बीच में जो चश्मे वाला लड़का दिखा, वो कौन था? उसका चेहरा अखबार में भी आया। लगता है स्कूल का शेर आदित्य की कहानी में उसका भी कोई बड़ा रोल है। शायद वो अदित्य का दोस्त है या फिर कोई दुश्मन जो बाद में सामने आएगा। उसके चेहरे पर भी एक अजीब सी गंभीरता थी जो दर्शकों को जिज्ञासु बना रही है।
अदित्य के पापा का किरदार बहुत ही दमदार है। वो सिर्फ एक पिता नहीं, बल्कि एक मेंटर भी हैं। जब वो गुस्से में बोलते हैं, तो लगता है कि पूरा सिस्टम हिल जाएगा। स्कूल का शेर आदित्य ने अपने पापा से ही सीखा है कि सच्चाई के लिए कैसे लड़ना है। उनका ये सीन देखकर हर बच्चे को अपने पापा पर गर्व होगा।
काले कोट वाला पापा जब बोलता है, तो हवा भी रुक जाती है। उसकी आवाज़ में वो दबदबा है जो किसी भी बदमाश को सीधा कर दे। स्कूल का शेर आदित्य के साथ मिलकर उसने साबित कर दिया कि गलत काम करने वालों को सबक सिखाना कितना जरूरी है। उस बूढ़े आदमी की हालत देखकर लग रहा था कि वो अपनी जान की भीख मांग रहा हो।
अचानक स्क्रीन पर अखबार आया और जेल की सलाखें दिखाई दीं। ये सीन बताता है कि गलतियाँ करने वालों का अंत कितना बुरा होता है। स्कूल का शेर आदित्य ने सही रास्ता चुना, जबकि बाकी लोग अपनी हरकतों की वजह से मुसीबत में फंस गए। ये दृश्य दर्शकों को एक बहुत बड़ा संदेश देता है कि अच्छाई की हमेशा जीत होती है।
वो आदमी जब जमीन पर गिरा और रोने लगा, तो दिल पसीज गया। लेकिन अदित्य और उसके पापा ने कोई रहम नहीं दिखाया। स्कूल का शेर आदित्य की ये नीति है कि जो गलत करे, उसे सजा मिलनी चाहिए। उस आदमी के चेहरे पर डर साफ दिख रहा था, जैसे उसे अपनी मौत दिखाई दे रही हो। ये सीन बहुत भावनात्मक था।
सब लोग चिल्ला रहे थे, रो रहे थे, लेकिन अदित्य बिल्कुल शांत खड़ा था। उसकी ये खामोशी सबसे ज्यादा डरावनी लग रही थी। स्कूल का शेर आदित्य जानता था कि उसे क्या करना है और वो बिना किसी शोर के अपना काम कर रहा था। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी जो बता रही थी कि वो हारने वाला नहीं है।
पूरा सीन एक कक्षा में सेट किया गया है, जो बहुत ही अनोखा है। आमतौर पर ऐसे नाटक कार्यालय या घर में होते हैं, लेकिन यहाँ स्कूल का शेर आदित्य ने कक्षा को अपना अड्डा बना लिया है। ब्लैकबोर्ड और पंखा देखकर लगता है कि ये कोई पुरानी याद ताजा कर रहा है। मंच सज्जा बहुत ही यथार्थवादी और दमदार है।
पहले जो लोग अदित्य को नीचा दिखाना चाहते थे, आज वही लोग उसके पैरों में गिरे हुए हैं। स्कूल का शेर आदित्य ने अपनी मेहनत और हिम्मत से सबको साबित कर दिया। वो आदमी जो कभी अमीर और ताकतवर लगता था, आज रो रहा है। ये कहानी बताती है कि वक्त कैसे करवट लेता है और इंसान की किस्मत कैसे बदल जाती है।
नेटशॉर्ट अनुप्रयोग पर ये श्रृंखला देखना एक अलग ही अनुभव है। स्कूल का शेर आदित्य की कहानी इतनी तेज रफ्तार से आगे बढ़ती है कि पलकें झपकाने का मौका नहीं मिलता। हर कड़ी में नया मोड़ और नया नाटक होता है। अभिनय इतना स्वाभाविक है कि लगता है ये सब हमारे सामने ही हो रहा हो। बिल्कुल मिस नहीं करना चाहिए।
जब अदित्य ने उस बूढ़े आदमी के कंधे पर हाथ रखा, तो पूरा कमरा सन्न रह गया। स्कूल का शेर आदित्य की आँखों में वो खामोश गुस्सा था जो चीखने से ज्यादा डरावना होता है। वो नीचे गिरा हुआ शख्स अपनी गलती समझ चुका था, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। अदित्य का ये रूप देखकर लगता है कि अब कोई उसका रास्ता नहीं रोक सकता।