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असली वारिस, सच्ची जीतवां21एपिसोड

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असली वारिस, सच्ची जीत

अनाथालय में पली सुस्मिता जब वर्मा परिवार की असली बेटी निकलती है, तो अपनी लैब के लिए फंडिंग पाने वापस लौटती है और आदिती वर्मा बन जाती है। घर में जय और अनन्या के तानों के बावजूद, वह अपनी प्रतिभा से सबको प्रभावित करती है। ईर्ष्या में अनन्या उसकी रिसर्च लीक करने और विस्फोटक उड़ाने की कोशिश करती है, लेकिन आदिती उसे हर बार विफल कर देती है। अंत में आदिती परिवार की असली उत्तराधिकारी बनती है और अनन्या को सजा मिलती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

किताबों वाला प्यार

लाइब्रेरी की शांति में ये मुलाकात कुछ खास लग रही थी। लड़की के हाथ में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की किताब थी और लड़के ने डेटाबेस वाली दी। ऐसा लगा जैसे ज्ञान का आदान प्रदान हो रहा हो। बीच में असली वारिस, सच्ची जीत का जिक्र आया तो लगा कहानी गहरी है। उनकी आंखों में एक अजीब सी समझ थी। हाथ मिलाने का तरीका बहुत प्यारा था।

ईर्ष्या की चिंगारी

सब कुछ ठीक चल रहा था तब तक जब तक दरवाजे के पीछे वो लड़की दिखाई दी। उसकी नजरों में गुस्सा साफ था। शायद वो इस जोड़ी को नहीं देख सकती। असली वारिस, सच्ची जीत में ऐसे ट्विस्ट ही तो मजे देते हैं। लड़का बहुत शांत था पर लड़की थोड़ी घबराई हुई लग रही थी। आगे क्या होगा ये देखना बाकी है।

चश्मे वाला हीरो

चश्मे वाले लड़के की स्माइल ने दिल जीत लिया। वो कितना कॉन्फिडेंट लग रहा था जब उसने किताब थमाई। लड़की की घबराहट साफ दिख रही थी। असली वारिस, सच्ची जीत की कहानी में ये पल अहम लगता है। लाइब्रेरी का माहौल बहुत सुकून भरा था पर बीच में तनाव भी था। काश ये पल ऐसे ही चलता रहता।

हाथ मिलाने का मतलब

सिर्फ हाथ मिलाना नहीं था ये, ये तो किसी वादे जैसा लग रहा था। दोनों की मुस्कान में छिरा राज जानना चाहूंगी। असली वारिस, सच्ची जीत में रिश्तों की ये बारीकियां बहुत पसंद आईं। लड़की ने प्रार्थना की जैसे मुद्रा बनाई थी शुरू में। शायद उसे उस किताब की बहुत जरूरत थी। बहुत प्यारा सीन था।

पढ़ाई या प्यार

किताबें तो बहाना लग रही हैं असल में तो ये दो दिलों की बातचीत है। एआई और एसक्यूएल की किताबें बीच में आईं पर नजरें तो एक दूसरे पर थीं। असली वारिस, सच्ची जीत का टैगलाइन यहीं फिट बैठता है। क्लासरूम का बैकग्राउंड बहुत वास्तविक लगा। मुझे ये कपल बहुत पसंद आ रहा है।

दरवाजे वाली गर्ल

आखिर में वो लड़की कौन थी जो दरवाजे से झांक रही थी? उसका एक्सप्रेशन सब बता रहा था। शायद वो लड़के को पसंद करती है। असली वारिस, सच्ची जीत में ऐसे त्रिकोण प्रेम कहानी ही तो मसाला डालते हैं। मुख्य लड़की बहुत मासूम लग रही थी अपने सूट में। कहानी में अब ट्विस्ट आएगा।

बेज कलर का जादू

दोनों के कपड़ों का रंग मिलान देखी आपने? बेज सूट और बेज स्वेटर। जैसे वो एक दूसरे के लिए बने हों। असली वारिस, सच्ची जीत में दृश्यों पर बहुत ध्यान दिया गया है। लड़के के चश्मे ने उसे बहुत बुद्धिमान लुक दिया था। लाइब्रेरी की रोशनी भी बहुत नरम थी। बहुत अच्छा लगा ये दृश्य।

घबराहट और राहत

लड़की शुरू में बहुत नर्वस लग रही थी जैसे कोई बड़ा रिस्क ले रही हो। फिर जब किताब मिली तो चेहरे पर राहत थी। असली वारिस, सच्ची जीत की थीम यहीं दिखती है कि मेहनत रंग लाती है। लड़के ने बहुत भरोसा दिया उसे। ये दोस्ती आगे बढ़ेगी या प्यार बन जाएगा?

स्माइल का असर

लड़के की स्माइल देखकर लगता है वो दिलों का हाल जानता है। इतनी शांति से बात करना आसान नहीं होता। असली वारिस, सच्ची जीत में किरदारों की गहराई बहुत अच्छी है। लड़की की आंखों में चमक साफ दिख रही थी जब उसे किताब मिली। ये सीन बार बार देखने को जी चाहता है।

नई शुरुआत का संकेत

ये मुलाकात किसी नई शुरुआत का संकेत लग रही थी। किताबों के बदले में वादे हुए लगते हैं। असली वारिस, सच्ची जीत की कहानी यहीं से शुरू होती है शायद। पीछे खड़ी लड़की की एंट्री ने डर पैदा कर दिया। अब देखना है ये जोड़ी कैसे आगे बढ़ती है। बहुत उत्सुकता हो रही है।