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वैद्य भी, योद्धा भीवां63एपिसोड

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वैद्य भी, योद्धा भी

परम योद्धा आरव सिंह अपने शुद्ध तेज शरीर के कारण नींव स्तर के शिखर पर अटका था। उसके गुरु साधक ने उसे उस लड़की को खोजने का आदेश दिया जिसके शरीर पर "रहस्यमयी निशान" हो, ताकि वह अपनी रुकावट तोड़ सके। गुरु ने उसकी गुरु बहनों को भी मदद करने भेजा। पहाड़ से उतरने की उसी रात, आरव की मुलाकात चंद्र ग्रुप की सीईओ तारा चंद्र से हुई। वह उसका बॉयफ्रेंड बन गया और उसकी सहेलियों की रक्षा करने लगा। अपनी चिकित्सा और युद्ध कला के दम पर, आरव ने दुश्मनों को मुँह की खाई और जिंदगी की सबसे ऊँची सीढ़ी पर पहुँच गया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

तनाव से भरा प्रवेश

तीन महिलाओं का प्रवेश ही कहानी में तनाव भर देता है। हर एक की चाल अलग है, जैसे कोई रणनीति बना रहे हों। सोफे वाले व्यक्ति की बेचैनी साफ दिख रही है। वैद्य भी, योद्धा भी जैसी जटिलताएं यहां भी हैं। सोफे पर बैठने का तरीका ही सब बता देता है। कौन जीतेगा यह खेल? देखने में मजा आ रहा है। यह दृश्य बहुत गहराई रखता है। पात्रों के बीच की दूरी स्पष्ट है। हर कोई अपनी जगह बना रहा है।

चेहरे के भाव गजब

सोफे वाले व्यक्ति के चेहरे के भाव गजब के हैं। जब काले लिबास वाली कंधे पर हाथ रखती है, तो वह सहज नहीं लग रहा। अभिनय बहुत प्राकृतिक है। लगता है वह किसी दबाव में है। कहानी में यह संघर्ष दिलचस्प मोड़ ले रहा है। हर पल नया रहस्य बना हुआ है। दर्शक को बांधे रखने की ताकत है इसमें। कलाकारों ने कमाल किया है। भावनाएं सही दिखीं। संघर्ष स्पष्ट है।

चाय और साजिश

चाय पीने का दृश्य बिल्कुल अलग माहौल देता है। सफेद कपड़े वाला व्यक्ति शांत लेकिन खतरनाक लग रहा है। फोन की घंटी ने सब बदल दिया। वैद्य भी, योद्धा भी में भी ऐसे ही मोड़ आते हैं। ग्रे सूट वाला चुपचाप सब देख रहा है। शक्ति का संतुलन हिल गया है। यह दृश्य बहुत गहराई रखता है। माहौल बहुत भारी है। बातचीत गंभीर है। रहस्य बना है।

फोन का असर

फोन के बाद चेहरे के रंग बदल गए। यह छोटा सा उपकरण कहानी की दिशा बदल देता है। सफेद पोशाक वाले की गंभीरता देखने लायक है। लगता है कोई बड़ी खबर मिली है। दर्शक के रूप में मैं हैरान रह गया। अगला भाग कब आएगा? यह उत्सुकता बनी हुई है। कहानी बहुत आगे बढ़ रही है। कहानी बहुत मजबूत है। धारणा बहुत अच्छी है। कथा ठीक है।

शानदार सजावट

मंच सजावट बहुत अमीर लग रही है। किताबों की अलमारी से लेकर चाय के बर्तन तक, सब कुछ शानदार है। यह दिखाता है कि पात्रों का दर्जा क्या है। वैद्य भी, योद्धा भी की तरह यहां भी बारीकियों पर ध्यान दिया गया है। लक्जरी के बीच संघर्ष और भी गहरा लगता है। दृश्य रूप से बहुत सुंदर है। रंगों का उपयोग अच्छा है। प्रकाश व्यवस्था ठीक है। नज़ारा सुंदर है।

काले लिबास वाली

काले लिबास वाली सबसे आगे है। उसकी आंखों में कुछ पाने की चमक है। बाकी दो पीछे हैं, शायद वे उसका समर्थन कर रही हैं। व्यक्ति के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचा। यह शक्ति संतुलन बहुत तेजी से बदल रहा है। देखने में बहुत रोमांचक लग रहा है। हर कोई अपनी चाल चल रहा है। नाटक बहुत तेज है। संघर्ष स्पष्ट है। माहौल गर्म है।

दो दुनिया का टकराव

दो अलग-अलग दुनिया का टकराव देखने को मिला। एक तरफ निजी जीवन का हंगामा, दूसरी तरफ व्यवसाय या परिवार की गंभीर बातें। सफेद सूट वाला व्यक्ति किसी बड़ी जिम्मेदारी में लग रहा है। वैद्य भी, योद्धा भी जैसी गहराई इसमें भी है। कहानी आगे क्या होगी? यह सवाल मन में है। कथा बहुत रोचक है। पात्र गहन हैं। कहानी अच्छी है।

खामोशी का शोर

बिना संवाद के ही इतनी बातें कह दी गईं। शारीरिक भाषा पर इतना जोर कम ही देखने को मिलता है। ग्रे सूट वाले की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। वह सब समझ रहा है लेकिन बोल नहीं रहा। यह खामोशी डरावनी है। बहुत ही बेहतरीन दृश्य है। अभिनय सराहनीय है। निर्देशन शानदार है। तकनीक अच्छी है। काम बढ़िया है।

तेज रफ्तार

कहानी की रफ्तार बहुत तेज है। एक दृश्य से दूसरे दृश्य में बदलाव बहुत सहज है। दर्शक को बोर होने का मौका नहीं मिलता। वैद्य भी, योद्धा भी के प्रशंसकों को यह पसंद आएगा। हर किरदार की अपनी एक अलग पहचान बन रही है। मैं अगले भाग का इंतजार कर रहा हूं। कथा बहुत मजबूत है। धारणा बहुत अच्छी है। प्रभाव गहरा है। मजा आया।

अंतिम इशारा

अंत में वह इशारा कुछ और ही कहानी कह रहा है। सफेद कपड़े वाले ने उंगली से क्या संकेत दिया? यह रहस्य बना हुआ है। शायद कोई बड़ी साजिश रची जा रही है। यह शो देखने के लिए मजबूर कर देता है। मंच पर देखने का अनुभव अच्छा रहा। कहानी में दम है। आगे क्या होगा? रहस्य बना हुआ है। अंत रोचक है। सवाल बाकी है।