड्रैगन में भावनात्मक पल भी अच्छे से दिखाए गए हैं। खलनायक की हार के बाद का शांति वाला माहौल बहुत सुकून देने वाला था।
खलनायक का डिजाइन बहुत यूनिक था, अष्टभुज जैसा चेहरा और काला कवच। उसकी लाल आंखें देखकर डर लग रहा था। लेकिन ड्रैगन की ताकत के आगे वह कुछ भी नहीं था। मछली बनी ड्रैगन में खलनायक की एंट्री और फिर उसका अंत बहुत ड्रामेटिक था। ऐसे किरदार कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
ड्रैगन के सुनहरे रंग और चमकदार तराजू ने मुझे मंत्रमुग्ध कर दिया। जब उसने अपनी आंखें खोलीं तो लगा जैसे सूरज निकल आया हो। मछली बनी ड्रैगन में क्रिएचर डिजाइन पर बहुत मेहनत की गई है। उसकी हरकतें इंसान जैसी नहीं बिल्कुल जानवर जैसी थीं, जो असली लगता था।
जादू की दुनिया बहुत विस्तृत लग रही थी। बर्फ का घन बनना और फिर दुश्मनों का जम जाना, यह शक्ति प्रणाली काफी दिलचस्प थी। मछली बनी ड्रैगन में ऐसे जादुई तत्व कहानी को गहराई देते हैं। मुझे यह देखकर अच्छा लगा कि नायक अपनी शक्तियों का सही इस्तेमाल करता है।
कहानी की रफ्तार बहुत तेज थी, एक पल अंडा था और दूसरे पल ड्रैगन दुश्मनों को हरा रहा था। बोरियत का नामोनिशान नहीं था। मछली बनी ड्रैगन की कड़ियों में यह तेजी दर्शकों को बांधे रखती है। चरमोत्कर्ष पर पहुंचते ही सांसें रुक गई थीं। बहुत बढ़िया संपादन था।
गुफा का माहौल और पानी के अंदर की रोशनी बहुत रहस्यमयी थी। नीले और सुनहरे रंगों का कॉम्बिनेशन आंखों को अच्छा लग रहा था। मछली बनी ड्रैगन की छायांकन ने इस काल्पनिक दुनिया को जीवंत बना दिया है। मैं इस दुनिया में और अधिक समय बिताना चाहूंगा।
ड्रैगन का किरदार बहुत शक्तिशाली लेकिन दयालु था। उसने कमजोरों की मदद की और बुराई को सबक सिखाया। मछली बनी ड्रैगन में नायक की यह परिभाषा बहुत पुरानी और अच्छी है। जब उसने खलनायक को देखा तो उसकी आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। असली नायक यही कहलाता है।
कुल मिलाकर यह एक शानदार काल्पनिक साहसिक कहानी थी। हर सीन में कुछ नया देखने को मिला। मछली बनी ड्रैगन ने मेरी उम्मीदों पर खरा उतरा है। नेटशॉर्ट ऍप पर ऐसे शो देखना बहुत सुकून देता है। मैं अगली कड़ी का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं कि आगे क्या होता है।