कक्षा में जब वो अध्यापक प्रवेश किया तो सबकी सांसें रुक गईं। काली कमीज वाली लड़की की जलन साफ दिख रही थी जब उसने कोट वाली लड़की से बात की। ये स्थिति बहुत रोचक है। बिल्कुल असली वारिस, सच्ची जीत वाली फीलिंग आ रही है जहां हर कोई अपनी जगह साबित करना चाहता है। दोस्ती और दुश्मनी की लकीरें धुंधली होती दिख रही हैं इस दृश्य में। सबकी नजरें उसी पर टिकी हैं।
चश्मे वाले अध्यापक की मुस्कान ने सबका दिल जीत लिया। वो जिस तरह से देर से आई छात्रा के पास गया, वो सामान्य नहीं लग रहा था। शायद उनके बीच कोई पुरानी कहानी है। हुडी वाली सहेली की प्रतिक्रियाएं कमाल की हैं। वो सब कुछ जानती हुई लग रही है। माहौल में तनाव और उत्सुकता दोनों है। असली वारिस, सच्ची जीत में भी ऐसे ही मोड़ आते हैं जब कोई नया पात्र प्रवेश लेता है और सबकी नींद उड़ा देता है।
देर से कक्षा में आना और सबकी नजरें खींच लेना, ये कोई आम बात नहीं है। उस लड़की के चेहरे पर आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। वो जानती है कि वो क्या चाहती है। सामने बैठी लड़की का गुस्सा ठंडा पड़ता दिख रहा है। ये कहानी आगे बहुत रोचक होने वाली है। असली वारिस, सच्ची जीत की तरह ही यहां भी हर किसी की अपनी महत्वाकांक्षा है जो टकराव पैदा कर रही है। स्क्रीन पर ये संबंध देखने लायक है।
दोस्त के साथ बैठकर फुसफुसाना और फिर अध्यापक को देखकर चौंक जाना। ये कॉलेज लाइफ का असली मजा है। लेकिन यहां कुछ ज्यादा ही नाटक हो रहा है। लड़कों और लड़कियों के बीच की यह खींचतान देखने में बहुत मजेदार लग रही है। हर कोई किसी न किसी से जल रहा है। असली वारिस, सच्ची जीत वाले अंदाज में यहां भी सत्ता संघर्ष खेल रहे हैं। कौन जीतेगा ये तो आगे ही पता चलेगा।
खिड़की वाली सीट और लकड़ी की मेज, कक्षा बहुत सुंदर है। लेकिन असली खूबसूरती तो इन किरदारों के भावों में है। जब वो अध्यापक मुड़ा तो सबकी सांसें थम गईं। उसका व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली है। छात्राएं उसे घूर रही हैं। असली वारिस, सच्ची जीत में भी ऐसे ही आकर्षक किरदार होते हैं जो सबका ध्यान खींच लेते हैं। ये दृश्य बहुत ही फिल्मी तरीके से बनाया गया है।
काली कमीज वाली लड़की की आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। उसे लगा शायद वो खास है लेकिन अध्यापक ने दूसरी लड़की को प्राथमिकता दी। ये अस्वीकृति उसे बिल्कुल पसंद नहीं आया। चेहरे के हावभाव बहुत स्वाभाविक हैं। असली वारिस, सच्ची जीत की तरह यहां भी अहंकार का टकराव हो रहा है। देखना दिलचस्प होगा कि वो बदला कैसे लेगी। सब हैरान हैं।
हुडी वाली लड़की की मासूमियत सबको पसंद आ रही होगी। वो बीच में बची हुई है लेकिन सब कुछ देख रही है। उसकी हंसी और हैरानी वाले चेहरे दृश्य की जान हैं। वो दर्शक की आंखें बनकर सब दिखा रही है। असली वारिस, सच्ची जीत में भी ऐसा ही एक किरदार होता है जो सबकी खबर रखता है। ये दोस्ती आगे चलकर काम आएगी। सबको पसंद आ रहा है।
अध्यापक की चाल और बात करने का तरीका बहुत शालीन है। वो सिर्फ पढ़ाने नहीं आए हैं, लगता है कोई संदेश देने आए हैं। उस लड़की से बात करते वक्त उनकी आंखों में कुछ और ही चमक थी। ये रिश्ता क्या है? असली वारिस, सच्ची जीत वाले मोड़ की तरह ये भी एक बड़ा राज लग रहा है। दर्शक इसी उलझन में बने रहना चाहते हैं।
कोट और टाई पहनकर कक्षा में आना दिखाता है कि वो कितनी गंभीर है। बाकी सब साधारण हैं लेकिन वो अलग है। ये उसके व्यक्तित्व को मजबूत प्रस्तुत करता है। सबकी नजरें उसी पर टिकी हैं। असली वारिस, सच्ची जीत में भी पहनने का तरीका से किरदार की पहचान होती है। ये दृश्य कथा बहुत अच्छी लगी। आगे क्या होगा ये जानने की उत्सुकता बढ़ गई है।
अंत में जब कैमरा उस लड़की के चेहरे पर पास आया तो सब समझ गए कि खेल शुरू हो गया है। उसकी नफरत साफ झलक रही थी। ये दृश्य अगले भाग के लिए उत्तम अधूरा अंत है। मैं अगला भाग देखने के लिए बेताब हूं। असली वारिस, सच्ची जीत की तरह ये कहानी भी गहराई में जाती दिख रही है। नाटक और रोमांस का सही मिश्रण है ये दृश्य।