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दीवार के पार दुश्मनवां6एपिसोड

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दीवार के पार दुश्मन

आदित्य सिंह की पूरी फाल्कन टीम को ब्लैक टाइगर गैंग मार चुका है। सिर्फ आदित्य बचा। पंद्रह साल तक वह दुश्मन को ढूंढता रहा, पर कोई सुराग नहीं मिला। आत्महत्या करने से पहले वह सुनता है कि बगल की बेसमेंट में आवाज़ है, जहाँ सालों से कोई नहीं रहता। छुपकर देखने पर पता चलता है कि अंदर वही लोग हैं जिन्हें वह ढूंढ रहा था। अब आदित्य उन बुजुर्गों और साथियों के माता-पिता की रक्षा भी करना चाहता है और अपना बदला भी लेना चाहता है। वह दुश्मन को आपस में लड़ाता है, लेकिन क्या वह इन सबके बीच सबको बचा पाएगा?
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इस एपिसोड की समीक्षा

तनावपूर्ण शुरुआत

इस कार्यक्रम की तनावपूर्ण शुरुआत देखकर रोंगटे खड़े हो गए। व्हीलचेयर वाले शख्स का डर साफ दिख रहा था जब उस नक्शे की बात आई। दीवार के पार दुश्मन में ऐसे मोड़ उम्मीद से ज्यादा हैं। बच्ची की मासूमियत और खतरनाक योजना का मिलन बहुत गजब का है। हर सीन में एक नया सवाल खड़ा होता है।

महिला का रिएक्शन

महिला के चेहरे के भाव देखकर लगता है कि उसे सब पता चल गया है। उस नक्शे ने सब कुछ बदल दिया। दीवार के पार दुश्मन की कहानी में छिपा राज अब खुलने वाला है। कमरे का सुकून और तहखाने का डर एक दूसरे के विपरीत हैं। बहुत ही बेहतरीन अभिनय देखने को मिली।

बच्ची की मासूमियत

बच्ची को क्या पता कि वह किस खतरे को खेल रही है। उसने जो ड्राइंग बनाई वह असल में एक बड़ी योजना थी। दीवार के पार दुश्मन में परिवार के रिश्तों की परीक्षा हो रही है। पिता का डर और माँ का गुस्सा साफ झलक रहा है। आगे क्या होगा यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है।

तहखाने का राज

तहखाने का माहौल बहुत ही रहस्यमयी बनाया गया है। वहां छिपा हुआ नक्शा सबकी जिंदगी बदल सकता है। दीवार के पार दुश्मन में हर किरदार के पास एक राज है। जब महिला ने वह कागज उठाया तो सन्नाटा छा गया। ऐसे रोमांचक शो देखने का मजा ही अलग है।

खौफनाक सच

व्हीलचेयर पर बैठे व्यक्ति की आंखों में खौफ साफ दिख रहा था। उसे लगा था कि उसका राज छिपा रहेगा। दीवार के पार दुश्मन की कहानी बहुत मजबूत लग रही है। कपड़े सुखाती महिला को अचानक सब याद आ गया। यह मोड़ किसी को भी हैरान कर सकता है।

धीमी गति का जादू

कहानी में जो धीमी गति है वही सबसे बड़ी ताकत है। हर छोटी चीज पर ध्यान दिया गया है। दीवार के पार दुश्मन में रहस्य बनाए रखना आसान नहीं है। बच्ची का उस कागज को उठाना सबसे अहम पल था। अब सब कुछ उसी पर निर्भर करता है।

रिश्तों की दरार

कमरे का शांत माहौल अचानक डरावना हो गया। जब उसने वह नक्शा देखा तो सब बदल गया। दीवार के पार दुश्मन में रिश्तों की दरारें साफ दिख रही हैं। पति और पत्नी के बीच की खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। बहुत ही दमदार सीन है यह।

नया सवाल हर सीन में

इस कार्यक्रम में हर सीन के बाद एक नया सवाल मिलता है। वह नक्शा किसलिए था और क्यों छिपाया गया। दीवार के पार दुश्मन की योजना बहुत ही चतुराई से की गई है। बच्ची की वजह से सब कुछ बेनकाब होने वाला है। देखने वाले की सांसें रुक सकती हैं।

असली अभिनय

अभिनय इतनी असली लगी कि मैं भी उस कमरे में मौजूद महसूस करने लगा। व्हीलचेयर वाले का बेचैनी भरा चेहरा यादगार है। दीवार के पार दुश्मन में जज्बात और कार्रवाई का संतुलन है। महिला की प्रतिक्रिया देखकर लगता है कि अब बदला लेने की बारी है।

अंत का इंतजार

अंत में जो मोड़ मिला वह दिल को छू गया। अब अगली कड़ी का इंतजार नहीं हो रहा। दीवार के पार दुश्मन ने साबित कर दिया कि यह शो खास है। वह कागज का टुकड़ा अब सबूत बन चुका है। कहानी किस मोड़ पर जाएगी यह कोई नहीं जानता।