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वैद्य भी, योद्धा भीवां35एपिसोड

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वैद्य भी, योद्धा भी

परम योद्धा आरव सिंह अपने शुद्ध तेज शरीर के कारण नींव स्तर के शिखर पर अटका था। उसके गुरु साधक ने उसे उस लड़की को खोजने का आदेश दिया जिसके शरीर पर "रहस्यमयी निशान" हो, ताकि वह अपनी रुकावट तोड़ सके। गुरु ने उसकी गुरु बहनों को भी मदद करने भेजा। पहाड़ से उतरने की उसी रात, आरव की मुलाकात चंद्र ग्रुप की सीईओ तारा चंद्र से हुई। वह उसका बॉयफ्रेंड बन गया और उसकी सहेलियों की रक्षा करने लगा। अपनी चिकित्सा और युद्ध कला के दम पर, आरव ने दुश्मनों को मुँह की खाई और जिंदगी की सबसे ऊँची सीढ़ी पर पहुँच गया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

खाने की मेज पर तनाव

खाने की मेज पर यह तनाव बहुत गहरा लग रहा है। सब एक दूसरे को देख रहे हैं जैसे कोई राज खुलने वाला हो। नीले जैकेट वाली पात्र परेशान लग रही हैं। मुझे नेटशॉर्ट ऐप पर यह देखना बहुत पसंद आया। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में यह मोड़ बहुत जरूरी था। किरदारों के बीच की खामोशी शोर मचा रही है।

फैशन और कहानी

कपड़ों का चयन बहुत शानदार है। फिरोजी जैकेट और गुलाबी कोट सबका ध्यान खींच रहे हैं। हर किसी का लुक बहुत अमीराना है। बस यही नहीं, वैद्य भी, योद्धा भी में फैशन भी कहानी का हिस्सा बन गया है। मेज पर रखे बैग भी बहुत महंगे लग रहे हैं। सब कुछ इतना परिपूर्ण है।

फूलों वाला सरप्राइज

अंत में फूलों का गुलदस्ता देखकर सब हैरान रह गए। यह किसने भेजा होगा? चेहरों के भाव तुरंत बदल गए। क्या यह प्यार का इजहार है या कोई धमकी? वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे सस्पेंस बहुत अच्छे लगते हैं। मुझे अगला एपिसोड देखने की जल्दी है। यह दृश्य बहुत यादगार बन गया है।

शांत किरदार का राज

सफेद जैकेट वाला पात्र बहुत शांत है। सब तनाव में हैं पर वह मजे से खा रहा है। क्या वह इस सबका कारण है? उसकी मुस्कान में कुछ रहस्य छिपा है। वैद्य भी, योद्धा भी के किरदार बहुत गहरे हैं। मुझे उसकी भूमिका बहुत पसंद आ रही है। वह सब कुछ जानता हुआ लग रहा है।

तेज डायलॉग और माहौल

चेक वाले कोट वाला पात्र बहुत बोल रहा है। शायद वह कोई राज बता रहा है। बाकी सब ध्यान से सुन रहे हैं। डिनर पार्टी हमेशा खतरनाक होती है। वैद्य भी, योद्धा भी में यह डायलॉग बहुत तेज हैं। माहौल में बिजली सी कौंध रही है। सबकी नजरें एक दूसरे पर टिकी हैं।

खामोश पात्र की ताकत

गुलाबी कोट वाली पात्र बहुत शांत है। वह सब देख रही है पर कुछ बोल नहीं रही। शायद उसे सब कुछ पता है। उसकी खामोशी सबसे ज्यादा डरावनी है। वैद्य भी, योद्धा भी में महिला किरदार बहुत मजबूत हैं। मुझे उसकी एक्टिंग बहुत प्रभावशाली लगी। वह अपनी चाल चल रही है।

सेट डिजाइन की तारीफ

वाइन के ग्लास और खाने की सजावट बहुत सुंदर है। भूरे कोट वाला पात्र वाइन पी रहा है। वह कुछ सोच रहा है। माहौल में क्लास और तनाव दोनों हैं। वैद्य भी, योद्धा भी का सेट डिजाइन बहुत अच्छा है। हर चीज जगह पर रखी है। यह दृश्य सिनेमा जैसा लग रहा है।

रिश्तों की जटिलता

इतने सारे लोग एक मेज पर। सबके चेहरे अलग कहानी कह रहे हैं। कोई गुस्से में है, कोई खुश है। यह परिवार का मिलन या युद्ध है? वैद्य भी, योद्धा भी में रिश्तों की जटिलता दिखती है। मुझे यह डायनामिक्स बहुत पसंद आया। हर किसी का अपना एजेंडा है।

अंत का बड़ा मोड़

फूलों वाली गाड़ी जब अंदर आई तो सब चुप हो गए। यह इतना बड़ा गुलदस्ता था। नौकरानी उसे धकेल रही थी। सबकी सांसें रुक गईं। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे सरप्राइज बहुत अच्छे लगते हैं। मुझे नेटशॉर्ट ऐप पर यह सीरीज बहुत पसंद आ रही है। कहानी आगे क्या होगी।

यथार्थवादी ड्रामा

यह ड्रामा बहुत ही यथार्थवादी लग रहा है। संवाद बहुत तेज और चुभने वाले हैं। एक्टिंग में दम है। मैं पूरी तरह से इस कहानी में फंस गया हूं। वैद्य भी, योद्धा भी जरूर देखनी चाहिए। यह मनोरंजन से भरपूर है। हर एपिसोड में कुछ नया होता है।