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वह पुरुष है?वां1एपिसोड

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वह पुरुष है?

एक साल से शादीशुदा थे। नायिका बार-बार नजदीकियों से बचती, उसकी मेडिकल रिपोर्ट में गड़बड़ थी, घर में अजीब चीज़ें मिलीं – नायक को उसके लिंग पर शक होने लगा। नए साल से पहले नायिका उसे अपने गाँव ले गई। वहाँ साँप जैसी मछलियाँ और भयानक माहौल देखकर उसे लगा कि यहाँ बड़ा खतरा है...
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इस एपिसोड की समीक्षा

फार्मेसी की बेचैनी

आदित्य सिंघानिया की चिंता देखकर दिल दहल गया। फार्मेसी में वो जो पल गुज़ारे, उसमें एक अजीब सी बेचैनी थी। क्लब के शोर के बीच आराध्या वर्मा का नृत्य देखकर लगा कि कहानी में कुछ छिपा है। वह पुरुष है? वाला सवाल बार बार दिमाग में आ रहा है। सुबह की नींद खुलने पर जो हैरानी थी, वो बयां नहीं की जा सकती। बहुत गहराई है इस कहानी में।

नीयन लाइट्स का जादू

नीयन लाइट्स के बीच आराध्या वर्मा का अंदाज़ लाजवाब था। आदित्य सिंघानिया जब दवाई लेते हैं, तो लगता है कि वो किसी दबाव में हैं। वह पुरुष है? देखकर ही समझ आता है कि रिश्तों की यह कहानी कितनी पेचीदा है। टूटा हुआ कांच और सुबह का फोन कॉल सब कुछ बदल देता है। एक्टिंग बहुत स्वाभाविक लगी।

गुलाबी रंग का रहस्य

क्लब का माहौल और फिर बेडरूम का वो गुलाबी रंग, सब कुछ बहुत प्रतीकात्मक लगता है। आदित्य सिंघानिया की आंखों में जो डर था, वो साफ दिख रहा था। आराध्या वर्मा के साथ के सीन्स में एक अलग ही लगाव है। वह पुरुष है? का मोड़ देखकर चौंक जाना तय है। सुबह उठकर फोन पर जो बात हुई, उसने सब पलट दिया।

शुरुआती संकेत

शुरुआत में ही आदित्य सिंघानिया के चेहरे पर परेशानी साफ थी। फार्मेसी का वो सीन बहुत अहम लगता है कहानी में। आराध्या वर्मा का किरदार बहुत मजबूत दिखाया गया है। वह पुरुष है? में जो रहस्य है, वो धीरे धीरे खुलता है। टूटी हुई बोतल और सुबह की घबराहट देखकर लगता है कि कुछ गड़बड़ जरूर है।

आराध्या की एंट्री

आराध्या वर्मा की एंट्री ही कुछ ऐसी थी कि सबकी नज़रें उन पर थीं। आदित्य सिंघानिया जब फोन पर बात कर रहे थे, तो उनकी आवाज़ में घबराहट साफ थी। वह पुरुष है? देखने के बाद लगता है कि यह कहानी सिर्फ प्यार नहीं, कुछ और भी है। रंगों का इस्तेमाल बहुत खूबसूरती से किया गया है हर सीन में।

भीड़ में अकेलापन

क्लब में भीड़ के बीच वो अकेलापन आदित्य सिंघानिया के चेहरे पर साफ था। आराध्या वर्मा के साथ के पल बहुत तीव्र थे। वह पुरुष है? का सवाल हर मोड़ पर नया रूप ले लेता है। सुबह उठकर जो भ्रम था, वो दर्शकों को भी महसूस हुआ। डायलॉग कम लेकिन भाव बहुत ज्यादा बोलते हैं इसमें।

दवाई का डिब्बा

दवाई का डिब्बा देखकर ही कहानी का रुख समझ आने लगा। आदित्य सिंघानिया का अभिनय बहुत वास्तविक लगा। आराध्या वर्मा का स्टाइल और अंदाज़ सबको पसंद आएगा। वह पुरुष है? में जो मोड़ हैं, वो सोचने पर मजबूर कर देते हैं। गुलाबी रोशनी वाले सीन्स बहुत ही खूबसूरती से शूट किए गए हैं।

कुत्ते वाला संकेत

कुत्ते वाले आदमी का सीन भी कुछ इशारा कर रहा था शायद। आदित्य सिंघानिया और आराध्या वर्मा के बीच की दूरी और नज़दीकियां दिलचस्प हैं। वह पुरुष है? देखकर लगता है कि हर किसी के राज होते हैं। सुबह की घबराहट और फोन कॉल ने कहानी को नया मोड़ दिया। बहुत ही रोचक लगी यह कहानी।

तेज़ रफ़्तार कहानी

फार्मेसी से लेकर क्लब तक का सफर बहुत तेज़ था। आदित्य सिंघानिया की घबराहट देखकर सहानुभूति होती है। आराध्या वर्मा का किरदार बहुत रहस्यमयी लगा। वह पुरुष है? में जो भावनात्मक परतें हैं, वो बहुत गहरे हैं। टूटा कांच और बिखरे सपने, सब कुछ बहुत अच्छे से दिखाया गया है इस धारावाहिक में।

अंतिम हैरानी

अंत में जो हैरानी आदित्य सिंघानिया के चेहरे पर थी, वो लाजवाब थी। आराध्या वर्मा के साथ की कहानी में कई राज छिपे हैं। वह पुरुष है? का हर भाग नई जानकारी देता है। बेडरूम के सीन्स और सुबह की कहानी में बहुत विरोधाभास है। देखने वाले को यह जरूर पसंद आएगी।