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वही है वो, बॉस!

छह साल पहले, एक रात ने दीना की ज़िंदगी बदल दी — वह एक अकेली माँ बन गई। उसे कभी पता नहीं चला कि उस रात का वह आदमी एलेक्स था, जो एक्लाट ग्रुप का सीईओ है, और वह तब से उसे ढूंढ रहा है। उसकी साजिशी सौतेली बहन उसकी जगह ले लेती है, दीना की पहचान चुरा लेती है। किस्मत दीना को एक्लाट ग्रुप में एलेक्स की सेक्रेटरी बनाकर ले आती है, जहाँ प्यार फिर से खिल उठता है...
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इस एपिसोड की समीक्षा

वफ़ल से लेकर बाथरूम तक का सफ़र

शुरुआत में लग रहा था कि बस एक ऑफिस मीटिंग है, लेकिन जैसे ही उसने गर्दन पकड़ी, सब कुछ बदल गया। वही है वो, बॉस! ने दिखाया कि कैसे तनाव अचानक रोमांस में बदल सकता है। बाथरूम वाला सीन तो दिल धड़का देने वाला था, पानी और भावनाओं का ऐसा मिश्रण कि सांस रुक जाए।

गर्दन पकड़ने वाला अंदाज़

जब उसने उसकी गर्दन को अपने हाथों में लिया, तो स्क्रीन पर सन्नाटा छा गया। वही है वो, बॉस! की केमिस्ट्री देखते ही बनती है। वह घबराई हुई थी, पर उसकी पकड़ इतनी मज़बूत थी कि विरोध करना मुमकिन नहीं लगा। यह डर और आकर्षण का खतरनाक खेल था जो हर किसी को पसंद आएगा।

बाथरूम का वो इंटीमेट पल

लिविंग रूम से बाथरूम तक का सफ़र इतना तेज़ था कि हमें संभलने का मौका ही नहीं मिला। वही है वो, बॉस! में बाथरूम का सीन सबसे हाईलाइट था। शॉवर हेड, गीले कपड़े और उनका वह पागलपन भरा चुंबन। ऐसा लगा जैसे समय थम गया हो और सिर्फ वही दो लोग दुनिया में हों।

कपड़ों के बटन और भावनाएं

उसने जब उसके शर्ट के बटन खोले, तो हवा में बिजली सी दौड़ गई। वही है वो, बॉस! ने दिखाया कि कैसे छोटे-छोटे इशारे बड़े धमाके कर सकते हैं। वह शर्मिंदा थी पर रुक नहीं पा रही थी। यह दृश्य इतना वास्तविक लगा कि हम भी उस कमरे में मौजूद होने का अहसास कर रहे थे।

गुस्से से प्यार तक का सफ़र

पहले वह गुस्से में लग रहा था, फिर अचानक उसे गोद में उठा लिया। वही है वो, बॉस! की कहानी में यह मोड़ सबसे बेहतरीन था। उसका गुस्सा असल में छिपा हुआ प्यार था। जब उसने उसे बाथरूम में लिफ्ट किया, तो पता चला कि वह उसे कितना चाहता है।

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