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वैद्य भी, योद्धा भीवां72एपिसोड

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वैद्य भी, योद्धा भी

परम योद्धा आरव सिंह अपने शुद्ध तेज शरीर के कारण नींव स्तर के शिखर पर अटका था। उसके गुरु साधक ने उसे उस लड़की को खोजने का आदेश दिया जिसके शरीर पर "रहस्यमयी निशान" हो, ताकि वह अपनी रुकावट तोड़ सके। गुरु ने उसकी गुरु बहनों को भी मदद करने भेजा। पहाड़ से उतरने की उसी रात, आरव की मुलाकात चंद्र ग्रुप की सीईओ तारा चंद्र से हुई। वह उसका बॉयफ्रेंड बन गया और उसकी सहेलियों की रक्षा करने लगा। अपनी चिकित्सा और युद्ध कला के दम पर, आरव ने दुश्मनों को मुँह की खाई और जिंदगी की सबसे ऊँची सीढ़ी पर पहुँच गया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

तनावपूर्ण माहौल

इस कार्यक्रम का माहौल बहुत तनावपूर्ण है। काले कपड़े वाली महिला थोड़ी घबराई हुई लग रही है, जबकि नीली पोशाक वाली महिला बिल्कुल शांत खड़ी है। यह विरोधाभास बहुत दिलचस्प है। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में अब तक का सबसे बड़ा मोड़ आने वाला है। दर्शकों की प्रतिक्रियाएं भी इस बात का सबूत हैं कि कुछ बड़ा होने वाला है। मुझे यह देखना बहुत पसंद आ रहा है।

नीला सूट वाला राज

नीले सूट वाला व्यक्ति जब मंच की ओर बढ़ा, तो सबकी सांसें रुक गईं। उसकी चाल में एक अलग ही आत्मविश्वास था। क्या वह सचमुच सब कुछ बदल देगा? इस शो वैद्य भी, योद्धा भी में हर किरदार अपनी जगह महत्वपूर्ण है। उसकी आंखों में जो चमक थी, वह किसी योजना की ओर इशारा कर रही थी। मैं अगली कड़ी का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं।

लाल पोशाक का रहस्य

लाल पोशाक वाली महिला के चेहरे पर चिंता साफ झलक रही थी। क्या उसे पहले से इस साजिश के बारे में पता था? उसकी आंखों में डर और हैरानी दोनों थे। कहानी में यह मोड़ बहुत अच्छा लगा। इस मंच पर यह नाटक देखना मेरी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। हर दृश्य में नया रहस्य है। काश अगला भाग जल्दी आ जाए।

होस्ट की घबराहट

होस्ट के हाथ में जो फोल्डर था, वह किसी राज की कुंजी लग रहा था। उसे पकड़ने का तरीका बता रहा था कि वह घबराई हुई है। फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी। वैद्य भी, योद्धा भी के निर्माताओं ने बारीकियों पर बहुत ध्यान दिया है। हर छोटी हरकत मायने रखती है। यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जंग है। देखने में बहुत मजा आ रहा है।

बुजुर्ग की हैरानी

बुजुर्ग व्यक्ति का चेहरा देखकर हैरानी हुई। उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं। ऐसा लगा जैसे उन्होंने कोई भूत देख लिया हो। दर्शकों की प्रतिक्रियाएं बहुत वास्तविक हैं। इस शो में अभिनय की दाद देनी पड़ेगी। कोई भी संवाद बिना वजह नहीं है। सब कुछ एक बड़ी पहेली का हिस्सा है। मैं इस कहानी का दीवाना हो गया हूं।

रानी जैसी महिला

नीली गाउन वाली महिला मंच पर एक रानी की तरह खड़ी थी। उसे किसी की परवाह नहीं थी। उसका आत्मविश्वास देखते ही बनता था। वैद्य भी, योद्धा भी में मुख्य किरदार बहुत मजबूत है। वह चुनौतियों से नहीं घबराती। यह महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है। उसकी आंखों में जीत की चमक साफ दिख रही थी। बहुत ही शानदार प्रदर्शन है।

युद्ध का मैदान

लाल कार्पेट अब एक युद्ध के मैदान जैसा लग रहा था। दोनों तरफ खड़े लोग एक दूसरे को घूर रहे थे। माहौल में बिजली सी दौड़ रही थी। क्या यह सम्मेलन शांति से खत्म होगा? मुझे नहीं लगता। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी हमेशा रोमांचक रहती है। हर दृश्य के बाद नया मोड़ आता है। यह देखने लायक है।

चौंकाने वाला पल

भूरे सूट वाले व्यक्ति ने उंगली उठाकर सबको चौंका दिया। उसका भाव बहुत हास्यपूर्ण और चौंकाने वाला था। ऐसा लगा जैसे उसे अपनी आंखों पर यकीन न हो रहा हो। ऐसे पल इस शो की जान हैं। यहां पर मिलने वाली सामग्री बहुत उच्च गुणवत्ता की है। मैं दोस्तों को भी यह दिखाना चाहता हूं। हंसी और रहस्य का अच्छा मिश्रण है।

सुंदर सजावट

हॉल की सजावट बहुत सुंदर थी, लेकिन नाटक उससे भी ज्यादा खूबसूरत था। नीले रंग का रूप सबको पसंद आया। लेकिन असली रंग तो किरदारों के रिश्तों में हैं। वैद्य भी, योद्धा भी ने साबित कर दिया है कि कहानी ही सब कुछ है। मंच डिजाइन भी बहुत उच्च स्तरीय लग रहा था। हर दृश्य एक तस्वीर जैसा है। बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति है।

अधूरा अंत

अंत में जब सब कुछ रुक गया, तो मैं हैरान रह गया। कहानी वहीं खत्म हो गई जहां सबसे ज्यादा उत्सुकता थी। यह अधूरा अंत बहुत क्रूर है। मुझे अभी पता चलना है कि आगे क्या हुआ। वैद्य भी, योद्धा भी के प्रशंसकों के लिए यह इंतजार मुश्किल होगा। लेकिन अच्छी चीजों के लिए इंतजार करना पड़ता है। जल्दी से नई कड़ी जारी करो।