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असली वारिस, सच्ची जीतवां36एपिसोड

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असली वारिस, सच्ची जीत

अनाथालय में पली सुस्मिता जब वर्मा परिवार की असली बेटी निकलती है, तो अपनी लैब के लिए फंडिंग पाने वापस लौटती है और आदिती वर्मा बन जाती है। घर में जय और अनन्या के तानों के बावजूद, वह अपनी प्रतिभा से सबको प्रभावित करती है। ईर्ष्या में अनन्या उसकी रिसर्च लीक करने और विस्फोटक उड़ाने की कोशिश करती है, लेकिन आदिती उसे हर बार विफल कर देती है। अंत में आदिती परिवार की असली उत्तराधिकारी बनती है और अनन्या को सजा मिलती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

लड़की का असली रूप

कक्षा से खेल कक्ष तक का सफर बहुत रोमांचक है। जब वह लड़की बैग उतारती है, तो लगता है कि अब असली खेल शुरू होगा। उसकी आंखों में डर नहीं बल्कि आत्मविश्वास है। इस कार्यक्रम असली वारिस, सच्ची जीत में कार्रवाई दृश्य की तैयारी बहुत शानदार दिखाई गई है। मुझे यह पल बहुत पसंद आया जब उसने आस्तीन चढ़ाई।

विलेन की एंट्री

तेंदुए की जैकेट वाला व्यक्ति बहुत खतरनाक लग रहा है। उसके पीछे काले कपड़े वाले गुंडे भी हैं। लेकिन लड़की बिल्कुल नहीं घबराई। यह देखकर मजा आया कि कैसे वह अकेले सबका सामना करने को तैयार है। कहानी में यह मोड़ बहुत अच्छा लगा। असली वारिस, सच्ची जीत की कहानी में ऐसा ट्विस्ट उम्मीद नहीं था।

टेक्नोलॉजी का उपयोग

जब उसकी आंखों में नीली रोशनी दिखाई दी, तो मैं हैरान रह गया। यह जांच प्रणाली बहुत शानदार लग रही थी। दुश्मनों की जानकारी पलक झपकते ही मिल गई। यह विज्ञान और कार्रवाई का अच्छा मिश्रण है। असली वारिस, सच्ची जीत का यह अंदाज अनोखा है। हर दृश्य में कुछ नया है।

स्कूल यूनिफॉर्म में हीरोइन

भूरे रंग की पोशाक और गलबंधन बहुत सूट कर रहा है उस पर। साधारण छात्रा लगती है लेकिन असलियत कुछ और ही है। जब वह खेल टेबल के पास खड़ी हुई, तो माहौल बदल गया। असली वारिस, सच्ची जीत में यह दृश्य खास है। उसकी सादगी के पीछे छिपी ताकत को देखकर मजा आ गया। यह किरदार बहुत यादगार बन गया है।

दोस्तों का साथ

वह लड़का जो खेल जैकेट पहने था, वह थोड़ा चिंतित लग रहा था। शायद उसे नहीं पता था कि यहां क्या होने वाला है। लेकिन लड़की ने उसे संभाल लिया। दोस्ती और सुरक्षा का यह रिश्ता बहुत प्यारा लगा। असली वारिस, सच्ची जीत में रिश्तों की यह गहराई अच्छी लगी।

बिलियर्ड हॉल का माहौल

असली वारिस, सच्ची जीत की सेटिंग कमाल की है। अंधेरा कमरा और ऊपर से लटकती दीप। यह जगह किसी कार्रवाई फिल्म के सेट जैसी लग रही थी। धुएं का उपयोग करके खलनायक का प्रवेश ग्रैंड बनाई गई है। निर्देशन बहुत सटीक है। हर दृश्य में एक अलग माहौल है। दर्शक को बांधे रखने के लिए यह सेटिंग बहुत जरूरी है।

संघर्ष की तैयारी

असली वारिस, सच्ची जीत का यह जोश लाजवाब है। जब उसने अपने हाथों को सहलाया और कमर सीधी की, तो समझ गया कि अब कोई बड़ा होने वाला है। बिना किसी हथियार के वह पांच लोगों से लड़ने को तैयार है। यह साहस बहुत कम लोगों में होता है। पर्दे पर यह जोश देखकर रोंगटे खड़े हो गए। बहुत ही दमदार दृश्य है।

प्रोफेसर का रोल

शुरुआत में कक्षा में प्रोफेसर जो बोल रहे थे, उसका क्या मतलब था? शायद यह सब उसी से जुड़ा है। कहानी के धागे धीरे धीरे खुल रहे हैं। पुराने व्यक्ति और नई पीढ़ी का यह टकराव दिलचस्प है। असली वारिस, सच्ची जीत में हर किरदार का अपना महत्व है। मुझे अगली कड़ी देखने की जल्दी है।

एक्शन की शुरुआत

असली वारिस, सच्ची जीत का यह अंदाज पसंद आया। अभी तो बस शुरूआत हुई है, लेकिन मजा आ गया। जब वे सभी लोग दौड़ते हुए आए, तो लगा कि अब बवाल होगा। लेकिन नायिका शांत खड़ी है। यह शांति और शोर का अंतर बहुत अच्छा है। दृश्य की गुणवत्ता भी बहुत साफ है। ऐसे कार्यक्रम मिलना सुखद है।

अगले एपिसोड का इंतजार

यह अंत बहुत अच्छा था। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि वह लड़की क्या करेगी। क्या वह अकेले सबको हरा देगी या कोई और आएगा? रहस्य बना हुआ है। मुझे यह शैली बहुत पसंद आ रही है। असली वारिस, सच्ची जीत का हर भाग बेहतरीन है। बस जल्दी से अगली कड़ी आए।