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दीवार के पार दुश्मनवां48एपिसोड

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दीवार के पार दुश्मन

आदित्य सिंह की पूरी फाल्कन टीम को ब्लैक टाइगर गैंग मार चुका है। सिर्फ आदित्य बचा। पंद्रह साल तक वह दुश्मन को ढूंढता रहा, पर कोई सुराग नहीं मिला। आत्महत्या करने से पहले वह सुनता है कि बगल की बेसमेंट में आवाज़ है, जहाँ सालों से कोई नहीं रहता। छुपकर देखने पर पता चलता है कि अंदर वही लोग हैं जिन्हें वह ढूंढ रहा था। अब आदित्य उन बुजुर्गों और साथियों के माता-पिता की रक्षा भी करना चाहता है और अपना बदला भी लेना चाहता है। वह दुश्मन को आपस में लड़ाता है, लेकिन क्या वह इन सबके बीच सबको बचा पाएगा?
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इस एपिसोड की समीक्षा

खूंखार विलेन का खौफनाक चेहरा

इस सीन में माहौल बहुत तनावपूर्ण है। व्हीलचेयर वाला शख्स अपनी मां-बाप को बचाने की कोशिश कर रहा है। सामने खड़ा सूट वाला व्यक्ति बहुत खतरनाक लग रहा है। दीवार के पार दुश्मन में ऐसे एक्शन सीन्स देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। दाग वाला आदमी की एक्टिंग जबरदस्त है।

बूढ़े मां-बाप की बेबसी

जब बुजुर्ग दंपत्ति डर के मारे कांप रहे थे, तो दिल दहल गया। व्हीलचेयर पर बैठे बेटे की आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। दीवार के पार दुश्मन की कहानी में परिवार की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन गई है। नेटशॉर्ट ऐप पर यह ड्रामा देखना लाजिमी है। बहुत इमोशनल सीन है।

एंटागोनिस्ट की ठंडी मुस्कान

काले सूट वाले लीडर की मुस्कान में बहुत छल है। वह बिना हिले ही धमकी दे रहा है। उसके गुंडे डंडे लेकर खड़े हैं। दीवार के पार दुश्मन में विलेनी का यह रूप बहुत प्रभावशाली लगा। व्हीलचेयर वाले हीरो की चुनौती बहुत बड़ी है। आगे क्या होगा देखने को उत्सुक हूं।

गोदाम का डरावना माहौल

पुराने फैक्ट्री का सेट बहुत असली लग रहा है। धूल और रोशनी का खेल कमाल का है। दीवार के पार दुश्मन की सिनेमेटोग्राफी ने सीन को और भी गहरा बना दिया है। गुंडों का घेरा देखकर लगता है कि अब बड़ा फाइट होने वाला है। काश हीरो जीत जाए।

बदले की आग में जलता हीरो

व्हीलचेयर पर बैठे शख्स की आंखों में बदले की आग साफ दिख रही है। वह अपनी कमजोरी को ताकत बना रहा है। दीवार के पार दुश्मन में यह किरदार बहुत मजबूत लगा। सामने खड़े दुश्मनों की संख्या ज्यादा है लेकिन हौसला नहीं टूटा है। यह जंग आसान नहीं होगी।

खूनी चेहरे वाला गुंडा

जिसके चेहरे पर जलने के निशान हैं, वह पागल कुत्ते की तरह भौंक रहा था। उसकी हरकतें बहुत हिंसक लग रही थीं। दीवार के पार दुश्मन में विलेन के गुंडों का किरदार निभाने वाले कलाकारों ने जान डाल दी है। सूट वाले बॉस का इशारा काफी है।

परिवार के लिए लड़ाई

जब मां-बाप सामने हों तो इंसान कुछ भी कर सकता है। व्हीलचेयर वाले बेटे ने अपनी परवाह नहीं की। दीवार के पार दुश्मन में परिवारिक भावनाओं को बहुत अच्छे से दिखाया गया है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन्स दिल को छू लेते हैं। बहुत भारी सीन था।

एक्शन से भरपूर झलक

डंडे लेकर खड़े गुंडे और व्हीलचेयर वाला हीरो। यह मुकाबला बहुत असमान लग रहा है। दीवार के पार दुश्मन में एक्शन के साथ-साथ इमोशन भी बराबर है। सूट वाले की एंट्री बहुत धांसू थी। आगे के एपिसोड का बेसब्री से इंतजार है। सस्पेंस बना हुआ है।

डायलॉग बाजी का खेल

यहां बातें कम और इशारे ज्यादा हो रहे हैं। सूट वाले की आवाज में ठंडक है। व्हीलचेयर वाले की आंखों में गर्मी है। दीवार के पार दुश्मन में संवादों का वजन बहुत भारी है। हर किरदार अपनी जगह सही लग रहा है। कहानी में गहराई है। हर डायलॉग मायने रखता है।

क्लाइमेक्स की ओर बढ़ते कदम

लग रहा है कि यह सीन किसी बड़े क्लाइमेक्स की शुरुआत है। सभी किरदार एक जगह जमा हो गए हैं। दीवार के पार दुश्मन की कहानी अब अपने मोड़ पर है। व्हीलचेयर वाला शख्स कैसे सबको संभालेगा देखना बाकी है। बहुत रोमांचक लग रहा है।