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स्कूल का शेर आदित्यवां13एपिसोड

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स्कूल का शेर आदित्य

अपराध दुनिया छोड़कर आदित्य यादव पढ़ाई के लिए पूर्वनगर के लिली हाई स्कूल आता है, पर यहाँ उसे सिर्फ़ धूम्रपान, मारपीट और गैंगबाज़ी दिखती है। उसकी दोस्ती मनीष तिवारी और सोनम वर्मा से होती है। जब रोहित मल्होत्रा मनीष को अपमानित कर देता है और वह कूद जाता है, तो आदित्य भड़क उठता है और अपनी ताकत दिखाता है। जल्द ही उसे पता चलता है कि सबके पीछे गैंग लीडर करण चौहान है, और दोनों के बीच अंतिम भिड़ंत तय हो जाती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

पुस्तकालय का रहस्य

पुस्तकालय का दृश्य बहुत ही शांत था, लेकिन अदित्य के आते ही माहौल बदल गया। लड़की की घबराहट और लड़कों की चुप्पी सब कुछ बता रही थी। विद्यालय का शेर आदित्य जब कमरे में आया, तो सबकी सांसें रुक सी गईं। यह तनाव का निर्माण कमाल का है।

हेडफोन वाला लड़का

वो लड़का जो हेडफोन पहने किताब पढ़ रहा था, उसकी मासूमियत और अदित्य की सख्ती का अंतर देखने लायक था। जब अदित्य ने उसे बुलाया, तो उसकी आंखों में डर साफ दिख रहा था। विद्यालय का शेर आदित्य की प्रवेश ने सबको हिला कर रख दिया।

कार्यालय का डर

कार्यालय वाले दृश्य में जो लड़का अखबार पढ़ रहा था, उसकी बेपरवाही और अदित्य की गंभीरता का टकराव बहुत अच्छा लगा। जब अदित्य चला गया, तो सबने राहत की सांस ली। विद्यालय का शेर आदित्य की मौजूदगी ही इतनी भारी है कि सब चुप हो जाते हैं।

नीली कमीज वाली लड़की

लड़की जो नीली कमीज में थी, उसकी आंखों में चिंता साफ दिख रही थी। जब अदित्य अंदर आया, तो वो उठ खड़ी हुई, जैसे कोई गलती पकड़ी गई हो। विद्यालय का शेर आदित्य के सामने सबकी हिम्मत जवाब दे जाती है। ऐसा लगता है जैसे वो सबका मालिक हो।

चश्मे वाला छात्र

चश्मे वाला लड़का जो किताब पढ़ रहा था, उसकी शांति और अदित्य के आने के बाद का तनाव बहुत अच्छे से दिखाया गया। विद्यालय का शेर आदित्य जब बोलता है, तो सबकी नजरें उसी पर टिक जाती हैं। यह शक्ति संतुलन बहुत रोचक है।

अदित्य का प्रवेश

जब अदित्य दरवाजे से अंदर आया, तो उसकी चाल में इतना आत्मविश्वास था कि सबकी नजरें उस पर टिक गईं। उसने बिना कुछ कहे ही सबको डरा दिया। विद्यालय का शेर आदित्य की हर चाल में एक अलग ही वजन है। यह दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो गए।

सबकी चुप्पी

अदित्य के सामने सबकी चुप्पी सबसे ज्यादा डरावनी लग रही थी। कोई कुछ बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा था। विद्यालय का शेर आदित्य की मौजूदगी में सब अपनी जगह जमे हुए थे। यह खामोशी ही सबसे बड़ा नाटक बन गया था।

किताबों के बीच डर

पुस्तकालय में किताबों के बीच बैठे छात्रों के चेहरे पर डर साफ दिख रहा था। अदित्य के आने से पहले सब शांत थे, लेकिन उसके आते ही सबकी धड़कनें तेज हो गईं। विद्यालय का शेर आदित्य का असर सब पर एक जैसा है।

अदित्य का गुस्सा

अदित्य के चेहरे पर जो गुस्सा था, वो उसकी आंखों से साफ झलक रहा था। उसने जब बात की, तो लगा जैसे कोई तूफान आ गया हो। विद्यालय का शेर आदित्य का यह रूप देखकर सब सहम गए। यह अभिनय इतना स्वाभाविक है कि लगता है सब असली है।

अदित्य की आंखों में आग

जब अदित्य ने उस लड़के को डांटा, तो लगा जैसे पूरा कमरा थम गया हो। उसकी आवाज़ में इतना दम था कि सामने वाला सिर झुकाकर खड़ा हो गया। विद्यालय का शेर आदित्य सचमुच अपनी जगह का बादशाह लगता है। ऐसे दृश्य देखकर दिल धड़कने लगता है, बिल्कुल असली लगता है।