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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मतवां58एपिसोड

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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत

वीर सिंह जेल से जल्दी रिहा होकर भाई ध्रुव और भाभी प्रिया के साथ लौटा। रास्ते में अनिका रेड्डी की कार से टक्कर हो गई। अनिका ने पचास हज़ार रुपये की माँग कर दी। तारा को हॉस्पिटल पहुँचाने के लिए वीर रुक गया। उसने अनिका और उसके साथियों को हराया और उनका सहायक यश मल्होत्रा को बुलवाया। यश ने प्रिया को मुआवज़ा माँगा, जिससे वीर भड़क गया। फिर अर्जुन राठौर अपने लोगों के साथ आया। वीर ने अकेले ही सबको हरा दिया। तभी चेयरमैन शौर्य मल्होत्रा ने वीर को पहचानकर उसकी मदद की
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इस एपिसोड की समीक्षा

खतरे की घंटी

काले कोट वाले युवक की आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। जब उसने टेबल के नीचे छिपा बटन दबाया, तो बुजुर्ग व्यक्ति की हालत खराब हो गई। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसा ट्विस्ट उम्मीद नहीं था। सफेद पोशाक वाली महिला बंधी हुई थी, पर युवक ने उसे बचाया। सैनिकों के आने से माहौल और तनावपूर्ण हो गया। हर पल में सस्पेंस बना हुआ है। ये दृश्य बहुत ही शानदार लगा।

बदले की आग

बुजुर्ग व्यक्ति को लगा था वो सुरक्षित हैं, पर काले कोट वाले युवक ने सब पलट दिया। फोन दिखाकर उसने सच्चाई उजागर की। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी में धोखा और वफादारी दोनों हैं। सफेद पोशाक वाली महिला की आंखों में डर साफ था। जब बंदूकें तानी गईं, तो सांसें रुक गईं। बेहतरीन एक्टिंग देखने को मिली। कहानी बहुत गहरी है।

सस्पेंस का खेल

लकड़ी की पुरानी इमारत में ये मुठभेड़ बहुत खतरनाक लग रही थी। काले कोट वाले युवक ने बुजुर्ग व्यक्ति को टेबल पर झुका दिया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में एक्शन सीन्स जबरदस्त हैं। सफेद पोशाक वाली महिला को रस्सियों से बांधा गया था, पर आखिर में आजादी मिली। वर्दी वाले लोगों की एंट्री ने खेल बदल दिया। देखते रह जाओगे। बहुत रोमांचक है।

गद्दारी का अंत

बुजुर्ग व्यक्ति के चेहरे पर हैरानी देखने लायक थी। काले कोट वाले युवक ने बिना डरे सब कुछ प्लान किया था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में हर किरदार अपनी जगह सही है। सफेद पोशाक वाली महिला की मदद के लिए युवक आगे आया। जब गोलियां चलने वाली थीं, तभी सब रुका। क्लाइमेक्स बहुत धमाकेदार होने वाला है। मजा आ गया।

खूनी खेल

टेबल पर रखे चाय के कप भी इस तनाव का हिस्सा लग रहे थे। काले कोट वाले युवक ने बुजुर्ग व्यक्ति को सबक सिखाया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में डायलॉग बहुत तेज हैं। सफेद पोशाक वाली महिला चुपचाप सब देख रही थी। वर्दी वाले लोगों ने घेर लिया, पर युवक नहीं घबराया। ये सीन बार बार देखने को मजबूर करता है। शानदार प्रस्तुति।

मौत का साया

बुजुर्ग व्यक्ति की गर्दन पर पड़ी माला भी अब बेकार लग रही थी। काले कोट वाले युवक का गुस्सा सातवें आसमान पर था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में इमोशनल ड्रामा भी है। सफेद पोशाक वाली महिला को छुड़ाने की कोशिश जारी थी। जब बंदूकें सामने आईं, तो लग गया कुछ बड़ा होने वाला है। हर फ्रेम में जान है। दिल दहला दिया।

आखिरी वार

काले कोट वाले युवक ने अपनी चालाकी से बुजुर्ग व्यक्ति को फंसाया। टेबल के नीचे छिपा बटन सब कुछ बदल गया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में प्लॉट बहुत मजबूत है। सफेद पोशाक वाली महिला की जान खतरे में थी। वर्दी वाले लोगों की एंट्री से कहानी में नया मोड़ आया। अब आगे क्या होगा, ये जानना जरूरी है। बेहद रोचक।

खामोश चीख

सफेद पोशाक वाली महिला की आंखों में आंसू थे, पर वो कुछ बोल नहीं पा रही थी। काले कोट वाले युवक ने बुजुर्ग व्यक्ति को जकड़ लिया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में सस्पेंस बना हुआ है। पुरानी इमारत का माहौल बहुत डरावना लग रहा था। जब वर्दी वाले लोग आए, तो सबकी सांसें थम गईं। ये सीन दिल दहला देने वाला है। बहुत पसंद आया।

खतरनाक इरादे

बुजुर्ग व्यक्ति को लगा था वो जीत गया है, पर काले कोट वाले युवक ने सब गलत साबित किया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में हर मोड़ पर हैरानी है। सफेद पोशाक वाली महिला को रस्सियों से आजाद किया गया। वर्दी वाले लोगों के निशाने पर सब थे। एक्शन और ड्रामा का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला। लाजवाब प्रदर्शन। बहुत अच्छा।

अंतिम सच्चाई

काले कोट वाले युवक ने फोन दिखाकर बुजुर्ग व्यक्ति को झटका दिया। चेहरे के भाव देखने लायक थे। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में राज खुलने वाले हैं। सफेद पोशाक वाली महिला की सुरक्षा अब युवक की जिम्मेदारी थी। वर्दी वाले लोगों ने घेर लिया, पर युवक डटा रहा। अंत कैसे होगा, ये देखने के लिए बेताब हूं। शानदार कहानी।