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स्कूल का शेर आदित्यवां52एपिसोड

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स्कूल का शेर आदित्य

अपराध दुनिया छोड़कर आदित्य यादव पढ़ाई के लिए पूर्वनगर के लिली हाई स्कूल आता है, पर यहाँ उसे सिर्फ़ धूम्रपान, मारपीट और गैंगबाज़ी दिखती है। उसकी दोस्ती मनीष तिवारी और सोनम वर्मा से होती है। जब रोहित मल्होत्रा मनीष को अपमानित कर देता है और वह कूद जाता है, तो आदित्य भड़क उठता है और अपनी ताकत दिखाता है। जल्द ही उसे पता चलता है कि सबके पीछे गैंग लीडर करण चौहान है, और दोनों के बीच अंतिम भिड़ंत तय हो जाती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

गुंडों का जमावड़ा और एक अकेला लड़का

कमरे में इतने लोग और सबकी नजरें सिर्फ एक व्यक्ति पर। आदित्य के सामने खड़े उस लड़के का गुस्सा साफ दिख रहा था, पर आदित्य जरा भी नहीं डरा। स्कूल का शेर आदित्य के इस सीन में टेंशन को महसूस किया जा सकता है। पीछे खड़े लोग बस तमाशबीन लग रहे थे, जैसे उन्हें पता हो कि अब जो होगा वो इतिहास बन जाएगा। आदित्य की पोशाक साधारण थी, पर उसका तेज किसी राजा से कम नहीं था।

लेपर्ड कोलर वाला शख्स क्यों चिढ़ा हुआ है

उस लड़के के चेहरे पर जो नफरत थी, वो सिर्फ आदित्य के लिए थी या कुछ और? उसका लेपर्ड कोलर वाला कोट उसे बाकियों से अलग दिखा रहा था, शायद वो खुद को सबसे ऊपर समझता है। स्कूल का शेर आदित्य में ऐसे किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। जब वो उंगली उठाकर कुछ कह रहा था, तो लगा कि वो धमकी दे रहा है। पर आदित्य की आँखों में डर नहीं, बस एक सवाल था कि 'बस इतना ही?'

क्या आदित्य अकेला पड़ गया है

सबके सब एक तरफ और आदित्य अकेला दूसरी तरफ। ये दृश्य दिखाता है कि कैसे एक इंसान भी भीड़ के खिलाफ खड़ा हो सकता है। स्कूल का शेर आदित्य में यही तो देखने लायक है। उस लड़के की बातें सुनकर बाकी सब चुप थे, शायद डर के मारे या फिर इसलिए कि उन्हें पता था कि आदित्य क्या कर सकता है। आदित्य का चेहरा पत्थर जैसा था, पर उसकी आँखें सब कुछ बोल रही थीं।

उंगली उठाने वाले की हिम्मत देखो

उस लड़के ने आदित्य की तरफ उंगली उठाई और पूरा कमरा सन्न रह गया। उसकी आवाज में गुस्सा था, पर आदित्य के चेहरे पर कोई असर नहीं। स्कूल का शेर आदित्य के इस सीन में पावर डायनामिक्स साफ दिखते हैं। वो लड़का खुद को बहुत बड़ा समझ रहा था, पर आदित्य की खामोशी ने उसे छोटा कर दिया। ऐसे सीन देखकर लगता है कि आदित्य कोई साधारण लड़का नहीं है।

पीछे खड़े लोगों का क्या रोल है

सिर्फ दो लोग आमने-सामने नहीं थे, पीछे एक पूरी भीड़ खड़ी थी। वो सब क्या सोच रहे होंगे? क्या वो आदित्य का साथ देंगे या उन गुंडों का? स्कूल का शेर आदित्य में हर किरदार की अपनी कहानी है। उस लड़के की बातें सुनकर कुछ लोग सहमे हुए लग रहे थे, तो कुछ मजे ले रहे थे। ये दृश्य दिखाता है कि मुसीबत के वक्त इंसान के असली दोस्त कौन होते हैं।

आदित्य की आँखों में क्या है

जब कैमरा आदित्य के चेहरे पर जूम करता है, तो लगता है कि वो सब कुछ देख रहा है। उसकी आँखों में न गुस्सा था, न डर, बस एक अजीब सी शांति थी। स्कूल का शेर आदित्य में यही तो बात है कि वो बिना बोले सब कह देता है। उस लड़के की धमकियों का उस पर कोई असर नहीं हो रहा था। शायद उसे पता था कि अंत में जीत उसी की होगी। ऐसे सीन देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

क्या ये स्कूल का माहौल है

कमरा देखकर लगा कि ये कोई स्कूल या कॉलेज का हॉल है, पर यहाँ पढ़ाई नहीं, ताकत का खेल चल रहा था। स्कूल का शेर आदित्य में यही तो दिखाया गया है कि कैसे स्कूल भी एक जंगल बन सकता है। उस लड़के का अंदाज किसी गुंडे जैसा था, पर आदित्य उससे कहीं ज्यादा खतरनाक लग रहा था। ऐसे सीन देखकर लगता है कि स्कूल की दीवारों के पीछे कितनी कहानियां छिपी होती हैं।

आदित्य का जवाब क्या होगा

उस लड़के ने इतनी बातें कहीं, इतनी धमकियां दीं, पर आदित्य ने एक शब्द नहीं कहा। अब सबकी नजरें इस बात पर थीं कि आदित्य क्या जवाब देगा। स्कूल का शेर आदित्य में यही तो सस्पेंस है। क्या वो चुप रहेगा या फिर कुछ ऐसा कहेगा कि सबके होश उड़ जाएं? उसकी खामोशी सबसे बड़ा जवाब थी। ऐसे सीन देखकर लगता है कि आदित्य कोई साधारण इंसान नहीं है।

क्या आदित्य शेर है या भेड़िया

उसके चेहरे पर जो शांति थी, वो किसी शेर की तरह थी जो अपने शिकार का इंतजार कर रहा हो। स्कूल का शेर आदित्य में यही तो दिखाया गया है कि असली ताकत क्या होती है। उस लड़के का शोर-शराबा बच्चों जैसा लग रहा था, जबकि आदित्य की खामोशी में एक दहाद छिपी थी। ऐसे सीन देखकर लगता है कि आदित्य कोई साधारण लड़का नहीं, बल्कि एक जंगल का राजा है।

आदित्य की चुप्पी सबसे खतरनाक है

जब सब शोर मचा रहे थे, तब आदित्य बस खड़ा था। उसकी आँखों में वो शांति थी जो तूफान से पहले आती है। स्कूल का शेर आदित्य में यही तो बात है कि वो बिना बोले सब कह देता है। उस लड़के की उंगली उठाने का अंदाज देखकर लगा कि अब कुछ बड़ा होने वाला है। आदित्य का चेहरा पढ़ना मुश्किल था, पर लग रहा था कि वो सबके इरादे भांप चुका है। ये दृश्य दिखाता है कि असली ताकत शोर में नहीं, खामोशी में होती है।