PreviousLater
Close

आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मतवां40एपिसोड

2.0K2.0K

आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत

वीर सिंह जेल से जल्दी रिहा होकर भाई ध्रुव और भाभी प्रिया के साथ लौटा। रास्ते में अनिका रेड्डी की कार से टक्कर हो गई। अनिका ने पचास हज़ार रुपये की माँग कर दी। तारा को हॉस्पिटल पहुँचाने के लिए वीर रुक गया। उसने अनिका और उसके साथियों को हराया और उनका सहायक यश मल्होत्रा को बुलवाया। यश ने प्रिया को मुआवज़ा माँगा, जिससे वीर भड़क गया। फिर अर्जुन राठौर अपने लोगों के साथ आया। वीर ने अकेले ही सबको हरा दिया। तभी चेयरमैन शौर्य मल्होत्रा ने वीर को पहचानकर उसकी मदद की
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

दुकान का तनावपूर्ण माहौल

दुकान में फोन पर बात करते हुए उसकी आंखों में चिंता साफ दिख रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ा राज खुलने वाला हो। जब वो दूसरे व्यक्ति को देखता है तो माहौल और भी तनावपूर्ण हो जाता है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत श्रृंखला का ये दृश्य दिल को छू लेता है। किरदारों के बीच की खामोशी शोर मचा रही है। दर्शक भी इसी तरह बेचैन हो जाता है।

लाल किताब का राज

सोफे पर बैठी दोनों युवतियों के चेहरे पर गंभीरता साफ झलक रही थी। लाल रंग की किताब क्या राज छिपाए हुए है ये जानने की उत्सुकता बढ़ती जा रही है। एक की आंखों में आंसू तो दूसरी की आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे पल बहुत देखने को मिलते हैं। कहानी में गहराई है। हर संवाद मायने रखता है।

चाय और सत्ता का खेल

चाय की मेज पर बैठे बूढ़े व्यक्ति का रौबदार अंदाज देखते ही बनता है। वो जो चाय पी रहे हैं वो साधारण चाय नहीं लग रही थी। सामने खड़ा युवक उनके हुक्म का इंतजार कर रहा था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी में ये सत्ता का संतुलन बहुत अच्छा दिखाया गया है। पुराने जमाने का अहसास होता है। सत्ता का खेल चल रहा है।

दोहरी शख्सियत का खेल

चश्मे वाला व्यक्ति कभी दुकान पर घबराया हुआ था तो कभी सूट में सजा हुआ अलग ही शख्सियत लग रहा था। इस किरदार की दोहरी भूमिका ने कहानी में एक नया मोड़ दे दिया है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे मोड़ देखकर मजा आता है। हर दृश्य में कुछ नया छिपा हुआ है जो दर्शकों को बांधे रखता है। पहचान का सवाल है।

खामोश गुस्सा

जब वो युवक कमरे में दाखिल हुआ तो उसकी चाल में एक अलग ही गुस्सा था। बिना कुछ बोले ही उसने सबको बता दिया कि वो किसी बात से नाराज है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत के इस किरदार का अभिनय बहुत दमदार लग रहा है। चेहरे के हाव भाव से सब कुछ कह दिया गया है। खामोशी सबसे बड़ी चीख है।

रंगों का जादू

दृश्य की रोशनी और रंगों का इस्तेमाल बहुत ही खूबसूरत है। दुकान का साधारण माहौल और चाय वाले कमरे की शाही सजावट में जमीन आसमान का फर्क है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की दृश्य कथा बहुत मजबूत है। हर झलक को देखकर लगता है कि कोई चित्र देख रहे हों। नज़ारा बेमिसाल है।

डायरी के पन्ने

डायरी के पन्ने पलटते हुए हाथ कांप रहे थे। उसमें लिखे शब्द किसी बड़े खुलासे की तरफ इशारा कर रहे हैं। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ये छोटी छोटी चीजें बड़ा असर छोड़ती हैं। दर्शक भी उस नोटबुक को पढ़ने के लिए बेताब हो जाता है। रहस्य बना हुआ है। सच्चाई क्या है।

फोन की घंटी

फोन की घंटी बजते ही सबकी सांसें थम सी गईं। लैंडलाइन पर बात करते हुए उसकी आवाज में घबराहट साफ सुनाई दे रही थी। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में तनाव को ऐसे दिखाया गया है कि दर्शक भी बेचैन हो जाए। हर फोन किसी मुसीबत की खबर लाती है। डर का माहौल है।

रिश्तों की दरार

लग रहा है जैसे परिवार के बीच कोई बड़ा झगड़ा चल रहा हो। सब एक दूसरे से कुछ छिपा रहे हैं और सच्चाई सामने आने से डर रहे हैं। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी में ये भावनात्मक जुड़ाव बहुत अच्छा है। रिश्तों की बारीकियों को बहुत गहराई से दिखाया गया है। धोखा कहां है।

अगली कड़ी का इंतजार

अगली कड़ी कब आएगी इसका इंतजार बेसब्री से हो रहा है। कहानी किस मोड़ पर जाएगी ये कोई नहीं जानता। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत ने दर्शकों को अपने जाल में फंसा लिया है। हर दृश्य के बाद नया सवाल खड़ा हो जाता है। बहुत ही शानदार श्रृंखला है। अधूरापन है।