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वही है वो, बॉस!

छह साल पहले, एक रात ने दीना की ज़िंदगी बदल दी — वह एक अकेली माँ बन गई। उसे कभी पता नहीं चला कि उस रात का वह आदमी एलेक्स था, जो एक्लाट ग्रुप का सीईओ है, और वह तब से उसे ढूंढ रहा है। उसकी साजिशी सौतेली बहन उसकी जगह ले लेती है, दीना की पहचान चुरा लेती है। किस्मत दीना को एक्लाट ग्रुप में एलेक्स की सेक्रेटरी बनाकर ले आती है, जहाँ प्यार फिर से खिल उठता है...
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इस एपिसोड की समीक्षा

रात का वो तूफानी मोड़

शुरुआत में जो रोमांटिक माहौल था, वो अचानक डरावने मोड़ पर पहुँच गया। जब उसने लड़की को जबरदस्ती बाहर धकेला, तो रोंगटे खड़े हो गए। वही है वो, बॉस! ये शो सिर्फ प्यार की कहानी नहीं, बल्कि पावर डायनामिक्स की गहरी पड़ताल है। कैंडल लाइट और डार्क शैडोज़ का इस्तेमाल सस्पेंस बढ़ाने के लिए कमाल का था।

माँ का प्यार और ऑफिस का तनाव

बच्चे को सुलाने के बाद जब वो लैपटॉप पर काम करने बैठती है, तो हर वर्किंग मदर का दर्द साफ दिखता है। वही है वो, बॉस! में दिखाया गया है कि कैसे एक औरत को घर और करियर दोनों संभालने के लिए कितनी मशक्कत करनी पड़ती है। उसकी थकी हुई आँखें और फिर भी काम पर फोकस रहना दिल को छू लेता है।

वफ़ल वाला सीन और खामोशी

आखिरी में वफ़ल खाते हुए बच्चे का क्लोज़-अप शॉट बहुत प्यारा था, लेकिन उसके पीछे छिपी उदासी महसूस हुई। वही है वो, बॉस! की कहानी में ये छोटे-छोटे डिटेल बहुत मायने रखते हैं। लड़के का चुपचाप खाना और लड़की का स्ट्रेस में रहना बताता है कि सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। फूड भी कभी-कभी इमोशन छिपाता है।

कपड़ों का बदलाव और कहानी

लड़की का ब्लैक ड्रेस से सफेद शर्ट में ट्रांजिशन सिर्फ कपड़े बदलना नहीं, बल्कि उसके मूड और स्थिति का बदलाव है। वही है वो, बॉस! में कॉस्ट्यूम डिजाइनर ने बहुत सोच-समझकर काम किया है। जब वो ऑफिशियल लुक में आती है, तो लगता है जैसे उसने अपनी निजी जिंदगी को एक तरफ रख दिया हो। ये विजुअल स्टोरीटेलिंग है।

दरवाजे पर वो आखिरी नज़ारा

जब लड़की को दरवाजे से बाहर निकाला गया और वो अपने कपड़े सीने से लगाकर खड़ी थी, तो उसकी बेबसी साफ दिख रही थी। वही है वो, बॉस! का ये सीन सबसे इमोशनल था। नंबर ६८ वाला रूम और वो अंधेरा कॉरिडोर उसकी अकेलेपन को और भी गहरा कर देता है। ऐसा लगा जैसे वो पूरी दुनिया से कट गई हो।

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