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असली वारिस, सच्ची जीतवां12एपिसोड

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असली वारिस, सच्ची जीत

अनाथालय में पली सुस्मिता जब वर्मा परिवार की असली बेटी निकलती है, तो अपनी लैब के लिए फंडिंग पाने वापस लौटती है और आदिती वर्मा बन जाती है। घर में जय और अनन्या के तानों के बावजूद, वह अपनी प्रतिभा से सबको प्रभावित करती है। ईर्ष्या में अनन्या उसकी रिसर्च लीक करने और विस्फोटक उड़ाने की कोशिश करती है, लेकिन आदिती उसे हर बार विफल कर देती है। अंत में आदिती परिवार की असली उत्तराधिकारी बनती है और अनन्या को सजा मिलती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

खतरे में जान

इस दृश्य में तनाव साफ झलकता है जब नायिका चाय पीकर गिर जाती है। लगता है कि घर के अंदर ही कोई साजिश रच रहा है। उसकी आंखों में डर नहीं बल्कि गुस्सा दिखा। असली वारिस, सच्ची जीत की कहानी में ऐसा मोड़ उम्मीद से ज्यादा रोमांचक है। काश हमें जल्दी पता चले कि चाय में क्या मिलाया गया था।

किताब का संकेत

शुरुआत में वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता की किताब पढ़ रही थी, शायद यही उसकी ताकत है। बुद्धि से ही वह इस साजिश को नाकाम कर पाएगी। पिता जी से बातचीत भी कुछ संदेहजनक लगी। असली वारिस, सच्ची जीत में हर किरदार की अपनी मजबूरी है। देखना होगा कि वह कैसे पलटवार करती है।

धोखे की मुस्कान

चाय लाने वाली लड़की की मुस्कान में बहुत चालाकी थी। जब नायिका बेहोश हुई तो उसने राहत की सांस ली। यह स्पष्ट है कि वह कोई साधारण नौकरानी नहीं है। असली वारिस, सच्ची जीत की कहानी में यह धोखा बहुत गहरा है। ऐसे मोड़ दर्शकों को बांधे रखते हैं।

कमरे का माहौल

बेडरूम की सजावट बहुत लग्जरी है लेकिन माहौल में ठंडक है। बड़ी खिड़कियों से बाहर का नीला आसमान दिख रहा था। इस खूबसूरती के पीछे छिपा अंधेरा ही कहानी का असली हिस्सा है। असली वारिस, सच्ची जीत में सेटिंग भी कहानी कहती है। हर कोने में राज छिपे हैं।

फोन कॉल का रहस्य

उसने दरवाजा बंद करके फोन किया, शायद किसी को चेतावनी दे रही थी। लेकिन फिर भी चाय पी ली, यह गलती थी या जानबूझकर? असली वारिस, सच्ची जीत में नायिका की चालें समझना मुश्किल है। शायद वह खुद को शिकार बनाकर हमलावर को पकड़ना चाहती है।

वापसी की ताकत

गिरने के बाद वह फिर उठ खड़ी हुई और मुंह से कुछ निकाला। यह दिखाता है कि वह इतनी आसानी से हारने वाली नहीं है। उसकी आंखों में अब जीत की चमक है। असली वारिस, सच्ची जीत का सार यही है कि मुश्किलों से कैसे लड़ा जाए। बहुत प्रेरणादायक दृश्य है।

पिता का रोल

बुजुर्ग व्यक्ति के चेहरे पर चिंता साफ थी। क्या वह इस साजिश में शामिल हैं या बेखबर हैं? रिश्तों की यह कशमकश देखने लायक है। असली वारिस, सच्ची जीत में परिवार के बंधन ही सबसे बड़ी परीक्षा हैं। उनका संवाद बहुत मायने रखता है।

चाय का जहर

चाय का प्याला गिरते ही सब स्पष्ट हो गया। यह कोई साधारण दुर्घटना नहीं थी। ध्वनि प्रभाव और अभिनय बहुत असली लगे। असली वारिस, सच्ची जीत में ऐसे दृश्य दिल की धड़कन बढ़ा देते हैं। दर्शक बस यही चाहते हैं कि सच सामने आए।

आंखों का खेल

जब वह जमीन पर लेटी थी तो उसकी आंखें खुली थीं। शायद वह नाटक कर रही थी। दुश्मन को बेवकूफ बनाना ही उसका हथियार है। असली वारिस, सच्ची जीत में दिमाग का खेल ज्यादा चलता है। यह दृश्य बहुत ही बारीकी से बनाया गया है।

अंत की शुरुआत

यह अंत नहीं बल्कि एक नई लड़ाई की शुरुआत है। वह अब चुप नहीं बैठेगी। बदला लेने का समय आ गया है। असली वारिस, सच्ची जीत की कहानी अब असली मोड़ पर है। अगली कड़ी देखने के लिए मैं बेताब हूं। बहुत शानदार प्रस्तुति है।