ब्लॉन्ड बॉस का रवैया शुरू में बहुत रूखा लगता है, जैसे उसे दुनिया से कोई फर्क ही न पड़ता हो। लेकिन जैसे ही वह फोन उठाता है और पार्किंग में पहुंचता है, उसके चेहरे के भाव बदलने लगते हैं। वही है वो, बॉस! जब वह कार में बैठकर पीछे मुड़कर देखता है, तो आंखों में एक अजीब सी बेचैनी और चिंता साफ दिख रही थी। ऑफिस की चमकदार दुनिया और पार्किंग की गहरी छाया का कंट्रास्ट बहुत गजब का था।
ट्रेंच कोट वाली महिला के चेहरे पर जो थकान और चिंता थी, वह किसी भी मां के दिल को छू लेगी। पार्किंग में बच्चे के साथ खड़ी होकर वह फोन पर किसी से बात कर रही थी, और उसकी आवाज़ में जो घबराहट थी, वह साफ महसूस की जा सकती थी। बच्चा चुपचाप खड़ा था, जैसे वह सब समझ रहा हो। वही है वो, बॉस! जब वह कार में बैठते हैं, तो मां का बच्चे को गले लगाना और उसे सहलाना बहुत इमोशनल था।
कार के अंदर का सीन सबसे ज्यादा इंटेंस था। ड्राइवर की सीट पर बैठे ब्लॉन्ड शख्स की नज़रें बार-बार रियर व्यू मिरर में जा रही थीं। पीछे बैठे बच्चे और मां के बीच की खामोशी में भी एक शोर था। वही है वो, बॉस! मां का चेहरा पसीने से तर-बतर था और वह बार-बार कुछ कहने की कोशिश कर रही थी, लेकिन शब्द नहीं निकल रहे थे। यह सस्पेंस कि आखिर चल क्या रहा है, दर्शक को बांधे रखता है।
शुरुआत में जब वह ऑफिस में अपने कर्मचारी से बात कर रहा था, तो उसकी बॉडी लैंग्वेज में बहुत अहंकार था। हाथ में कॉफी कप लिए घूमना और फोन पर बात करते वक्त का अंदाज कुछ और ही था। लेकिन पार्किंग में पहुंचते ही वह अहंकार गायब हो गया। वही है वो, बॉस! जब वह कार में बैठता है, तो वह सिर्फ एक इंसान लग रहा है जो किसी मुसीबत में फंस गया है। यह किरदार का विकास बहुत बारीकी से दिखाया गया है।
पार्किंग का सीन बहुत ही डरावने अंदाज में शूट किया गया है। वहां की रोशनी कम थी और दीवारों पर पड़ी परछाइयां किसी डरावनी फिल्म जैसी लग रही थीं। महिला और बच्चे का वहां अकेले खड़े होना और फिर उस कार का आना, सब कुछ बहुत सस्पेंसफुल था। वही है वो, बॉस! कार की हेडलाइट्स जब जलती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे कोई शिकारी अपने शिकार के पास आ गया हो। यह वातावरण निर्माण बहुत शानदार है।