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(डबिंग) ठुकराया हुआ इक्कावां59एपिसोड

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(डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का

“योद्धा” अर्जुन नकाब उतारने की रस्म में गायब हो जाता है। माँ की अंतिम इच्छा से वह तीन साल तक मार्शल आर्ट्स छोड़कर बहन के साथ साधारण जीवन जीता है। प्रतियोगिता से पहले बहन हारने लगती है, अर्जुन छिपकर मदद करता है पर उसका मज़ाक उड़ता है। संकट में वह अपनी शक्ति दिखाकर दुश्मनों को हराता है, मगर पता चलता है कि उसका स्थान “प्रकाश मंडल” ने दुश्मनों को दे दिया। सच जानने के लिए वह चयन में उतरता है और अंत में उनके खतरनाक अध्यक्ष से भिड़ता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

एक्शन का असली मज़ा

अर्जुन की मार्शल आर्ट देखकर रोंगटे खड़े हो गए। तकनीक के आगे घमंड करने वाला वो चश्मे वाला शख्स बुरी तरह पिट गया। जब सिस्टम एरर दिखा तो समझ गया कि हुनर के आगे मशीन फेल है। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का में ऐसा क्लाइमेक्स बार बार देखने को मिले। अर्जुन ने साबित कर दिया कि असली ताकत मेहनत में है। मुझे यह संदेश बहुत पसंद आया।

महिला किरदार की ताकत

उस महिला ने अर्जुन की तारीफ करते हुए जो कहा, दिल को छू गया। उसने कहा कि अर्जुन वाकई एक महान योद्धा है। उसकी पोशाक और गहने भी बहुत खास लग रहे थे। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का की कहानी में जज्बातों की गहराई है। सिर्फ मारपीट नहीं, बल्कि बदले की आग भी साफ दिख रही है। मां का बदला लेने का जिक्र सुखद था।

घमंड का अंत

वो सूट वाला शख्स दीवार से टिककर बैठ गया था, उसकी हालत देखकर तरस आया। उसने कहा कि मेरा इंतजार करना, लेकिन अर्जुन ने उसे मौका नहीं दिया। उसकी आंखों में डर साफ था। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का में विलेन का अंत बहुत संतोषजनक लगा। खून और पसीने से बनी बुद्धिमत्ता ही असली होती है। यह डायलॉग यादगार है।

तकनीक बनाम हुनर

चश्मे वाला शख्स बार बार एनालिसिस एरर चिल्ला रहा था। उसे लगा था टेक्नोलॉजी से सब जीत जाएगा। पर अर्जुन ने दिखा दिया कि असली भविष्य हुनर में है। चश्मा टूटते ही उसका घमंड चूर हो गया। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का का यह संदेश बहुत गहरा है। बुद्धिहीन प्राणी कहकर अर्जुन ने उसका घमंड तोड़ दिया।

बदले की आग

जब अर्जुन और वो महिला बात कर रहे थे, तो लगा कि उनकी जीत सिर्फ लड़ाई की नहीं है। हमने मां का बदला लिया, यह लाइन रूह कंपा देने वाली थी। दोनों के बीच की केमिस्ट्री अच्छी थी। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का में इमोशनल एंगल बहुत स्ट्रॉन्ग है। अर्जुन कमाल है, यह कहना उसका हक था। मुझे यह पल बहुत भाया।

फाइट सीन का जादू

खाली कमरे में हुई यह लड़ाई किसी बड़े बजट वाली फिल्म से कम नहीं लग रही। अर्जुन की किक और पंच बहुत सटीक थे। हवा की आवाज़ भी साफ आ रही थी। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का के एक्शन सीक्वेंस बहुत अच्छे हैं। वो गिरा हुआ चश्मा और टूटा हुआ घमंड सब कुछ परफेक्ट था। एक्शन प्रेमियों के लिए बेहतरीन है।

अर्जुन का सफर

अर्जुन ने कहा कि मैं फिर से योद्धा बनूंगा। यह सुनकर लगा कि यह अंत नहीं, नई शुरुआत है। वो समाज को सुधारेगा। उसकी आवाज़ में दम था। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का में किरदार का विकास बहुत अच्छा दिखाया गया है। उसकी आंखों में जिम्मेदारी साफ झलक रही थी। आगे की कहानी का इंतज़ार रहेगा।

हार न मानने वाला

वो चश्मे वाला शख्स खून मुंह में होने के बाद भी नहीं माना। उसने कहा मैं नहीं मानता, असली भविष्य में हूं। पर अंत में उसे मर जाना पड़ा। उसकी चीखें गूंज रही थीं। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का में विलेन की जिद बहुत अच्छे से दिखाई गई। अर्जुन ने उसे सबक सिखा दिया। यह दृश्य बहुत इंटेंस था।

माहौल की बात

पुरानी बिल्डिंग का सेट बहुत रियल लगा। दीवारों से उखड़ा पेंट और धूल ने लड़ाई को और भी कच्चा बना दिया। रोशनी का इस्तेमाल भी बढ़िया था। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का की प्रोडक्शन वैल्यू अच्छी है। जब वो सूट वाला शख्स गिरा, तो धूल उड़ी, बहुत असली लगा। माहौल बहुत दमदार बनाया गया है।

पूरी कहानी का सार

शुरू से अंत तक बोरियत नहीं हुई। एक्शन, इमोशन और डायलॉग सब कुछ बैलेंस था। अर्जुन की जीत हमारी जीत लग रही थी। दर्शक जुड़ाव महसूस करते हैं। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का देखने के बाद मन शांत हो गया। नेटशॉर्ट प्लेटफॉर्म पर ऐसे ही और सीरीज मिलें तो मज़ा आ जाए। सबको देखना चाहिए।