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असली वारिस, सच्ची जीतवां17एपिसोड

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असली वारिस, सच्ची जीत

अनाथालय में पली सुस्मिता जब वर्मा परिवार की असली बेटी निकलती है, तो अपनी लैब के लिए फंडिंग पाने वापस लौटती है और आदिती वर्मा बन जाती है। घर में जय और अनन्या के तानों के बावजूद, वह अपनी प्रतिभा से सबको प्रभावित करती है। ईर्ष्या में अनन्या उसकी रिसर्च लीक करने और विस्फोटक उड़ाने की कोशिश करती है, लेकिन आदिती उसे हर बार विफल कर देती है। अंत में आदिती परिवार की असली उत्तराधिकारी बनती है और अनन्या को सजा मिलती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

चश्मे वाली बहन का डर

चश्मे वाली बहन की आंखों में जो डर था, वह सब कुछ बता रहा था। जब वह सूट वाली महिला को देखती है, तो लगता है जैसे कोई पुराना राज खुल गया हो। इस कहानी में हर चेहरे के पीछे एक छिपी हुई मंशा है। असली वारिस कौन है, यह जानने के लिए हर पल की प्रतिक्रिया को गौर से देखना पड़ता है। घर का माहौल इतना तनावपूर्ण है कि सांस लेना भी मुश्किल लग रहा है। यह ड्रामा सच में दिलचस्प मोड़ ले रहा है और दर्शकों को बांधे रखता है।

सूट वाली लड़की की चालाकी

भूरे रंग के सूट वाली लड़की की मुस्कान में एक अजीब सी चालाकी है। वह जब कमरे में प्रवेश करती है, तो सबकी नजरें उस पर टिक जाती हैं। पिताजी का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था। लगता है कि सच्ची जीत किसी एक की नहीं होने वाली है। परिवार के रिश्तों में यह कड़वाहट क्यों है, यह देखना बहुत दर्दनाक है। हर डायलॉग में एक नया खुलासा छिपा हुआ लगता है जो कहानी को आगे बढ़ाता है।

सूटकेस और आंसू

सूटकेस पकड़े हुए उस बेटी की आंखों में आंसू देखकर दिल भर आया। मां का हाथ उसके कंधे पर था, लेकिन पिता का रवैया बहुत सख्त लग रहा था। शायद वह घर छोड़कर जा रही है या नई शुरुआत करने आई है। असली वारिस की कहानी में यह पल सबसे भावुक था। हमें नहीं पता कि उसकी चुप्पी के पीछे क्या राज हैं। बस यही उम्मीद है कि उसे न्याय मिलेगा और सब ठीक हो जाएगा।

पिताजी का गुस्सा

पिताजी के चेहरे पर जो झुर्रियां थीं, उनमें गुस्सा साफ झलक रहा था। जब वह भूरे सूट वाली लड़की से बात कर रहे थे, तो उनकी आवाज में कठोरता थी। यह परिवार बाहर से अमीर लगता है, लेकिन अंदर से टूट चुका है। सच्ची जीत पाने के लिए शायद इस लड़की को बहुत संघर्ष करना पड़े। हर दृश्य में एक नया संघर्ष दिखाया गया है जो दर्शकों को बांधे रखता है और उत्सुक बढ़ाता है।

मां का सहानुभूतिपूर्ण किरदार

मां का किरदार बहुत सहानुभूतिपूर्ण लगा। वह अपनी बेटी को सांत्वना दे रही थी, लेकिन उनकी आंखों में भी चिंता थी। इस घर की दीवारें कई राज छिपाए हुए हैं। असली वारिस कौन बनेगा, यह फैसला अब जल्द ही होने वाला है। मुझे यह देखना पसंद आया कि कैसे हर पात्र अपनी भूमिका में सच्चा है। यह कहानी हमें रिश्तों की अहमियत समझाती है और दिल को छू लेती है।

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