जब रोहन धारीदार कोट में आता है, तो माहौल में तनाव साफ झलकता है। उसकी आंखों में गुस्सा और आवाज में अधिकार है। ऐसा लगता है जैसे वह किसी बदले की आग में जल रहा हो। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का में ऐसे द्वंद्व देखना रोमांचक लगता है। पुराने जमाने की युद्ध कला और आधुनिक कपड़ों का मिश्रण अच्छा लगा।
स्लेटी कपड़ों वाले व्यक्ति के चेहरे पर खून के निशान कहानी बता रहे हैं। वह थका हुआ लग रहा है लेकिन उसकी आंखों में हार नहीं है। जब वह चुपचाप खड़ा होता है, तो लगता है वह किसी बड़े तूफान का इंतजार कर रहा है। इस नाटक में चुप्पी भी शोर मचाती है। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक है जो संघर्ष की गवाह है।
महिला पात्र जब बोलती है तो सच्चाई सामने आती है। उसने स्पष्ट किया कि उसने दवा क्यों ली थी। उसकी आवाज में डर नहीं बल्कि स्पष्टता थी। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का के इस हिस्से में भावनात्मक गहराई है। पात्रों के बीच का संवाद बहुत प्राकृतिक लगता है। दर्शक उसकी बात पर यकीन करने लगते हैं।
काले कपड़ों वाले बुजुर्ग की उपस्थिति ही भारी है। जब वे बोलते हैं, तो सब चुप हो जाते हैं। उन्होंने रोहन को असलियत बताई कि वह उसी संगठन का हिस्सा है। यह खुलासा कहानी में नया मोड़ लाता है। सत्ता और शक्ति का यह खेल देखने लायक है। उनकी आवाज में वजन है।
भूरे रंग का कोट पहने व्यक्ति शांत रहने की कोशिश कर रहा है। वह जानता है कि बातें बिगड़ सकती हैं। उसकी मुस्कान के पीछे छिपी चालाकी साफ दिखती है। वह रोहन को शांत करने की कोशिश करता है लेकिन स्थिति काबू से बाहर है। वह बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है।
जब रोहन गुस्से में आता है तो बैंगनी रंग की ऊर्जा दिखाई देती है। यह विशेष प्रभाव दृश्य को और भी नाटकीय बना देता है। ऐसा लगता है जैसे अब असली लड़ाई शुरू होने वाली है। कार्रवाई प्रेमियों के लिए यह दृश्य किसी कमाल से कम नहीं है। इसमें जादुई शक्ति का अहसास होता है।
तारा तरुण की मौत को लेकर आरोप और प्रत्यारोप हो रहे हैं। कोई कहता है जहर था, कोई कहता है टूटने से मरा। इस उलझन ने कहानी को दिलचस्प बना दिया है। सच क्या है यह जानने के लिए दर्शक बेताब हो जाएंगे। रहस्य धीरे धीरे खुल रहा है। हर संवाद नई जानकारी देता है।
पृष्ठभूमि में पुरानी वास्तुकला और लालटेन बहुत सुंदर लग रही हैं। यह सजावट कहानी को एक ऐतिहासिक अहसास देती है। पत्थर की सीढ़ियां और लकड़ी के खंभे दृश्य को गहराई देते हैं। ऐसे माहौल में कहानी और भी प्रभावशाली लगती है। कला निर्देशन बहुत शानदार है।
जब पता चलता है कि रोहन और तारा परिवार एक ही संगठन से जुड़े हैं, तो झटका लगता है। यह धोखा कहानी की रीढ़ है। विश्वास और गद्दारी के बीच की लकीर बहुत पतली है। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का में ऐसे मोड़ उम्मीद से ज्यादा हैं। कहानी हर पल बदलती है।
पूरे दृश्य में एक अजीब सी खामोशी और तनाव है। हर कोई किसी बड़े विस्फोट का इंतजार कर रहा है। संवाद कम हैं लेकिन आंखों की भाषा सब कह रही है। यह नाटक दर्शकों को बांधे रखता है। अगली कड़ी देखने की उत्सुकता बढ़ गई है। हर पल रोमांचक है।