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गाँव का गौरववां3एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

कीचड़ भरे जूतों का सच

जब वह कीचड़ भरे जूतों के साथ अंदर आया, तो कमरे का माहौल पूरी तरह बदल गया। सूट वाले व्यक्ति की घमंडी मुस्कान और लाल पोशाक वाली महिला की हैरानी देखने लायक थी। गाँव का गौरव में ऐसे मोड़ बार-बार दिल को छू लेते हैं। क्या वह सच में चला जाएगा? यह सवाल मन में बना हुआ है।

विश्वासघात की बू

लाल पोशाक वाली महिला ने पासपोर्ट दिखाकर जो किया, वह विश्वासघात से कम नहीं था। उसकी आँखों में डर और लालच दोनों साफ दिख रहे थे। नेटशॉर्ट ऐप पर यह दृश्य देखकर मैं दंग रह गया। गाँव का गौरव की कहानी में हर किरदार की अपनी मजबूरी है।

अहंकार की हद

सूट पहने व्यक्ति का व्यवहार बहुत अहंकारी लग रहा था। उसने बिना बात किए ही सब कुछ कंट्रोल करने की कोशिश की। गर्भवती महिला की चुप्पी सबसे ज्यादा दर्दनाक थी। गाँव का गौरव में रिश्तों की यह जंग देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

अंधेरा गलियारा

अंधेरी गलियारे में वह अकेले चल रहा था, उसके कंधे पर बोझ और दिल पर चोट थी। यह दृश्य सिनेमेटोग्राफी का कमाल था। रोशनी और छाया का खेल भावनाओं को बयां कर रहा था। गाँव का गौरव का यह एपिसोड सबसे बेहतरीन लगा।

जश्न से खामोशी तक

शुरुआत में जश्न का माहौल था, लेकिन अंत में खामोशी छा गई। लाल पोशाक वाली महिला के चेहरे के भाव हर पल बदल रहे थे। क्या उसने सही फैसला किया? गाँव का गौरव में ऐसे सवाल हमेशा उठते रहते हैं। दर्शक के रूप में मैं कन्फ्यूज हूं।

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