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गाँव का गौरववां10एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

दावत का खुशनुमा आगाज

शुरू में दावत का नज़ारा बहुत खुशनुमा था। बुजुर्ग महिला का शुभकामना भाषण दिल को छू गया। लेकिन फिर माहौल अचानक बदल गया। नेटशॉर्ट एप्लिकेशन पर यह देखना बहुत रोमांचक था। गाँव का गौरव ने ग्रामीण भावनाओं को खूबसूरती से दिखाया है। खाना भी बहुत स्वादिष्ट लग रहा था!

अंगूठी का राज

वो सोने की अंगूठी दिखाने का पल बहुत अहम था। वो बहुत गर्वित लग रही थीं। पर फिर माहौल क्यों बदला? ग्रे रंग का कोट वाला नौजवान संघर्ष का केंद्र लगता है। सभी का अभिनय शानदार है। गाँव का गौरव आपको अनुमान लगने नहीं देता। कथा बहुत मज़बूत है। हर पल नया है।

गर्भवती महिला की एंट्री

गर्भवती महिला के प्रवेश ने सब कुछ बदल दिया। उनकी मुस्कान कोमल थी पर स्थिति भारी लग रही थी। ग्रे रंग के कोट वाले व्यक्ति की प्रतिक्रिया तीव्र थी। गाँव का गौरव की कहानी कहने का तरीका पसंद आया। पारिवारिक रिश्तों की बारीकियाँ देखने लायक हैं। बहुत पसंद आया। सच्चाई सामने आई।

लाल पोशाक वाली का दर्द

लाल पोशाक वाली महिला निखर कर लग रही थीं पर चिंतित भी। उनके हाथों की विनती सब कह रही थी। बुजुर्ग व्यक्ति का भाव बेमिसाल था। यह कार्यक्रम नाटक बनाना जानता है। गाँव का गौरव इसलिए चर्चित हो रहा है। हर दृश्य में कुछ नया है। देखते रहने का मन करता है। बस देखते रहो।

हंसी से झटके तक

हंसी से झटके तक सेकंडों में। बुजुर्ग महिला का चेहरा जब उन्हें एहसास हुआ। ग्रे रंग के कोट वाला व्यक्ति समझाने की कोशिश कर रहा था। इतना उच्च तनाव! गाँव का गौरव शुद्ध भावनाएं परोसता है। नेटशॉर्ट पर लगातार देखने लायक है। कहानी में दम है। रुकना मुश्किल है।

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