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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मतवां54एपिसोड

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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत

वीर सिंह जेल से जल्दी रिहा होकर भाई ध्रुव और भाभी प्रिया के साथ लौटा। रास्ते में अनिका रेड्डी की कार से टक्कर हो गई। अनिका ने पचास हज़ार रुपये की माँग कर दी। तारा को हॉस्पिटल पहुँचाने के लिए वीर रुक गया। उसने अनिका और उसके साथियों को हराया और उनका सहायक यश मल्होत्रा को बुलवाया। यश ने प्रिया को मुआवज़ा माँगा, जिससे वीर भड़क गया। फिर अर्जुन राठौर अपने लोगों के साथ आया। वीर ने अकेले ही सबको हरा दिया। तभी चेयरमैन शौर्य मल्होत्रा ने वीर को पहचानकर उसकी मदद की
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इस एपिसोड की समीक्षा

सत्ता का नया समीकरण

भूरे सूट वाला नेता बहुत गंभीर लग रहा है। उसकी आँखों में गुस्सा साफ दिख रहा है। लाल कार्पेट पर खड़े सभी लोग डरे हुए हैं। काले कोट वाला लड़का बिना डरे सामने खड़ा है। यह टकराव बहुत तेज है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसा माहौल पहले नहीं देखा। फूलों वाली शर्ट वाला व्यक्ति जमीन पर गिर गया। सबकी सांसें रुक सी गई हैं। कोई भी कुछ बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा है। यह सत्ता का खेल बहुत खतरनाक साबित हो रहा है। सबको अपनी औकात का अहसास हो गया है।

काले कोट का रौब

काले कोट वाले व्यक्ति की हिम्मत देखकर हैरानी हुई। उसने बिना किसी डर के चुनौती स्वीकार की। चाकू दिखाते ही सबकी हालत खराब हो गई। लाल रंग का कार्पेट खून जैसा लग रहा है। पीछे खड़े गुंडे कुछ बोल नहीं पा रहे। इस कहानी में हर पल नया मोड़ आ रहा है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी बहुत रोचक है। किसी की हिम्मत नहीं हुई आगे बढ़ने की। सब चुपचाप तमाशा देख रहे हैं। यह दृश्य बहुत ही रोमांचक बना है। सबकी नजरें एक ही जगह टिकी हैं।

घमंड का अंत

फूलों वाली शर्ट वाला व्यक्ति पहले बहुत घमंडी लग रहा था। फिर अचानक वह घुटनों पर गिर गया। काले कोट वाले ने उसे सबक सिखाया। पैर से सिर कुचलने वाला दृश्य बहुत कड़वा था। सभी लोग चुपचाप तमाशा देख रहे हैं। सत्ता की यह लड़ाई खतरनाक है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसा बदलाव अच्छा लगा। नेता की कुर्सी खतरे में पड़ गई है। अब सबको डर लगने लगा है। कोई भी आगे नहीं आ रहा है। सबकी हालत खराब हो गई है।

भव्य सेट डिजाइन

लकड़ी की इमारत बहुत पुरानी और भव्य लग रही है। पीछे बने ड्रैगन का निशान ताकत दिखाता है। चारों तरफ लालटेन जल रही हैं। माहौल में तनाव साफ झलक रहा है। काले कोट वाला अकेला सब पर भारी पड़ रहा है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत का सेट डिजाइन कमाल का है। हर कोने में खतरा छिपा हुआ है। दर्शक को बांधे रखने के लिए यह काफी है। बहुत ही शानदार दृश्य है। सबकी नजरें एक ही जगह टिकी हैं। माहौल बहुत गंभीर है।

एक्शन का तड़का

चाकू निकालते ही सबकी नींद खुल गई। काले कोट वाले ने बहुत फुर्ती दिखाई। उसने हमलावर को पलक झपकते ही पछाड़ दिया। लाल कार्पेट पर गिरा हुआ व्यक्ति दर्द से कराह रहा है। यह एक्शन दृश्य बहुत तेज था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में एक्शन की कमी नहीं है। हर किसी को अपनी औकात याद दिला दी गई। सबको डर लग रहा है। कोई भी बीच में नहीं आया। यह ताकत का प्रदर्शन है। सब स्तब्ध खड़े हैं।

नेता की चुप्पी

चश्मे वाला नेता चुपचाप सब देख रहा है। उसे अपनी ताकत पर बहुत घमंड है। लेकिन काले कोट वाले ने उसकी धज्जियां उड़ा दीं। सब लोग हैरान होकर देख रहे हैं। कोई भी बीच में बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा। यह सत्ता का खेल बहुत गंदा है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में यह पल सबसे बेहतरीन है। बदलाव की हवा चल रही है। सबको सच्चाई का पता चल गया है। बहुत ही जबरदस्त पल है। सब डर रहे हैं।

अकेला पड़ गया

पीछे खड़े सभी लोग सूट बूट में हैं। सबके चेहरे पर डर साफ दिख रहा है। कोई भी आगे नहीं आ रहा मदद के लिए। फूलों वाली शर्ट वाला अकेला पड़ गया है। काले कोट वाले का रौब सब पर छा गया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी में यह ट्विस्ट है। ताकतवर को भी डर लगने लगा है। सबकी हालत खराब हो गई है। कोई भी कुछ नहीं बोल रहा है। सन्नाटा छा गया है। सबकी सांसें थमी हुई हैं।

जीत का जश्न

लाल कार्पेट पर गिरने की आवाज गूंज गई। सबकी नजरें जमीन पर टिक गई हैं। काले कोट वाला बहुत शांत खड़ा है। उसे किसी का डर नहीं है। यह उसकी ताकत को दिखाता है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसा किरदार नया है। उसकी आँखों में आग साफ दिख रही है। सबको सबक मिल गया है। अब कोई भी उससे पंगा नहीं लेगा। सब डर के मारे कांप रहे हैं। यह जीत का पल है। सबको याद रहेगा।

नाटकीय मोड़

यह दृश्य बहुत ही नाटकीय लग रहा है। हर किसी के चेहरे पर अलग भाव हैं। कोई डरा है, कोई गुस्से में है। काले कोट वाला सबसे अलग लग रहा है। उसने सबको चुनौती दी है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत का यह भाग हिट है। कहानी आगे क्या मोड़ लेगी देखना होगा। सबकी सांसें थमी हुई हैं। कोई भी हिल नहीं रहा है। सब स्तब्ध खड़े हैं। यह बहुत बड़ा बदलाव है। सब हैरान हैं।

सन्नाटे की गूंज

पूरा हॉल सन्नाटे में डूब गया है। पहले शोर था अब चुप्पी है। काले कोट वाले ने सबको चुप करा दिया। नेता की कुर्सी हिलने लगी है। यह अंत की शुरुआत हो सकती है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसा अंत उम्मीद नहीं था। सबको अपनी गलती का अहसास हो गया है। बहुत जबरदस्त दृश्य है। सबको सबक मिल गया है। अब सब डर रहे हैं। यह नया अध्याय है। सब देख रहे हैं।