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असली वारिस, सच्ची जीतवां42एपिसोड

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असली वारिस, सच्ची जीत

अनाथालय में पली सुस्मिता जब वर्मा परिवार की असली बेटी निकलती है, तो अपनी लैब के लिए फंडिंग पाने वापस लौटती है और आदिती वर्मा बन जाती है। घर में जय और अनन्या के तानों के बावजूद, वह अपनी प्रतिभा से सबको प्रभावित करती है। ईर्ष्या में अनन्या उसकी रिसर्च लीक करने और विस्फोटक उड़ाने की कोशिश करती है, लेकिन आदिती उसे हर बार विफल कर देती है। अंत में आदिती परिवार की असली उत्तराधिकारी बनती है और अनन्या को सजा मिलती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

दादा जी की एंट्री ने बदल दी सबकी सांसें

जब दादा जी अपनी लाठी टेकते हुए कमरे में आए, तो पूरे परिवार की हलचल थम गई। निशा और अरुण के चेहरे पर घबराहट साफ दिख रही थी। इस बीच जोड़ी चुपचाप अपनी जगह पर खड़ी रही। असली वारिस, सच्ची जीत में ऐसा लगता है कि सत्ता का संघर्ष अब शुरू हुआ है। दादा जी की चुप्पी सबसे ज्यादा डरावनी थी और सबकी सांसें रुक सी गईं।

निशा का तोहफा देख सब हैरान रह गए

निशा वर्मा ने जब लाल डिब्बे में पन्ने की मुहर दिखाई, तो कमरे में सन्नाटा छा गया। उसकी आंखों में जीत की चमक साफ दिख रही थी। विजय वर्मा की बेटी होने के नाते उसे खास बनाता है, लेकिन क्या यह तोहफा दादा जी को पसंद आएगा। असली वारिस, सच्ची जीत की कहानी में यह पल बहुत अहम साबित होगा और सबकी नजरें उस पर थीं।

अरुण का आत्मविश्वास देखते ही बनता है

अरुण वर्मा ने पीले डिब्बे में लकड़ी का रोल पेश किया। उसका अंदाज ऐसा था जैसे उसे अपनी जीत पर यकीन हो। विजय वर्मा का बेटा होने के नाते उस पर जिम्मेदारी ज्यादा है। असली वारिस, सच्ची जीत में अरुण का यह दांव बहुत बड़ा साबित हो सकता है। सबकी नजरें उसी पर टिकी थीं और वह खुद को सबसे ऊपर मान रहा था।

गुलाबी सूट वाली लड़की की चुप्पी可疑 है

जो लड़की गुलाबी सूट में थी, वह सबसे अलग लग रही थी। जब सब तोहफे दे रहे थे, वह बस देखती रही। उसकी आंखों में कुछ छिपा था। शायद वह खेल का सबसे बड़ा हिस्सा है। असली वारिस, सच्ची जीत में ऐसे किरदार अक्सर खेल पलट देते हैं। उसकी मुस्कान के पीछे का राज जानना जरूरी है और वह चुपचाप सब देख रही थी।

छोटी चाची की बातों में था जहर

छोटी चाची विनोद वर्मा की पत्नी, जब बात कर रही थीं तो उनकी आवाज में नमी थी। वे सबको भांप रही थीं। परिवार में उनकी पकड़ मजबूत लगती है। असली वारिस, सच्ची जीत में सास-बहू या रिश्तेदारों के बीच की खींचतान हमेशा दिलचस्प होती है। उनकी नजरें किसी को बख्श नहीं रही थीं और सब डर रहे थे।

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