जब डायनाह का मैसेज आया तो सीन का टोन पूरी तरह बदल गया। पहले जो माहौल था वो बिल्कुल अलग था, लेकिन जैसे ही फोन की स्क्रीन दिखाई गई, सब कुछ बदल गया। वही है वो, बॉस! में ऐसे मोमेंट्स बहुत देखने को मिलते हैं जहाँ इमोशन्स से ज़्यादा ज़रूरतें हावी हो जाती हैं। बच्चे के चेहरे पर जो उदासी आई वो दिल को छू गई।
बच्चे को लॉलीपॉप देना और फिर उसे ज़मीन पर गिरा देना... ये सीन बहुत गहरा असर छोड़ता है। लगता है जैसे बचपन की खुशियाँ भी अब बड़ों की मजबूरियों के आगे फीकी पड़ गई हैं। वही है वो, बॉस! की कहानी में ऐसे छोटे-छोटे पल बहुत बड़ी बात कह जाते हैं। बच्चे की चुप्पी सबसे ज़्यादा शोर मचा रही थी।
डायनाह का मैसेज आया और सब कुछ बदल गया। पहले जो हंसी-मज़ाक था, वो गंभीरता में बदल गया। वही है वो, बॉस! में ऐसे ट्विस्ट्स बहुत अच्छे लगते हैं जहाँ एक मैसेज पूरी कहानी की दिशा बदल देता है। बच्चे के स्मार्टवॉच पर 'माँ' का कॉल आना और फिर उसकी प्रतिक्रिया... सब कुछ बहुत रियल लगा।
बच्चे और बड़े के बीच का रिश्ता बहुत नाज़ुक दिखाया गया है। बड़ा शख्स बच्चे को खुश करने की कोशिश करता है, लेकिन फिर मजबूरियों के आगे सब कुछ फीका पड़ जाता है। वही है वो, बॉस! में ऐसे रिश्तों को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। बच्चे की आँखों में जो सवाल थे, वो बिना बोले सब कह गए।
पार्क का सीन बहुत खामोश था, लेकिन उस खामोशी में बहुत कुछ कहा गया। बच्चे का अकेले खेलना, फिर बड़े शख्स का आना, और फिर मैसेज के बाद सब कुछ बदल जाना... वही है वो, बॉस! में ऐसे सीन्स बहुत अच्छे लगते हैं जहाँ माहौल ही कहानी कहता है। हरे-भरे पेड़ और उदास चेहरे... बहुत कंट्रास्ट था।