इस नाटक दीवार के पार दुश्मन में तनाव बहुत बढ़ गया है। वर्दी वाला अधिकारी फोन पर बात करते हुए बहुत परेशान दिख रहा है। उसे पता चल गया है कि कोई उसे धोखा दे रहा है। उसका चेहरा देखकर लगता है कि वह किसी बड़ी साजिश का शिकार हो गया है। आदित्य की हालत देखकर दिल दहल जाता है। वह बार बार सिर पकड़ता है। क्या उसे जहर दिया गया है? यह रहस्य बहुत गहरा है और दर्शकों को बांधे रखता है।
पहिए वाली कुर्सी पर बैठे व्यक्ति ने चुपके से फोन निकाला और संदेश भेजा। उसकी आंखों में चालाकी साफ दिख रही थी। दीवार के पार दुश्मन की कहानी में यह मोड़ बहुत जरूरी था। उसने क्या लिखा होगा? वर्दी वाले अधिकारी को बुलाया क्यों? यह सब एक योजना का हिस्सा लगता है। हमें अगले भाग का इंतजार है। कलाकारों का अभिनय बहुत दमदार है।
उसने कटोरी से मिठाई उठाई और खाई, लेकिन चेहरे पर दर्द साफ था। दीवार के पार दुश्मन में यह सीन बहुत सस्पेंस बनाता है। क्या उस मिठाई में कुछ मिला था? आदित्य को अचानक चक्कर आने लगे। वह संभल नहीं पा रहा था। घर में मौजूद महिला भी घबरा गई। यह दृश्य बहुत ही दिलचस्प तरीके से फिल्माया गया है। संगीत भी बहुत सही था।
फोन की स्क्रीन पर संदेश आया और सब बदल गया। दीवार के पार दुश्मन में तकनीक का इस्तेमाल कहानी को आगे बढ़ाता है। आदित्य ने फोन देखा और उसका होश उड़ गया। वह संदेश किसी जानलेवा साजिश की ओर इशारा करता है। लंबे बालों वाला शख्स भी इसमें शामिल लगता है। सब कुछ एक धागे से बंधा है। निर्देशन बहुत शानदार है।
हाथ से फोन छूटकर गिर गया, यह कमजोरी नहीं बल्कि झटका था। दीवार के पार दुश्मन में यह छोटा सा विवरण बहुत बड़ा संदेश देता है। वर्दी वाला अधिकारी अब अकेला पड़ गया है। उसे किसी पर भरोसा नहीं है। कमरे का माहौल बहुत भारी हो गया है। दर्शक भी अब सांस रोके देख रहे हैं कि आगे क्या होता है। कहानी बहुत रोचक है।
जब वह महिला कमरे में आई तो माहौल और तनावपूर्ण हो गया। दीवार के पार दुश्मन में हर किरदार की अहमियत है। उसने आदित्य को ऐसे देखा जैसे उसे कुछ शक हो गया हो। क्या वह भी इस खेल का हिस्सा है? या वह मदद करने आई है? यह सवाल अभी बना हुआ है। अभिनय बहुत लाजवाब है। मंच सज्जा भी अच्छी है।
आदित्य बार बार अपना सिर पकड़ रहा है, यह बीमारी नहीं लगती। दीवार के पार दुश्मन में यह संकेत है कि उसके दिमाग के साथ खेल हो रहा है। बाहर से सब ठीक है लेकिन अंदर से वह टूट रहा है। यह मानसिक यातना बहुत भयानक है। दर्शकों को यह एहसास होता है कि खतरा पास है। पटकथा बहुत मजबूत है।
काली टोपी और लंबे बालों वाला शख्स बहुत रहस्यमयी लग रहा है। दीवार के पार दुश्मन में वह विलेन हो सकता है। वह फोन पर कड़क आवाज में बात कर रहा था। उसकी हरकतें शक पैदा करती हैं। क्या वह आदित्य का दुश्मन है? यह पता लगाना बहुत मुश्किल हो रहा है। कहानी में उलझन बढ़ती जा रही है। रोशनी का खेल अच्छा है।
पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया है। दीवार के पार दुश्मन का यह सीन बहुत गहरा असर छोड़ता है। खिड़की से आती रोशनी और चेहरों पर छाया हुआ अंधेरा। यह दृश्य कथा बहुत अच्छी है। आदित्य की हालत देखकर लगता है कि अब बचाव मुश्किल है। हर पल कुछ नया खुल रहा है। संवाद बहुत प्रभावशाली हैं। छायांकन भी उत्कृष्ट है।
अब आदित्य क्या करेगा? दीवार के पार दुश्मन में अगला मोड़ बहुत अहम होने वाला है। उसने संदेश पढ़ लिया है और अब वह जानता है कि उसे घर बुलाया गया है। क्या वह जाएगा या पुलिस को बुलाएगा? यह फैसला सब कुछ बदल देगा। हमें बस यही देखना है कि अंत कैसे होता है। यह श्रृंखला बहुत पसंद आ रही है।