इस एक्शन सीन ने दिल जीत लिया। नायिका ने अकेले ही गुंडों को धूल चटा दी। चश्मे वाला साथी बस देखता रह गया। असली वारिस, सच्ची जीत में ऐसा ड्रामा कम ही देखने को मिलता है। हर मुक्के में गुस्सा साफ झलक रहा था। रात के उस सन्नाटे में लोहे की पाइप की आवाज़ गूंज रही थी। यह दृश्य बहुत ही रोमांचक था। स्क्रीन पर जो एनर्जी दिखाई दी वह लाजवाब थी। दर्शक भी हैरान रह गए।
क्लब के अंदर एंट्री देखकर रोंगटे खड़े हो गए। सब लोग पार्टी कर रहे थे तभी वह पाइप लेकर घुसी। असली वारिस, सच्ची जीत की कहानी में यह ट्विस्ट बहुत भारी था। सोफे पर बैठे शख्स की आंखें फटी की फटी रह गईं। शोरगुल के बीच खामोशी छा गई। नायिका के चेहरे पर कोई डर नहीं था। यह बदले की आग साफ दिख रही थी। माहौल में तनाव बहुत बढ़ गया था। सबकी सांसें रुक गईं।
चश्मे वाले साथी का एक्सप्रेशन देखने लायक था। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके साथ वाली नायिका इतनी ताकतवर है। असली वारिस, सच्ची जीत में किरदारों के बीच की केमिस्ट्री गजब की है। वह बस हैरानी से देखता रहा। जब उसने चश्मा ठीक किया तो लगा समय थम गया हो। इस शॉक को बहुत अच्छे से दिखाया गया है। दर्शक भी हैरान रह गए। यह पल यादगार था।
स्कूल यूनिफॉर्म जैसी सूट में नायिका का लुक बहुत कूल था। टाई और ब्लेजर में वह किसी एजेंट से कम नहीं लग रही थी। असली वारिस, सच्ची जीत के कॉस्ट्यूम डिजाइनर की दाद देनी होगी। रात की रोशनी में उसका स्टाइल और भी निखर रहा था। गुंडों के सामने उसका खड़ा होना किसी हीरो से कम नहीं था। यह विजुअल ट्रीट था। सबकी नजरें उसी पर थीं। हर कोई देखता रह गया।
सड़क से लेकर क्लब तक का सफर बहुत तेज रफ्तार था। पहले बाहर लड़ाई हुई फिर सीधा पार्टी में घुस गई। असली वारिस, सच्ची जीत की स्क्रिप्ट में यह बदलाव बहुत जबरदस्त लगा। कहीं शोर था तो कहीं सन्नाटा। नायिका का गुस्सा किसी को नहीं बख्श रहा था। हर सीन में नया टेंशन बना हुआ था। कहानी आगे बढ़ती गई। दर्शक बंधे रहे।
विलेन के चेहरे पर डर साफ झलक रहा था जब पाइप उसके चेहरे के पास आई। उसकी सारी शराब उतर गई होगी। असली वारिस, सच्ची जीत में खलनायक की हालत बहुत खराब दिखाई गई। वह बस देखता रह गया कि अब क्या होगा। उसकी हिम्मत टूट चुकी थी। नायिका का गुस्सा साफ दिख रहा था। मौत सामने खड़ी थी। जान निकल गई थी।
नायक और नायिका के बीच की चुप्पी बहुत कुछ कह रही थी। लड़ाई के बाद भी वह उसके पीछे खड़ा रहा। असली वारिस, सच्ची जीत में रिश्तों की यह गहराई अच्छी लगी। वह उसे रोक नहीं रहा था बस साथ खड़ा था। यह भरोसा बहुत खास था। आंखों ही आंखों में बातें हो रही थीं। यह पल बहुत खास था। कोई शब्द नहीं थे।
फाइट कोरियोग्राफी बहुत रियल लगी। कोई नकली स्टंट नहीं था। नायिका ने हर वार सही जगह किया। असली वारिस, सच्ची जीत के एक्शन डायरेक्टर ने कमाल कर दिया। गिरने का अंदाज और उठने का जोश सब सही था। दर्शक को सीट से हिलने नहीं दिया। यह एक्शन ब्लॉकबस्टर जैसा था। पसीना बह गया देखकर। सांसें थम गई थीं।
रात के सीन में लाइटिंग का खेल बहुत अच्छा था। स्ट्रीट लाइट और क्लब की रंगीन रोशनी। असली वारिस, सच्ची जीत के सिनेमेटोग्राफी ने माहौल बना दिया। अंधेरे में चमकते हुए चेहरे बहुत प्रभावशाली लगे। हर फ्रेम एक तस्वीर जैसा था। यह दृश्य बहुत ही खूबसूरत तरीके से कैद किया गया। नजारा देखने लायक था। रंग बहुत गहरे थे।
अंत में जब उसने पाइप नीचे की तो लगा कहानी अभी बाकी है। यह तो बस शुरुआत लग रही थी। असली वारिस, सच्ची जीत का अगला पार्ट देखने की बेचैनी बढ़ गई। नायिका की जीत पक्की थी। सब लोग जमीन पर पड़े थे। यह क्लाइमेक्स बहुत संतोषजनक था। इंतजार नहीं हो रहा है। आगे क्या होगा।