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असली वारिस, सच्ची जीतवां40एपिसोड

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असली वारिस, सच्ची जीत

अनाथालय में पली सुस्मिता जब वर्मा परिवार की असली बेटी निकलती है, तो अपनी लैब के लिए फंडिंग पाने वापस लौटती है और आदिती वर्मा बन जाती है। घर में जय और अनन्या के तानों के बावजूद, वह अपनी प्रतिभा से सबको प्रभावित करती है। ईर्ष्या में अनन्या उसकी रिसर्च लीक करने और विस्फोटक उड़ाने की कोशिश करती है, लेकिन आदिती उसे हर बार विफल कर देती है। अंत में आदिती परिवार की असली उत्तराधिकारी बनती है और अनन्या को सजा मिलती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

एक्शन का बेमिसाल जलवा

एक्शन सीन्स बहुत जबरदस्त थे। बिलियर्ड्स टेबल पर हुई लड़ाई देखकर रोंगटे खड़े हो गए। सूट वाली लड़की ने दिखा दिया कि असली ताकत क्या होती है। जब उसने स्टिक से वार किया, तो लग रहा था जैसे कोई एक्शन फिल्म देख रहे हों। असली वारिस, सच्ची जीत नाम की इस कहानी में ऐसा ड्रामा कम ही देखने को मिलता है। हर पल रोमांच से भरा हुआ था। ब्लॉन्ड वाले गुंडे की हालत खराब हो गई। सब हैरान थे। मुझे यह बहुत पसंद आया।

हीरोइन का लाजवाब अंदाज

मुख्य किरदार का अंदाज बहुत लाजवाब है। साधारण कपड़ों में भी हीरोइन सबसे अलग लग रही थी। बिलियर्ड्स हॉल का माहौल बहुत गहरा था। जब गुंडे आए तो लगा मुश्किल होगी, पर उसने सबको सबक सिखाया। असली वारिस, सच्ची जीत की कहानी में ऐसा कॉन्फिडेंस देखकर मजा आ गया। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे वीडियो देखना सुकून देता है। आखिर में उसका जाना बहुत स्टाइलिश था। सभी हैरान थे। सच में बहुत अच्छा लगा।

ट्विस्ट से भरी कहानी

वीडियो की शुरुआत शांत थी, पर अंत तक हंगामा खड़ा हो गया। लड़की ने बिना डरे चुनौती स्वीकार की। चाकू निकालने वाले की हिम्मत तो देखो, पर हीरोइन ने उसे भी नहीं छोड़ा। असली वारिस, सच्ची जीत में ऐसे ट्विस्ट्स दर्शकों को बांधे रखते हैं। मुझे लगा अब वह हार जाएगी, पर उसने पलटवार किया। एक्शन कोरियोग्राफी बहुत सटीक थी। हर फ्रेम में जान थी। मजा आ गया। देखने में बहुत मजा आया।

खलनायक का बेहतरीन रोल

खलनायक का किरदार निभाने वाले ने बहुत अच्छा किया। ब्लॉन्ड हेयर वाला गुंडा बहुत घमंडी लग रहा था। जब उसे चोट लगी तो उसके चेहरे का एक्सप्रेशन देखने लायक था। हीरोइन ने बिना हथियार के सबको हराया। असली वारिस, सच्ची जीत की यह लड़ाई यादगार बन गई। डर के माहौल में भी उसने हिम्मत नहीं हारी। ऐसे किरदार हमेशा दिल जीत लेते हैं। बहुत बढ़िया लगा। सबको देखना चाहिए।

विजुअल्स का कमाल

सेट डिजाइन और लाइटिंग बहुत प्रोफेशनल लग रही थी। अंधेरे कमरे में लाइट्स का खेल अच्छा था। लड़की की सूट की स्टाइलिंग बहुत जच रही थी। जब उसने बैग उठाया और चली गई, तो लगा कहानी पूरी हुई। असली वारिस, सच्ची जीत में ऐसे विजुअल्स देखकर खुशी होती है। गुंडे भागते हुए बहुत कॉमेडिक लग रहे थे। कुल मिलाकर एक बेहतरीन शॉर्ट फिल्म का अनुभव रहा। सबको पसंद आएगा। बहुत अच्छा है।

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