खाने की मेज पर जो तनाव दिखा, वह बहुत ही दिलचस्प था और दर्शकों को बांधे रखने के लिए काफी था और सब हैरान थे। नीली पोशाक वाली महिला का गुस्सा साफ़ झलक रहा था और उसकी आवाज़ में भी वश था और गुस्सा था। इस बीच में पुरुष पात्र की घबराहट देखने लायक थी क्योंकि वह फंस गया था और समझ नहीं पा रहा था। वैद्य भी, योद्धा भी नामक इस शो में ऐसे मोड़ उम्मीद से बाहर हैं और कहानी को नई दिशा देते हैं और आगे बढ़ाते हैं। कहानी आगे बढ़ने के साथ ही जादुई तत्व भी सामने आए जो कि बहुत ही आकर्षक लग रहे थे और रोमांच बढ़ा रहे थे और मज़ा आ रहा था।
काले सूट वाली महिला की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी और उसकी मौजूदगी ही काफी थी और डरा रही थी। उसकी आँखों में छिपे भावों को पढ़ना मुश्किल था लेकिन खतरा साफ़ दिख रहा था और सब डरे हुए थे। जब जादुई हथियार दिखाई दिए, तो हैरानी हुई और सबकी सांसें रुक गईं और सन्नाटा छा गया। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में रोमांस और एक्शन का मिश्रण अच्छा है और दर्शकों को पसंद आता है और भाता है। अंत में मुखौटे वाली महिला का आगमन रहस्य बढ़ाता है और अगले एपिसोड के लिए उत्सुकता पैदा करता है और बेचैनी है।
डाइनिंग टेबल पर बैठे इन तीनों के बीच के संबंध बहुत गजब के हैं और देखने में मज़ा आता है और अच्छा लगता है। एक तरफ प्यार तो दूसरी तरफ गुस्सा साफ़ दिख रहा था और माहौल गर्म था और तनाव था। जब उसने उसे चूमा, तो सब हैरान रह गए और सन्नाटा छा गया और सब देख रहे थे। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं और कहानी में जान डालते हैं और रोमांचित करते हैं। इस मंच पर देखने का अनुभव भी काफी सुगम रहा और वीडियो की क्वालिटी भी बहुत अच्छी लगी और साफ़ थी।
जादुई तत्वों का इस्तेमाल कहानी को नया मोड़ देता है और इसे साधारण नाटक से अलग बनाता है और खास बनाता है। बैंगनी रंग के हथियार बहुत ही आकर्षक लग रहे थे और विशेष प्रभाव भी अच्छे थे और निखरे हुए थे। पुरुष पात्र फंस गया था दोनों महिलाओं के बीच में और उसे रास्ता नहीं मिल रहा था और वह परेशान था। वैद्य भी, योद्धा भी की पटकथा में यह ट्विस्ट बहुत अच्छा लगा और कहानी को आगे बढ़ाता है और जोड़ता है। मुझे यह देखकर मज़ा आया कि अंत क्या होता है और कौन जीतता है और क्या होता है।
नीली ड्रेस वाली लड़की का अभिनय बहुत ही प्राकृतिक लगा और उसने दिल जीत लिया और सबको पसंद आया। उसने अपने गुस्से को बहुत अच्छे से व्यक्त किया और हर हावभाव सही था और जानदार था। वहीं पुरुष पात्र की उलझन हंसी पैदा कर रही थी और वह बेचारा लग रहा था और फंसा हुआ था। वैद्य भी, योद्धा भी जैसे शो में ऐसे किरदार जरूरी हैं और कहानी को संभालते हैं और आगे बढ़ाते हैं। कहानी की रफ़्तार भी बहुत तेज़ और रोचक बनी हुई है और बोरियत नहीं होती और मज़ा आता है।
अंत में जो महिला वाइन के गिलास के साथ आई, उसने सबका ध्यान खींच लिया और सब हैरान रह गए और देखते रह गए। उसका काला मुखौटा बहुत ही रहस्यमयी लग रहा था और उसकी पहचान छिपी थी और कोई नहीं जानता था। वैद्य भी, योद्धा भी में अब नया विलेन या दोस्त आ गया है और खेल बदल गया है और सब बदल गया है। यह दृश्य देखकर मैं अगले एपिसोड का इंतज़ार करने लगा हूँ और जानना चाहता हूँ और उत्सुक हूँ। माहौल बहुत ही नाटकीय हो गया था और तनाव चरम पर था और सब गरमा गया था।
खाने के दौरान जो बहस हुई, उसने सबकी नींद उड़ा दी और माहौल खराब हो गया और सब परेशान हो गए। एक तरफ शांति तो दूसरी तरफ हंगामा खड़ा हो गया और कोई चुप नहीं था और सब बोल रहे थे। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में यह डाइनिंग सीन बहुत महत्वपूर्ण है और महत्वपूर्ण मोड़ है और अहम है। पात्रों के बीच के रिश्ते अब उलझने लगे हैं और सुलझना मुश्किल है और पेचीदा हो गया है। दर्शक के रूप में मुझे यह संघर्ष बहुत पसंद आया और मैं जुड़ा रहा और देखता रहा।
पुरुष पात्र को दोनों तरफ से दबाव महसूस हो रहा था और वह घबरा गया था और समझ नहीं पा रहा था। एक तरफ प्यार का इज़हार तो दूसरी तरफ गुस्सा और वह फंस गया था और बीच में था। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे प्रेम त्रिकोण देखना आम बात है लेकिन यह अलग है और खास है। लेकिन इसमें जादू का तड़का लगने से मज़ा दोगुना हो गया और रोमांच बढ़ा और अच्छा लगा। मैं इस शो को अपने दोस्तों को जरूर सुझाऊंगा और सबको बताऊंगा और देखने को कहूंगा।
काले सूट वाली महिला की आँखों में जो चमक थी, वह खतरनाक लग रही थी और डरा रही थी और सतर्क कर रही थी। उसने बिना कुछ कहे सब कुछ कह दिया और उसकी खामोशी बोल रही थी और सब कह रही थी। वैद्य भी, योद्धा भी के इस एपिसोड में भावनाओं का खेल देखा गया और सब गहरा था और असली था। सेट डिज़ाइन और कपड़े भी बहुत ही शानदार लग रहे थे और महंगे लग रहे थे और अच्छे थे। हर फ्रेम बहुत ही खूबसूरत तरीके से कैद किया गया है और निखरा हुआ है और साफ़ है।
कुल मिलाकर यह एपिसोड बहुत ही रोमांचक रहा और समय अच्छा कटा और मज़ा आया और अच्छा लगा। शुरू से अंत तक बोरियत का नाम नहीं था और हर पल मज़ा था और रोमांच था। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में अब नया मोड़ आ गया है और सब बदल गया है और नया है। मुखौटे वाली महिला कौन है, यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है और बेचैनी है और जानना है। इस मंच पर ऐसे शो देखना सुकून देने वाला अनुभव है और मज़ा आता है और अच्छा लगता है।