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असली वारिस, सच्ची जीतवां48एपिसोड

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असली वारिस, सच्ची जीत

अनाथालय में पली सुस्मिता जब वर्मा परिवार की असली बेटी निकलती है, तो अपनी लैब के लिए फंडिंग पाने वापस लौटती है और आदिती वर्मा बन जाती है। घर में जय और अनन्या के तानों के बावजूद, वह अपनी प्रतिभा से सबको प्रभावित करती है। ईर्ष्या में अनन्या उसकी रिसर्च लीक करने और विस्फोटक उड़ाने की कोशिश करती है, लेकिन आदिती उसे हर बार विफल कर देती है। अंत में आदिती परिवार की असली उत्तराधिकारी बनती है और अनन्या को सजा मिलती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

कार्यालय की कहानी

इस कार्यक्रम में कार्यालय का माहौल बहुत असली लगता है। जब वह कागजात देख रही थी, तो लगा कि कुछ बड़ा होने वाला है। उस आदमी का आगमन बहुत नाटकीय था। मुझे लगता है कि असली वारिस, सच्ची जीत में यही मुख्य संघर्ष है। पात्रों के बीच की चुप्पी बहुत कुछ कह जाती है। पेय पदार्थ पीते हुए बातचीत देखकर मजा आया। किरदारों की गहराई बहुत अच्छी है।

रात का भोजन

रात के भोजन का दृश्य बहुत भावपूर्ण था। शहर की रोशनी पीछे थी और दोनों के बीच तनाव था। उसने उसका हाथ पकड़ा तो लगा कि रिश्ते में नया मोड़ आ गया है। असली वारिस, सच्ची जीत की कहानी धीरे धीरे खुल रही है। मुझे यह जोड़ी बहुत पसंद आ रही है। खाना खाते समय उनकी आंखों की बातचीत देखने लायक थी। बहुत सुंदर पल थे।

नीले कोट वाली लड़की

नीले कोट वाली अभिनेत्री का अभिनय बहुत प्राकृतिक है। उसने कागजात पढ़ते समय जो भाव दिखाए, वे दिल को छू गए। लगता है कि वह किसी बड़ी जिम्मेदारी को संभाल रही है। असली वारिस, सच्ची जीत में उसका किरदार बहुत मजबूत लग रहा है। उसकी सहेली भी बहुत सहयोगी लग रही थी। पूरी कहानी में रहस्य बना हुआ है। देखने में बहुत अच्छा लग रहा है।

चश्मे वाला नायक

नायक का रूप बहुत आकर्षक है। चश्मा और भूरे रंग का कोट उसे एक अलग पहचान देता है। जब वह कार्यालय में आया, तो सबकी नजरें उस पर थीं। असली वारिस, सच्ची जीत में उसका किरदार बहुत प्रभावशाली है। रात के भोजन पर उसने जो बात कही, उससे लगता है कि वह अपने दिल की बात कहना चाहता है। बहुत ही खूबसूरत अंदाज है। मुझे यह पसंद आया।

तनावपूर्ण माहौल

पूरे दृश्य में एक अजीब सा तनाव बना हुआ है। कार्यालय में बातचीत हो या रात का भोजन, हर जगह कुछ अनकहा है। असली वारिस, सच्ची जीत की पटकथा बहुत मजबूत लग रही है। मुझे यह देखना पसंद है कि कैसे रिश्ते बदलते हैं। पेय पदार्थ का कप और कागजात जैसे सामान का उपयोग बहुत अच्छे से किया गया है। हर छोटी चीज मायने रखती है।

सहेली का साथ

सफेद कोट वाली सहेली का किरदार बहुत प्यारा है। वह पेय पदार्थ पीते हुए सब देख रही थी। लगता है कि वह मुख्य पात्र की सबसे अच्छी दोस्त है। असली वारिस, सच्ची जीत में दोस्ती का यह पहलू बहुत अच्छा लगा। जब वह आदमी आया, तो उसकी प्रतिक्रिया देखने लायक थी। ऐसे दोस्त हर किसी को मिलने चाहिए। सच्ची मित्रता बहुत कीमती होती है।

दृश्य बहुत सुंदर

दृश्य की छायांकन बहुत शानदार है। कार्यालय की रोशनी और भोजनालय का दृश्य बहुत आंखों को सुकून देने वाला है। असली वारिस, सच्ची जीत को देखने का अनुभव बहुत अच्छा है। हर झलक को बहुत ध्यान से सजाया गया है। कपड़ों का चयन भी पात्रों के व्यक्तित्व के अनुसार है। मुझे यह दृश्य शैली बहुत पसंद आया। कलाकारों ने भी अच्छा किया।

संवादों की ताकत

हालांकि संवाद कम थे, लेकिन जो थे वे बहुत असरदार थे। आंखों के इशारों से बहुत कुछ कह दिया गया। असली वारिस, सच्ची जीत में संवाद लेखन बहुत गहरा है। जब उसने कागजात रखे, तो लगा कि कोई फैसला हो गया है। रात के भोजन पर चुप्पी भी शोर मचा रही थी। यह कला बहुत कम लोगों के पास होती है। बहुत ही बारीक बारीकी से बनाया गया।

कहानी में मोड़

मुझे लगता है कि जल्द ही कोई बड़ा मोड़ आने वाला है। कागजात में क्या था, यह अभी साफ नहीं है। असली वारिस, सच्ची जीत की कहानी में रहस्य बहुत है। नायक का अचानक आना और फिर भोजन पर ले जाना सब योजनाबद्ध लग रहा है। मैं अगली कड़ी का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। यह रहस्य बहुत अच्छा है। दर्शकों को बांधे रखने वाली कहानी है।

कुल मिलाकर बेहतरीन

यह कार्यक्रम मुझे बहुत पसंद आ रहा है। अभिनय, परिसर और कहानी सब कुछ जगह पर है। असली वारिस, सच्ची जीत एक ऐसा कार्यक्रम है जिसे मिस नहीं करना चाहिए। पात्रों के बीच की रसायन बहुत प्राकृतिक है। चाहे कार्यालय हो या खाने की मेज, हर जगह जादू है। मैं इसे अपने दोस्तों को जरूर सुझाऊंगा। बहुत ही शानदार प्रस्तुति है। सबको देखना चाहिए।